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| गायक पवन नारायण |
आदि काल स’ मिथिलामे कतेको परम्परा चलैत आबि रहल अछि । एहि परम्परामे एकटा समृद्ध परम्परा थिक पाण्डित्य परम्परा । मिथिलावासी कोनो ने कोनो विधामे ज्ञानक सिद्धहस्ता प्राप्त करैत छलाह आ ओही स’ धनोपार्जन क’ अपन आ अपना परिवारक भरन पोषण करैत छलाह । चाहे वेद होइ वा कि कोनो शास्त्र । सबमे अपन सिद्धांत स्थापित करैत छलाह । पाण्डित्य परम्परा समयक संग अपन रूप बदलैत रहल अछि । आधुनिक समयमे सेहो एहि मे परिवर्तन आयल । किछु साल पहिने मैथिल युवाक पसन्द छल इंजिनियरिंग आ मेडिकल । एहि दुनू मे मैथिल युवा लोकनि नीक जेना स्थापित भेलाह । तकरा बादक दौर आयल सिविल सेवाक। अहू मे मैथिल युवा एक स' एक कीर्तिमान स्थापित केलाह । एकरा बाद समय आयल जर्नलीज्मक त' अहू मे मिथिलाक युवा स’ सौंसे देशक युवा पाछू पाछू रहलाह । किछु साल पहिने मैथिल युवाक झुकाव कम्प्यूटर दिस भेलन्हि त' अहू मे हम सब आगुए रहलहुँ । आजुक दौर आबि गेल अछि प्रजेंटेशनल विधाक । चाहे सिनेमा होई, वाकि रंगमंच, अभिनय होइ वाकि गायन, निर्देशन होइ वाकि आन कोनो टेकनिकल काज मैथिल युवा अहू विधामे आगू बढ़ि रहलाह अछि ।
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| गायक पवन नारायण संग अभिनेता दीपक ठाकुर |
मिथिलाक सैकड़ो युवामे गायन के क्षेत्रमे एक छथि पवन
नारायण । कतेको साल स’ हम मिथिलावासी
हिनक गायल गीत सुनैत आबि रहल छी । आजुक समयमे प्राय: सब सांस्कृतिक मंचक शोभा रहैत
छथि पवन नारायणजी । मुदा हिनका बारेमे जानकारी प्राप्त क’ र’ चाहलहुँ त’ मात्र एक्के आदमी द’ सकैत छलाह ओ ई स्वयं । कारण हमर समाज हिनका लोकनिक ध्वनि जतेक काल सुनैत छथि
बस ओतबे काल ई लोकनि मोन रहैत छथिन । किछु दिन पहिने हम पवन जीक संग दू दिन
बितेलहुँ । व्यक्तिगत रूपे सेहो हम प्रभावित भेलहुँ ।
मैथिल युवा गायक आ गीतकार पवन नारायण पिछला 19 साल
[1993 ई.] स’ मैथिली गीत गायन
क्षेत्रमे छथि । अपन बाल्याकाले स’ संगीत गायन स’ जूड़ल छथि पवन
नारायण । मधुबनी जिलाक बच्छी गामक ई युवा वाद्य यंत्र तबला आ गिटारक
नीक जानकार छथि । अपन बच्चा बाबा स’ जे किछु ज्ञान भेटलन्हि सैह हिनक संगीत प्रशिक्षणक मूल अछि । पवनजी गीतक सब
विधामे हस्तक्षेप रखैत छथि मुदा, मिथिलाक पारम्परिक गीतमे खूब मोन लगैत छनि । ओना
आम जनमे हिनक गाओल रोमांटिक गीत बेसी चर्चित अछि । जे कियो एहि विधा के रसिक छथि ओ
लोकनि पवन जी के मिथिलाक उदित नारायण कहि क’ संबोधित करैत छथि । एकर कारण ई जे एहि दुनू गायक के आवाज
मे बहुत अधिक मेल छनि । दुनू गोटे प्राय: रोमांटिक गीत गाब’मे माहिर छथि । जहिना उदित नारायण जी हिन्दीमे
