कहियो भाषायी आ सांस्कृतिक जागरण लेल आरम्भ भेल ‘विद्यापति स्मृति पर्व’ किंवा ‘मिथिला विभूति पर्व'क स्वरूप आब अधोगति दिसि अग्रसर अछि, जे एहिठामक गौरवशाली संस्कृति लेल घून समान सिद्ध भ' रहल अछि । उक्त वक्तव्य मैपुप्र प्रतिनिधि सँ गपशप्प'क क्रम मे मैथिली'क सुप्रसिद्ध युवा रंग-निर्देशक आ भारत सरकार'क राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय मे कार्यरत डॉ. प्रकाश झा कहलन्हि । अपन बात रखैत ओ कहलन्हि जे जाहि मंचपर कहियो रवीन्द्र-महेन्द्र, मायानन्द मिश्र, सरस-रमेश, नन्द-नवल आदि सन भाषा-संस्कृति प्रति गम्भीर लोक बागडोर सम्हारैत माटि-पानि सँ भीजल प्रस्तुति दैत छलाह, से मंच आब आयातित आ फूहड़ गीत - संगीत परसनिहार अगम्भीर कलाकार सभक हाथमे चलि गेल अछि । आइ-काल्हि एकटा गीतक प्रस्तुतिमे गायक-गायिका लोकनि दस बेर कामेन्ट्री करैत थोपड़ी बजेबाक अपील करैत टाइमपास करैत छथि मंच पर । पहिने कलाकार'क गीत चयन आ प्रस्तुति सँ दर्शक-श्रोताक आत्मा स्पन्दित भेल करैत छल आ तकर विपरित आइ काल्हिक तथाकथित स्टार कलाकार'क प्रस्तुति आ भाव-भंगिमा सँ देहमात्र उत्तेजित होइत अछि । एकरा सांस्कृतिक क्षरण नहि तँ आर की कहल जेतैक ?
मैथिली मंचक वर्तमान दु:स्थिति पर आगू डा. झा कहैत छथि, जे एहि लेल कार्यक्रम सभ'क आयोजक लोकनि सेहो ततबे दोषी छथि । हुनका लोकनि केँ विद्यापति सन युगपुरुष'क नाम पर कयल जा रहल आयोजनमे न्यूनतम मंचीय मापदण्ड तँ निर्धारित करबाके टा चाही, अन्यथा फूहड़ता भरल कार्यक्रम'क आयोजन सँ मिथिला'क हानि छोड़ि लाभ तँ नहियें सम्भव अछि । ओ आगू कहलन्हि जे मैथिली'क रंगमंचक परिदृश्यमे सेहो एहि तरह'क खतरा सम्भाव्य अछि, जकरा समय अछैत रोकल जयबाक समवेत प्रयास आवश्यक अछि ।
ओ कहलन्हि जे हालहि मिथिलाक विराट व्यक्तित्व बटुक भाइ नहि रहलाह । ओ जतबे रंगमंच आ साहित्य'क छलाह, ततबे मैथिली सांस्कृतिक मंचमे उद्घोषकीय योगदान देने छथि, मुदा सोशल मिडियाइ जगतमे हुनका प्रति श्रद्धांजलि भरल पोस्ट सभमे अपनाकेँ मैथिलीक महान मंचीय कलाकार घोषित कयनिहार एक्कोटा कलाकार'क शोक-संवेदना'क एक्कोटा पाँति नहि अभरत । ई संवेदनहीनता आ अगम्भीरता'क उदाहरण मात्र थिक । मैथिलीक निजगुत संस्कृति केर संरक्षण-संवर्द्धन लेल मैथिलीक सांस्कृतिक मंच'क अधोगति पर लगाम लगेबाक बेगरता अछि, अन्यथा बिहार'क आने भाषाक गीत-संगीत जेना मैथिलीक स्थिति अवश्यम्भावी अछि ।
