बुधवार, 29 मई 2013

अंकल वान्या मे देखाइत अछि गामक उचितलाल...


वान्या के दृश्य...

रंगमंचके दुनियामे अंतोन चेख़व के शयदे लोक नै जनैत होयताह । चेख़व रूसमे जन्म लेनिहार विश्व प्रसिद्ध नाटककर छथि । हिनक जन्म 1860 ईमे 29 जनवरी क भेल छलन्हि । ई वैह समय छल जकर आसपास मैथिली भाषाक प्रथम आधुनिक नाटक [सुन्दर संयोग] लिखनिहार जीवन झा मिथिलामे अवतरित भेलाह । चेख़व के आधुनिक कहानी के विशेषज्ञ सेहो कहल जाइत छनि । हिनक रचनामे सृजित पात्रक आंतरिक मन: स्थिति के सुक्ष्मता स उजागर करबामे महारथ हाशिल छलन्हि । जखन कि ओहि समयमे हमर रचनाकार अपन समाजिके स्थितिक अध्ययन करबामे लागल छलाह । एखनो तक बहुत कम एहन रचना हमरा सबहक सोझा अछि जाहिमे व्यक्तिक अंतरद्वन्द के केन्द्रित नाट्यालेख लिखल गेल हो । चेख़व रूसी जीवनक गम्भीरता स वर्णन अपन रचनामे केलाह अछि । यैह कारण थिक जे आइयो चेखव के यथार्थवादीक प्रतिनिधिक रूप मे रूसी शिक्षा केन्द्र स्थापित केने अछि ।
 
वान्या

तात्कालीन रूसी समाजमे प्रकृतिक दुखद स्थितिक आगामी परिणति के दूरगामी दृष्टि स देखैत चेख़व एहि अंकल वान्या नामक नाट्य रचना के सृजित केलाह अछि । चेख़व कहैत छथि : अपना दिस ताकू, कतेक भारी आ उदास अछि अहाँक जीवन । उपर्युक्त कथन अक्षरस: सत्य अछि, जँ जीवनमे अपन अगिला क्षणक विवेक जागि जाई त हम सब कतेक नीक जीवन गढ़ि सकैत छी । अपना लेल अपन अगिला पीढीक लेल । चेख़व अपन थोड़ नाट्य रचना क जे कोनो नाट्य परम्परा चलि आबि रहल छल सब के मटियामेट क देलाह । हिनक चारिटा प्रमुख नाट्य रचना अछि  - द सीगल, अंकल वान्या, द थ्री सिस्टर्स आ चारिम द चेरी ऑर्चर्ड । ई सब नाटक विश्वक नाट्य लेखन शैली, नाटक संयोजन, ओहि मे अभिनय आ प्रदर्शन शैली सबमे प्रथम परिवर्तनक सूत्रपात्र अछि ।  

 

एखन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के द्वितीय वर्षक छात्र द्वारा त्रिपुरारि शर्माक निर्देशनमे अंतोन चेख़व लिखित नाटक वान्याक नाट्य प्रस्तुति चलि रहल अछि । काल्हि हमहूँ देखलहुँ । त्रिपुरारि शर्मा आजुक समयमे स्थापित नाट्य निर्देशक छथि । महिला नाट्य निर्देशकमे हिनक नाम सर्वोपरी छनि । कतेको सम्मान आ पुरस्कारक संग काल्हिये हिनका संगीत नाटक अकादेमी सम्मान स सेहो सम्मानित कयल गेलन्हि अछि । वर्तमान समय मे त्रिपुरारि जी राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय मे अभिनय विषय के प्रोफेसर संगहि कार्यकारी निदेशक सेहो छथि । 

अंतोन चेख़व लिखित नाटक अंकल वान्या ओहि आदमीक कथा अछि जे समयक संग बहुत पाछू छुटि गेल अछि । एहन व्यक्ति दोसराक लेल निस्सन नींव गढैत अछि आ स्वयं बहुत हल्लुक बनल रहैत अछि । एहन व्यक्ति द्वारा कयल गेल कोनो महत्वपूर्ण काज के दोसर व्यक्ति कोनो काज नै मानैत छथि । उल्टे एकरा ऊपर अपना अपना ढंग स अपन विचार थोपैत रहैत अछि । कि ! एहने स्थिति मिथिलाक कृषक समुदायक नहि अछि ? हमरा गाममे हमर खेत खरिहान के नीक जेना रखनिहार व्यक्तिक एहने हाल नै अछि ? एहि मन: स्थिति के सृजित करैमे हमर समाज बहुत पाछाँ अछि । किछु एक दू रचना छोड़ि दी त हमर सृजक समाज चुप छथि । जे लोकनि लिखलाह अछि हुनका सेहो अपन समाज स बुझू बड़िये देल गेल छन्हि । अस्तु ।


