काल्हि की परसू भाई सुनील मल्लिक जी अपन व्यक्तिगत बयान द’ क’ दुनू देशक
बीचक मैथिली रंगकर्म के नीक जेना ओझरा देलखिन्ह । आ सुनील मल्लिक भाइयक टिप्पणी के
प्रवीण जी बियैन स’ हौंक देलथिन । बुझु जे सम्मुच्चा मैथिली रंगकर्म धधकि उठल ।
काल्हिए राति हम मिनापक एकटा मित्र स’ सम्पर्क कयल । अप्रत्याशित तथ्य
आगू आयल । हुनक कहब छलन्हि – “भाई अहाँ लोकनि नीक जेना बातक जैड़ि नै पकड़लियै ।
सुनील भाईयक टिप्पणी मैलोरंग लेल नै छलन्हि । ई मिनापक ओहि सदस्यक लेल छलन्हि जे
लोकनि मलंगिया सरक विचार के अनुयायी छथि । मिनापक पिछला चुनाव मे सुनील भाई के
पावर कम भ’ गेलन्हि आ ओ लोकनि बेसी मजबूती स’ अयलाह जे लोकनि मलंगिया सर के विचारक
छथि ।
सुनील भाइक तामस तहिये स’ मिनाप आ मलंगिया सर पर छन्हि । मलंगिया सर
मैलोरंगक अध्यक्ष छथि तेँ एहन प्रहार भेल अछि । मैलोरंगक एहि महोत्सवक सूचना
फेसबुक स’ हमरा लोकनि के बहुत पहिने स’ छल । इहो बूझल छल जे एहि बेर मैलोरंग अपने
नाटक करत आ आगू स’ दोसर टीम के सेहो बजाओत । एहि ठाम स’ दू तीन गोटे मधुबनी जयबाक
लेल तैयारो छलाह मुदा भूकम्पक कारणे नहि जा सकलाह । सुनील भाईजी त’ पिछला महीना
भरि स’ जनकपुर स’ बाहर उड़ीसा, कलकत्ता आरो कतेकठाम छथि आ भूकम्पक समय काठमाण्डु मे
सेहो फँसल छलथि । जनकपुरक हाल या मिनापक कोनो जानकारी हुनका कहाँ रहैत छलन्हि । मैलोरंग
चिठ्ठी द’ क’ किएक नै बजौलक जखन कि मलंगिया सर ई आयोजन करबा रहल छथिन्ह से ओ किछु
गोटे के ई गप्प कहि मिनाप दिस स’ विरोध करबाक लेल जिद्द केलथिन मुदा कियो तैयार नै
भेल । एकटा वरीष्ठ सदस्यक कहब छलन्हि जे – मैलोरंग अप्पन महोत्सव क’ रहल अछि जाहि
मे ओ अपने नाटक मात्रे करत आ से ज’ नहियो करितै आ मिनाप के नै बजबिते से मैलोरंगक
विचार छैक, एहि पर हमरा लोकनि के कोनो प्रतिक्रिया नै देबाक चाही । दोसर नेपालो मे
जे आयोजन होइत छैक तकर स्वतंत्रता हमरा सब लग रहैत अछि कहियो कियो एहि तरहक
प्रतिक्रिया नै केलाह अछि । मुदा सुनील भाई तमशा गेलथि आ एहन व्यक्तिगत बयान द’
देलाह । भाई अपना सब त’ एक्के छी । नाटक करबाक अछि करबे करब । अहूँ सब एहि राजनिति
मे नै पड़ू से आग्रह । आदि आदि...”