चर्चित छथि त’ पवन नारायण मैथिली मे । उदित
जी सेहो नारायण त’ पवन जी सेहो
नारायण । पवन जी व्यक्तिक रूपमे सेहो सदाशयताक प्रतीक छथि । आजुक समयमे मैथिली
गायिकीमे सुश्री रंजना झाक आवाज हिनका बड्ड पसिन छनि त’ हिन्दी गायिकी मे उदित जीक आवाज ।
विद्यापति गीतक प्रेमी पवन नारायण जी आजुक समयमे विद्यापति
गीत के नव नव अंदाज होयबाक बेगरता बुझि रहलाह छथि । विद्यापति गीत जे कि
स्थापित गिति लय अछि एहि मे प्रयोगक त’ खगता अछिए । बेसी स’ बेसी प्रयोग होयत
तखने एहि गीतक आरो माँग होयत आ नव नव युवा सृजन लेल अग्रसर होयताह । मुदा, आजुक
समयमे भ’ रहल अछि एकर ठीक
उल्टा । जखने कोनो युवा विद्यापति गीतक स्थापित लय मे बदलाब केलन्हि कि आम
जन तेना ने होहकारि क’ छूटल कि बेचारे
विद्यापति गीत स’ अपना के लग्गी
भरि दूर क’ लैत छथि । एहन स्थिति हमरा जनैत मैथिली संगीत परम्पराक
सबस’ पैघ खामी अछि ।
गायक लोकनि सेहो एखन तक ई निश्चित नै क’ सकलाह अछि जे मैथिली श्रोता लोकनि की चाहि रहल छथि ? एहना स्थिति मे एकटा नीक
मार्गदर्शनक खगता बेसी बुझना जा रहल अछि । एहि गप्प स’ पवन नारायण जी सेहो सहमत छथि । आयोजनक श्रोता लोकनि मैथिली पेरोडीमे
बेसी रुचि लैत छथि । कोनो हिन्दी फिल्मक प्रचलित गीतक शब्दानुवाद मैथिलीमे सुनब
बेसी गोटे के पसिन छनि । ई शब्दानुवाद जँ दूइ अर्थी हुए त’ आरो नीक । परिपक्व गायक लोकनि एहन गायन स’ अपना के दूर राख’ चाहैत छथि मुदा नवका गायक लोकनि जिनकर मात्र आवाज नीक छनि एहि विधाक ज्ञान कम
छनि एहन गीत गाबि क’ परिपक्व गायकक
कठिनाई आरो बढ़ा रहल छथि ।
जँ अहाँक
भेंट पवन नारायण जी स' भेल आ अहाँ एकटा अपन पसन्दीदा गीत गाबक
आग्रह हिनका स’
केलियन्हि त’
हुनका मुँह सँ सहजहि निकलि जाइत छनि -
जाहि
बाट पर काँट गरल अछि, ताहि बाट पर चल’ दिअ’
दुर्गति
देख हमर जीवन के, टोकू नहि कियो, बढ़’ दिअ’
जहिना आन आन विधाक आब माहौल बनि गेल अछि तहिना मैथिली गायन
लेल सेहो नीक माहौल बनेबाक खगता छैक । ओना फिल्म बेसी बनला स’ ई माहौल आब बहुत जल्दी बनबाक संभावना देखा रहल अछि । मैथिली गायन
परम्परामे कतेको लोकनि लागल रहलाह अछि। आजुक समयमे सेहो पचास स’
बेसी युवा लोकनि लगातार एहि विधामे नीक स’ नीक काज क’
रहलाह अछि, मुदा एखन तक हिनका लोकनिक मिथिला साहित्य समाज वाकि बुद्धिजीवी समाज
कोनो तरहक लिखित साक्ष्य बनेबाक बेगरताक अनुभव नै केलक अछि । समाजशास्त्री लोकनि
चुप छथि । एहि विधामे अपन योगदान देनिहार लोकनिक प्रलेखन अति आवश्यक अछि । एहि लेल
गायक लोकनि के सेहो स्वंम ध्यान देबाक जरूरी अछि ।
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