नाटकमे एकटा प्रोफेसर छथि हिनक पहिल पत्नी स एकटा बेटी छन्हि । अपन बेटी के छोड़ी शहरमे नबकी कनिया संग रहैत छथि । नवकी कनिया हिनक विद्वता आ धन स आकर्षित भ एहन वृद्धा अवस्थामे हेबाक बादो विवाह क लेलन्हि । हिनक उम्रक प्रो. साहेबक बेटी छन्हि । शहर स ई लोकन्हि अपन गाम अयलाह अछि । नवकी कनियाक यौवन के देखि पड़ोसक एकटा डॉक्टर प्रो. साहेबक इलाज करबाक लेल बेर बेर हिनका घर आब लगैत छन्हि । नवकी कनियाक अंत:मन मे सेहो विद्वता आ धन स आकर्षित भ कयल गेल विवाहक फैसला आ अपन एहि यौवनक बीच द्वन्द चलैत रहैत छन्हि । प्रो. साहेबक बेटी सेहो डॉक्टर  दिस आकर्षित रहैत छथि ।

 
डॉक्टर दिस एहि आकर्षणक प्रमुख कारण अछि । ओ ई जे डॉक्टर आगामी सोचक पैरवी करैत रहैत अछि । जीवन के हरदम सुन्दर बनेबाक गप्प करैत अछि । अपन आगामी पीढ़ीक लेल सचेत रहैत अछि । अपन अस्तित्व लेल स्थान बनबैत रहैत अछि,  आदि आदि । एहि सब अंतरद्वन्दक बीच अबैत छथि मामा वान्या । वान्या के मनमे सेहो अपन जीवन लेल प्रेम प्रस्फुटित होइत अछि मुदा जे काज ओ क रहल अछि एहि काज के कियो काज मानिते नहि अछि । वान्या स प्रो. के बेटी बहुत घुलल मिलल अछि । एहि बेटीक कष्ट देखि वान्या एक दिन विद्रोह पर उतरि जाइत अछि, जहिया प्रो. अपन एहि खेत खरिहान के बेच चाहैत अछि । नबकी कनियाक अंतर्द्वन्दमे सेहो यौवनक विजय होइत अछि । बेटीक एकभगहा प्रेम पछड़ि जाइत अछि । सब गोटे एक बेर फेर अपन अपन जीवन जिबाक लेल एहि ठाम स निकलि जाइत अछि । रहि जाइत अछि अंकल वान्या, असहाय बेटी आ ओकर नानी ।


नाटकमे अभिनय पक्ष सेहो नीक जेना देखार भ सामने आओल । बेटी मारियाक भूमिका मे सोनाली बहुत नीक जेना अपन अंतर्द्वन्द के बाहर करबामे सफल चलीह । वान्या बनल छात्र विवेक के आरो अपन अभिनय क्षमता पर काज करक आवश्यकता छन्हि । एकटा बात आरो महत्वपूर्ण अछि ई जे एहि प्रस्तुति स दरभंगाक श्याम कुमार साहनी जे कि द्वितीय वर्षक छात्र छथि सेहो जूड़ल छल । श्याम द्वारा कयल गेल ध्वनि आ संगीत कथ्य के संग संग प्रवाहित होइत छल । श्याम बहुत मेहन केलक अछि से मोन नीक बात ।

आशा अछि एहन एहन नाट्य प्रस्तुति आ नाट्यालेख हमरो भाषाक रचनाकार लिखथि । 

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शुक्रवार, 24 मई 2013

मैथिली रंगमंचपर सबल, समृद्ध एवं समर्पित महिलाक उपस्थिति



नेहा वर्मा
स्व. रंजी झा आ सुश्री प्रियंका
मैथिली रंगमंचक वर्तमान आ आधुनिक स्थितिक पड़ताल तथाकथित मैथिलीक बहुविधा समालोचक लोकनि द्वारा प्राय: कयल जा रहल अछि । एहि ठाम वर्तमानआधुनिक शब्द पर सेहो विचारक आवश्यकता छैक । कारण, जे लोकनि आई स बीस साल पहिने वर्तमान वा आधुनिक स्थितिक पड़ताल केने छलाह आइयो हुनक आलेख अपन नव रूपमे मात्र किछु पाँतिक वृद्धिक संग छपैत अछि । तेँ हमरा जनति अपन वर्तमान वा आधुनिकमे समय लिखब आवश्यक ।