उपर्युक्त संवादक परिप्रेक्ष मे आदरणीय सुनील भाई के प्रवीण जी संग की
गप्प भेलन्हि आ प्रवीण जी ओहि गप्प के कोना लेलाह से भगवान जानथि । मुदा ई सत्य
अछि जे सुनील भाई आ प्रवीण जी दुनू गोटे मिलि क’ मैथिली रंगकर्म के आहत केलथि अछि
। हिनका लोकनि के व्यक्तिगत लाभ स’ उप्पर उठबाक चाहियन्हि ।
हमरो मोन अछि जे भाई सुनील मल्लिक जी पिछला महीना उड़ीसाक पार्क मे तरह
तरह स’ फोटो खिंचा खिंचा क’ अपडेट करैत छलाह, हुनका दोसरक अपडेट दिस कोना ध्यान
जेतन्हि से हम बुझि सकैत छी । जाहि दिन भूकम्प आयल छल हम (प्रकाश) सुनील भैयाक छोट
भाई रमेश मल्लिक जे कि दिल्ली मे रहैत छथि – हुनका हाल चाल लेबाक लेल फोन केने
रहियन्हि त’ रमेश जी जानकारी देलथि जे एखने सुनील भाईजी स’ गप्प भेल अछि ओ लोकनि
ठीक छथि मुदा रातिक 11 बजे बाहर पार्क मे परिवार संग बैसल छथि । मैलोरंगक सब
गतिविधि फेसबुक पर ततेक अपडेट रहैत अछि जे कियो साकांक्ष व्यक्ति शायदे कहि सकैत
छथि जे मैलोरंगक एहि आयोजनक सूचना हमरा नै छल ।
| good bye Madhubani... |
निष्कर्ष ई कहि दी जे मैलोरंग आ मिनापक संस्थागत संबंध ओहिना रहत जेना
छल । मैलोरंगक सभ रंगकर्मी मिनापक स्थापित सदस्य लोकनि आदरणीय सुनील मिश्र, भाई
मदन ठाकुर, भाई रमेश रंजन, भाई विष्णु जी, परमेश भाई, भाई रामनारायण जी, सुश्री
प्रियंका, भाई रवीन्द्र जी, भाई अनिल झा, भाई प्रकाश प्रेमी आदि सबहक ओहिना इज्जत
दैत रहतनि जेना इहो लोकनि मैलोरंगक रंगकर्मी के अप्पन छोट भाई मानैत रहलाह अछि ।
हाँ ! किछु गोटे अप्पन व्यक्तिगत स्वार्थक हेतु जे कोनो प्रकारक राजनीति क’ एहि
दुनू देशक मैथिली रंगकर्मक बीच फाँट बना रहल छथि हुनक इज्जत दुनू दिसक रंगकर्मीक
नजरि मे कमि जायत से निश्चित ।
मैलोरंगक रंगकर्मी मात्र मैलोरंगक रंगकर्मी नहि छथि ई लोकनि सम्पूर्ण
मिथिलाक रंगकर्मी छथि । हिनका लोकनिक अद्म्य साहस लेल पीठ थपथपाओल जाय । ई लोकनि
जे काज केलथि अछि से एखन तक मैथिलीक कोनो संस्था नहि क’ सकल अछि । मैथिलीए किएक
हिन्दीक सेहो बहुत कम संगठन केलक अछि । लगातार पाँचटा नाटक केनाई कतेक कठिन काज
होइत छकै से कोनो रंगकर्मिएटा बुझि सकैत छथि । एकटा नाटक के सम्हारब त’ कठिन होइत
अछि आ ई लोकनि पाँचो नाटक सम्हारलथि अछि । कतेको संगठन के अपना शहर मे आयोजन करबा
मे सालो साल लागि जाइत अछि मुदा मैलोरंगक ई रंग टोली अप्पन शहर छोड़ि 12 सौ किलो
मीटर दूर जा क’ अप्पन स्टेज बना क’ सबटा विषम परिस्थिकि के झेलैत अप्पन पाँचो
नाट्य प्रस्तुति द’ क’ वापस भेलाह अछि । एहना स्थिति मे जँ कोनो दोसर चर्च होयत त’
कोनो रंगकर्मी के तामश उठबे करतन्हि । गप्प एहि पर होयबाक चाही । एहि पर नहि जे
किनका हकार भेटलन्हि आ किनका नहि भेटलन्हि । बिना हकारे सहरसा स’, दरभंगा स’, पटना
स’ भरल भरल गाड़ी ल’ क’ एतबे नहि दिल्ली स’ जे लोकनि गाम आयल छलाह (संजय नागदह,
मनीष कुमार झा बौआभाई आदि) आदरणीय प्रेक्षक लोकन्हि अयलाह अछि । किनको व्यक्तिगत
हकार नहि छलन्हि । ई हुनका लोकनिक रंगप्रेम छलन्हि जे अयलाह । एहने रंगप्रेम सबमे
होयबाक चाही । आब एहि विचार के जे लोकन्हि जेना लौथ’ मैलोरंग अप्पन काज करबे करत आ
ओहिना करत जेना एकर रंगकर्मी लोकनि चाहताह । हम अप्पन रंगकर्मीक ऋणि छी । अस्तु
।