 
मैथिली रंगमंचक चर्चा होइते पत्रिका / पुस्तकमे लिखल आलेख मैथिली रंगमंचक समस्या मात्रसँ भरल रहैत अछि । बहुविधा समालोचक लोकनिक दृष्टिमे कतेको समस्यामे वाकि मनलग्गू विषयमे प्रिय छनि मैथिली रंगमंच पर महिलाक स्थिति / अनुपस्थिति । आजुक संदर्भमे चिंतित आ एकरा विकराल रूप कहनिहार सज्जनके किछु वर्तमान डाटा उपलब्ध करबाक प्रयास करैत छी । कारण, बहुविधा समालोचक लोकनिके कतेको पत्रिका / पुस्तक / वार्ता / संगोष्ठी आदिमे मैथिली रंगमंचक पड़ताल करक रहैत छनि । सूचना संग्रहित केनाई कनी कठिनाह होइत अछि । हमर बहुविधा समालोचक लोकनि एहन कठिनाह काज किएक करताह ? हुनका लोकनि के कोनो प्रकारक कष्ठ हेतनि से हमरा लोकनि के कोना नीक लागत । तेँ हम स्वयं ई सूचना हुनका लोकनि के प्रेषित क दैत छियनि ।   


एहि बीच मैथिली रंगमंचपर महिलाक स्थिति पर कतेको आलेख पढ़लहुँ अछि । अधिकांश आलेख लिखनिहार लोकनिक अपन शहर वाकि इर्द गिर्द सिमटि क रहि जाइत छनि । एहने समयमे श्रीमती शैल झाक लिखल सांध्य गोष्ठी, दिसम्बर 2012 के अंकमे आधुनिक मैथिली रंगमंचमे नारी अभिनेत्री आलेख सेहो पढ़बाक मौका लागल अछि । नीक आलेख छनि एहिमे कोनो शंका नहि । आलेख समाप्तिक बाद लागल जे एहि आलेखक शीर्षकमे आधुनिक शब्दक स्थान पर कोलकाता लिखब उचित छल । आलेखक शीर्षक होयबाक चाही कोलकाताक मैथिली रंगमंचमे नारी अभिनेत्री । आलेखमे आधुनिक शब्द जोड़ि आलेखक विस्तारक सीमाक अंदाजा लेखिका आ सम्पादक दुनू गोटे के होयबाक चाहियनि छल ।  ओना आलेखमे कोलकाताक महिला रंगकर्मीक सूचना नीक जेना समाहित भेल अछि ताहि लेल श्रीमती शैल झा के हम सब आभारी छियनि । मैथिली रंगमंच पर महिला अभिनेत्रीक अभावक समस्या हिनको आलेखक मुख्य केन्द्र अछि ।

किछु गोटेके कहब छनि जे  - मैथिली रंगमंचमे महिला कलाकारक अभावक हेतु आयोजक दोषी छथि । कारण, आयोजक जखन अपन परिवारक महिलाकेँ रंगमंचपर नै अनथिन त शून्यता भेनाइ स्वभाविक ।  एहन एहन आरोप प्रत्यारोप आ प्रश्न उत्तर निराधार अछि । हमर अनुभव अछि जे आई तक आयोजके लोकनि अपन व्यक्तिगत प्रयास स परिवार वा कि अपन मित्र / सम्बन्धित के मंचपर अनैत रहलाह अछि । जकर परिणाम अछि जे मिथिलाक प्रस्तुतिपरक कला विधामे शक्ति संचय प्रवाहित नै भ सकल जकर अपेक्षा छलैक । एहन प्रश्न उठयबा स पहिने ई ज्ञान त होयबाके चाही जे कलामे रूचि व्यक्तिगत होइत अछि आ ओहि रुचिके मात्र कोनो संस्था वा कि संस्थान आरो नीक जेना निखारि मात्र सकैत अछि । कोनो पेंटिंग करनिहार के जबरदस्ती अभिनेता नै बनाओल जा सकैत अछि । कोनो अभिनेता के जबरदस्ती क्रिकेटर नै बनाओल जा सकैत अछि, कोनो अभियंता के जबरदस्ती डॉक्टर नै बनाओल जा सकैत अछि । हाँ, एहि लेल बस कियो ककरो प्रेरित मात्र क सकैत अछि ।  विभिन्न विश्वविद्यालयमे मैथिली साहित्य स एम. ए. क रहल कुल विद्यार्थीक संख्या स बेसी छथि मैथिली रंगमंच पर महिला । चिंतनीय स्थित कोन ???  मैथिली साहित्यमे विद्यार्थीक संख्या कम भ रहल अछि । एहि लेल विश्वविद्यालयमे मैथिली भाषा पढौनिहार व्याख्याता लोकनि के अपना घर स धिया पुता के मैथिली पढ़बाक लेल प्रेरित करक चाहियनि, मुदा होइत अछि एकर ठीक उल्टा । हिनका लोकनि पर कियो कोनो तरहक आरोप प्रत्यारोप किएक नै लगौलाह अछि ? मैथिली रंगमंच पर चट्ट स आरोप लगा दैत छथिन निराधार आ अनर्गल गप्प । हिनका लोकनिक आग्रह ई, जे जहिना राजनीतिमे परिवारवाद चलि रहल छैक ओहिना रंगमंचमे सेहो चलबाक चाही । की ई उचित छै ? 
 
 

एखने 25 30 दिसम्बर, 2012 तक दिल्लीमे मलंगिया नाट्य महोत्सव के आयोजन भेल छल जाहिमे कुल पाँचटा संस्था अपन नाट्य प्रस्तुत केलन्हि । ई जानि खुशी होयत जे एहि पाँचो संस्थामे कुल 27 टा महिला रंगकर्मी छलीह । यानि प्रति टीम 5 6 महिला रंगकर्मी । एहन उपस्थिति के की चिंतनीय मानल जाय ?

 
 
वर्तमान समय मे (2005 2012) मैथिली रंगमंच पर महिलाक स्थिति समृद्ध अछि । एहि लेल कोनो चिंता करबाक प्रयोजन नै छैक । चलू आई एहि स्मृद्ध स्थितिक समीक्षा करी । सहरसामे भ रहल रंगमंचमे लगातार रूपम श्री, खुशबू श्री, खुशबू कुमारी, शिवानी, स्वेता कुमारी, प्रिया, पूजा कुमारी, दीपा, ज्योति, बन्दना डे, मधु, काजल, नंदनी, नेहा कुमारी आदि सक्रिय छथि । 

कोलकाता रंगमंचक त ई हाल अछि जे एक संग तीन पीढ़ीक महिला अपन सक्रिय उपस्थिति द रहल छथि जाहिमे प्रमुख छथि बंदना झा, किरण झा, बेला झा, कुमारी अंजना इस्सर, अपराजिता, शैल झा, कुमारी सपना, कुमारी साधना आदि यानी लगभग बीस महिला रंककर्मी सक्रिय छथि ।



दिल्ली मैथिली रंगमंच स  जूड़ल महिला रंगकर्मीक संख्या एखुनका समयमे बाकी सब जगह स बेसी अछि । ई संख्या लगभग 25 30 अछि । जाहि मे किछु नाम निम्न : पूजा श्री, कल्पना मिश्रा, कल्पना झा, सुधा झा, ज्योति झा, सायरा अली, ज्योति झा, अंजलि झा, नेहा वर्मा, नीरा झा, रूपम मिश्र, प्रियंका दास, रूपा साहा, सोनिया झा, स्वपना मिश्रा, पलक कुमारी, बबीता प्रतिहस्त, पुष्पा झा, ममता झा, अपर्णा झा, रश्मि रानी, प्रेमलता, खुशबू आदि ।

पटनाक मे भंगिमा संग संग चेतना समीति आ आरो एक दू टा संगठन काज क रहल अछि । पटना रंगमंच स जूड़ल अभिनेत्रीक संख्या मे प्रमुख छथि:  प्रेमलता मिश्र प्रेम,  प्रिती झा,  स्वाति सिंह, रितु कर्ण, कुमकुम जी, प्रियंका, बंदना, अपराजिता, शारदा, वैदेही आदि आदि । एहि ठाम वयस्क स बेसी बाल महिला कलाकार उपस्थित छथि ।

 

मानलहुँ जे दरभंगा मे सक्रिय रंगमंच नै भ रहल अछि मुदा मैथिली महिला कलाकारक उपस्थिति एहू ठाम कम नै अछि कतेको नाम एहन अछि जिनका रंकर्म लेल संगठन नै भेट रहल छनि : स्वर्णिम किरण झा, बंदना मिश्रा, पूनम झा आदि आदि ।    

 

उपर्युक्त स्थितिक संदर्भमे आजुक समयमे लगभग बारह पन्द्रह रंगसंस्थामे लगभग सय (100) महिला रंगकर्मी मैथिली रंगमंचपर उपस्थित छथि । एहन मजबूत उपस्थितिक बादो जँ कियो चिंतित छथि त हुनका लोकनि स आग्रह जे अपन लग पासमे भ रहल रंगमंच स जूड़ि विशेष जानकारी एकत्रित करथु ।
 

रविवार, 12 मई 2013

युवा प्रतिबध्यताक सुखद परिणति : छुटत नहि प्रेमक रंग


काल्हि दिनांक 12 मई, 2013 क किछु मित्रक संग देखलहुँ नव निर्मित मैथिली फिल्म छूटत नहि प्रेमक रंग. पिछला लगभग छ: महीना स एहि फिल्मक सब प्रक्रियाक जानकारी कोनो ने कोनो माध्यम स भेट रहल छल । ई संयोग जे फिल्मक निर्माता ग्रुप हमरा स नीक जेना जूड़ल युवा लोकनि छथि मुदा एहि पूरा प्रक्रियामे एहि सब युवाक निर्णय अप्पन छलनि । हुनक निर्णयक जानाकारी मात्र हमरा प्राप्त होइत रहल । ई जानि अत्यंत आश्चर्यचकित होइत रही - कि फिल्म निर्माण प्रक्रिया एत्तेक सहज आ सरल अछि ? आरो कतेको प्रश्न मोन मे हिलकोर मारैत छल । फिल्म अपन प्रथम प्रक्रिया स अंतिम प्रक्रिया धरि पूर्ण केलक । एकर प्रतिफलक रूप देखबालेल नीलम सिनेमा, फरीदाबाद, हरियाणा गेलहुँ ।
 
फिल्म पर बादमे पहिने त एहि युवा टीम केँ हार्दिक बधाई जे एत्तेक युवावस्थामे एत्तेक पैघ डेग उठौलाह आ फिल्म के सफलता पूर्वक हॉल तक बिना कोनो हो-हल्ला के पहुँचेलाह । सत्ते एहि युवा टीम के निर्देशक श्री संतोष कुमार, मुख्य निर्माता श्री एस. के. झा, सह निर्माता श्री राजीव कुमार मिश्रा आ मुख्य अभिनेता श्री राधाकांत जी बधाई के पात्र छथि । एही चारू युवाक प्रयास स बाँकी संगी साथीक संगोर होइत गेल आ फिल्म एहन विशाल काज अपन निर्धारित समय मे सम्पन्न भेल । एहि चारू युवा मे स जँ कियो पहिल नं. पर छथि तश्री राजीव कुमार मिश्रा छथि । कारण फिल्मक पहिल दिन स प्रेक्षागृह तक पहुँचेबामे हिनकर अथक परिश्रम आ हिनक सदाशयताक भूमिका अविस्मर्णीय अछि । एक बेर फेर राजीव बाबू अहाँके बधाई ।



फिल्मक तकनीकीक बेसी ज्ञान हमरा नै अछि मुदा जे किछु ज्ञान प्रदर्शन कलाक अछि ओहि हिसाबे फिल्म छूटत नहि प्रेमक रंग सिर्फ मैथिली प्रेमक कारण देखल जा सकैत अछि । फिल्ममे किछु आर काज करबाक आवश्यकता छल । कोनो फिल्मक लेल ओकर कथानक सबस महत्वपूर्ण होइत छैक । जँ कथानक मे दम्म होइत छैअक त ओ जनमानस के आकर्षित करैत अछि । एहि फिल्म के बनाओल त गेल अछि व्यावसायिक सोच स मुदा कथानक अछि कोनो कलात्मक फिल्मक । एक्के संग कतेको मुद्दा के उठाओल गेल अछि । परिणाम भेल जे अंतमे बहुतो मुद्दा जे कि शुरु मे महत्वपूर्ण लगैत छल हेरा जेना गेल । कथा लिखब, कविता लिखब आ ओही कथा वा कविताके फिल्मक वा रंगमंचक रूप देब बहुत फराक अछि । एहि बात स एखनो हमरा आश्चर्य लगैत अछि जे सब काज स्वयं करबाक मोह के हमर रचनाकार लोकनि किएक नै छोड़ि पबैत छथि ?

किछु महीना पहिने फेसबुक पर हम लिखने रही जे हमर फिल्म निर्देशक लोकनि अपन अभिनेताक अभिनय क्षमताक नीक उपयोग नै क पबैत छथि से अहू फिल्ममे देखाइत अछि । एक स एक अभिनेता फिल्ममे उपस्थित छथि । यथा अनिल मिश्रा, नीलेश दीपक, परमेश झा, गोविन्द पाठक, रामनारायण ठाकुर, रवीन्द्र झा, मदन ठाकुर, सोनिया झा आदि । मुदा हिनका सबहक असीम अभिनयक प्रतिभाक सदुपयोग होयबाक चाही ।
 
एकटा आर बात लीखब । हमर प्रिय अभिनेता छथि राधाकांत   छूटत नै प्रेमक रंग मे मुख्य भूमिका राधाकांत केलाह अछि । मुदा, फिल्ममे हिनक उपस्थिति पर कनी आर सम्पादनक आवश्यकता छल । फिल्ममे लगभग अस्सी प्रतिशत उपस्थिति राधाकांत जीक छनि जे अनर्गल बुझना जाइछ । फिल्म सम्पादन करबाक काल वा कि कोनो प्रस्तुतिपरक विधामे अपन हृदय के बहुत कठोर करबाक आवश्यकता होइत छैक । सृजनक कोनो विधामे व्यक्तिगत संबंधक कोनो मायने नै होइत छैक से हमरा सबके बूझक चाही । फल्लां हमर मित्र छथि / फल्लां हमर भतीजा छथि / फल्लां हमर चमचागिरी कैरत छथि / फल्लां हमर गुरुदेवक संबंधित छथि / फल्लां हमर गप्प नै मानैत छथि / फल्लां दोसर ग्रुपक छथि / फल्लां दोसरक समर्थक छथि आदि आदि मानसिक सोच स ऊपर उठक आवश्यकता छैक ।  फिल्मक भाषा, संवाद, डबिंग स्टाइल, प्रकाश योजना, ध्वनि संयोजन आदि आदि आरो बहुत रास गप्प अछि से बादमे  । फिल्मक संगीत पक्ष बहुत नीक अछि । ई दोसर गप्प जे गीत फिल्मक कथानकमे फिट नै बैसैत छैक मुदा बहुत कर्णप्रिय अछि ।
 
एहि युवा टीमके उत्साह आ एहि विधामे पदार्पण प्रशंसनीय अछि । आजुक युवा स ई अपेक्षा बहुत कम भ भेल जा रहल छनि जे एहन सुसभ्य आ मैथिली संस्कृति के मोनमे ल फिल्म एहन विधामे उतरहाह । दिल्ली एहन शहरमे जत वैश्वीकरणक समागम अछि, एतुक्का मॉल संस्कृति स रूबरू भेलाक बादो ई युवा लोकनि अपन मैथिली संस्कृति स ओत प्रोत फिल्म निर्माण केलन्हि अछि से रेखांकित करब आवश्यक छैक । अहाँ सब लोकनि अपन सम्पूर्ण परिवारक संग एहि फिल्मक आनन्द ल सकैत छी । अहाँ अपन नव पीढ़ी आ अपन अग्रज पीढ़ीक संग बैसि कोनो मैथिली फिल्म देखी एहन बहुत कम्मे फिल्म अछि । ओहि श्रेणी मे  छूटत नहि प्रेमक रंग के सबस पहिने राखल जा सकैत अछि । 

  

शुक्रवार, 10 मई 2013

सुन्दर संयोग: प्रक्रिया, प्रस्तुति एवं परिणति




मैलोरंग की प्रस्तुति सुन्दर संयोग






 
बीसवीं शताब्दी के शुरुआत में जीवन झा ने मैथिलीनाट्य साहित्य के परम्परा में अभूतपूर्व क्रांति की शुरुआत की । कीर्तनिया नाट्य परम्परा के नींव पर जीवन झा ने प्रथम आधुनिक नाटक सुन्दर संयोग की रचना किया । जीवन झा (1848 -1912) को कविवर की उपाधि से सम्मानित किया गया था । अपनी रचनाओं में जीवन झाने मिथिला के परम्परा को साथ लेते हुए आधुनिक रूप में सृजित किया है । इनकी रचनाओं में तात्कालीन सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक सामाजिक स्थिति का विश्लेषण मिलता है । उस समय मिथिला में वैवाहिक स्थिति एक विकराल समस्या के रूप में फैल चुका था । जीवन झा ने अपनी नाट्य रचना के केन्द्र में इसी वैवाहिक समस्या को रखा । मिथिला समाज में तिलक दहेज प्रथा, जाति पाँजि के नाम पर कन्या पर हो रहे अत्याचार एवं अन्य सामाजिक कू-प्रथा पर प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप में अपनी आलोचनात्मक दृष्टिकोण से अपनी नाट्य रचना की । सामाजिक पृष्ठभूमि को आधार बनाकर मैथिली में नाट्य-लेखन का शुभारम्भ जीवन झा से ही होता है । कविवर जीवन झा ने तीन सम्पूर्ण नाटक; सुन्दर संयोग (1904),सामवती पुनर्जन्म,नर्मदा सागर सट्टक.  की रचाना किया । वस्तुतः इन नाटकों में मिथिला समाज में व्याप्त विश्वास एवं संस्कार की प्रतिविम्ब मिलता है । प्राय: सभी नाटकों में विवाह समस्या में व्याप्त वासना, प्रेम, मिलन तथा विरह वेदना को आपने कथ्य बनाया है । इन समस्याओं का समाजशास्त्रीय एवं भाषाशास्त्रीय अध्ययन आज भी आपेक्षित है । नाटक में मनोरंजन एवं जीवन की गम्भीर समस्याओं को समान अनुपात में प्रस्तुत किया गया है ।


प्रथम आधुनिक नाटक : सुन्दर संयोग 
मैलोरंग की प्रस्तुति सुन्दर संयोग का एक दृश्य


सुन्दर संयोग नाटक की रचना सन् 1904 ई. में कविवर जीवन झा द्वारा हुई । नाटक का कथ्य तात्कालीन मिथिला में व्याप्त विवाह समस्या को केन्द्र में रख कर रचा गया है । नाटक में मिथिला के पारम्परिक नाट्य परम्परा कीर्तनिया शैली का प्रभाव है । नाटक का मंचन इससे पहले कभी हुआ है या नहीं इसका कोई भी प्रमाण या संदर्भ उप्लब्ध नहीं है अत: यह आवश्यक है कि इस नाटक का मंचन मिथिला के पारम्परिक संदर्भों में किया जाय ।
 
 
सुन्दर संयोग नाटक मनोरंजन के साथ ही जीवन के गम्भीर समस्याओं के बीच सामाजिक द्वन्दों को उभारा है, जो की आज के संदर्भ में भी उतना ही प्रासंगिक है जितना अपने रचना काल के समय था । नाटक का मूल कथ्य मिथिला के परम्परागत कुलीनप्रथा को प्रदर्शित करता है । समाज में व्याप्त जाति-पाँजि, दहेज प्रथा, बहु-विवाह तथा पत्नी-परित्याग जैसे विकृतियों को समेटा गया है ।
 
लगभग एक घंटा तीस मिनट का यह संभावित नाटक मिथिला के पारम्परिक नाट्य शैली, नृत्य शैली एवं पारम्परिक संगीत से भरा पुरा है । लगभग एक सौ सात साल पहले लिखे गए इस नाटक की प्रस्तुति रोमांचक अनुभूति प्रदान करेगा ।
 प्रथम आधुनिक नाटक सुन्दर संयोग : प्रस्तुति प्रक्रिया
एक सौ सात साल पहले कविवर जीवन झा द्वारा रचित प्रथम आधुनिक नाटक सुन्दर संयोग के मंचन का शोध प्रमाण अभी तक व्याप्त नहीं हो सका है । पर अपने कत्थ एवं शिल्प के रूप में इस नाट्य कृत्ति को प्रथम आधुनिक मैथिली नाटक से सम्मानित किया जा चुका है । पर, आश्चर्य यही है कि विगत एक सौ सालों में इसका मंचन नहीं हो सका था । अत: अब यह आवश्यक हो गया था कि इस नाट्य कृत्ति का मंचन किया जाय तथा इसके शिल्प पर एक बार फिर शोध कार्य को आगे बढ़ाया जा सके । 
 
सुन्दर संयोग को मंचित करने के लिए इसके आलेख को आज के संदर्भ में एक बार फिर से पुर्णलेखन किया जाना अति आवश्यक होगा था ताकि प्रेक्षक इसके समकालीनता को अपने साथ आत्मसाथ कर सके ।
 
नाटक के आलेख में तात्कालीन भाषा का समुचित उपयोग किया गया है । अत: यह भी आवश्यक था कि आलेख में उपयोग किए गए उन शब्दों के समान अर्थ वाले वर्तमान शब्दों का अधिक से अधिक उपयोग हो ताकि अभिनेता के साथ प्रेक्षक भी आसानी से समझ सकें । 

 नाटक में प्रयुक्त नाट्य शैली के वर्तमान स्वरूप को रखना भी आवश्यक था । इसके लिए मिथिला के विभिन्न गाँवों में प्रस्तुत हो रहे नाट्य शैलियों के प्रस्तुति कर्ता के साथ रंगमंडल के अभिनेताओं को प्रशिक्षण देना अति आवश्यक था । इस प्रक्रिया से ही लोक शैली एवं आधुनिक नाटक का एक समिश्रण तैयार हो सका ।
 
 

मंगलवार, 7 मई 2013

डी. पी. एस. मे सुखद अनुभूतिक एक दिन

डी. पी. एस. बुलन्द शहर प्रवेश द्वार
दिल्ली पब्लिक स्कूल [डी.पी.एस.] सोसायटीक तत्त्वावधानमे वार्षिक अन्त: दिल्ली पब्लिक स्कूल हिन्दी साहित्य उत्सव 2013 के आयोजन पिछला 30 अपैल, 2013 दिल्ली पब्लिक स्कूल, बुलन्दशहर, उत्तर प्रदेशमे भेल छल । एहि प्रतियोगितामे देशक विभिन्न दिल्ली पब्लिक स्कूल अपन छात्र / छात्राके प्रतिभागीक रूपमे पठौने छलैक । आयोजानमे कतेको तरहक प्रतियोगिता राखल गेल छलैक जाहिमे एकटा प्रतियोगिता छल गीत अभिनीत प्रतियोगिता । गीत अभिनीतमे हिन्दी साहित्यक कोनो सशक्त नारी चरित्र / पात्रक प्रस्तुतिकरण करक छलैक । एहि गीत अभिनीत प्रतियोगिताक लेल निर्णायक मंडलमे हमहूँ आमंत्रित रही ।

निर्धारित तिथि 30 अप्रैल, 2013 क भोरक छ: बजे हम अपना घर स प्रस्थान कयल । ई संयोग अछि जे हमर ड्राइवर ग्रेटर नोएडाक परी चौकक भूल भुलैयामे रस्ता भुतला गेलाह आ गाड़ी उत्तर प्रदेशक ग्रामांचल होइत सिन्दराबादक रस्ते बुलन्दशहर पहुँचल । किछुए काल पहिने दिल्ली स नोएडा होइत ग्रेटर नोएडामे बनल आ बनि रहल गगनचुम्बी घर देख मोन कोनो अदृश्य डर स घेरायल छल । गाड़ी समतल सड़कपर सपाट दौड़ रहल छलैक । शरीर आराममे छल मुदा मोन उचाट । एकटा रस्ता भुतलेने किछुए मिनटक बाद गाड़ी सड़कक हुच्चीमे हिचकोला ल रहल छल । मुदा, अगल बगल पसरल खेतमे लागल आ कटल गहूँमक बोझ देखक मोन प्रफ्फुल्लित भ रहल छल । एखन मोन स्थिर छल शरीर उचाट । 
नियत समय दस बजे गणतव्य पर पहुँचलहुँ । स्वागतमे उत्सव समंवयक किरन पंत, प्रधानाचार्य डॉ. जगदीश चन्द्र पंत अपन अध्यापकगण संग ठाढ़ छलाह । कनिएकालमे डॉ. जगदीश चन्द्र पंत अपन सदाशयता आ खुशमिजाजी स आकर्षित क लेलन्हि । हुनक कार्यालयमे पहिने स उपस्थित गणमान्य एवं विभिन्न प्रतियोगिताक निर्णायक लोकनि स परिचयपात भेला उत्तर सब लोकनि अपन अपन प्रतियोगिताक स्थलपर गेलहुँ ।
गीत अभिनीत प्रतियोगिता विद्यालय द्वारा नव निर्मित कामायिनी प्रेक्षागृहमे राखल गेल छल । कामायिनी मे ई पहिल आयोजन छल तेँ प्रेक्षागृह खूब नीक जेना सजाओल गेल छलैक । कामायिनी के प्रमुख प्रवेश द्वार पर बनाओल चित्रक सुन्दरता आ भव्यता प्रेक्षागृहक उत्कृष्ठताक स्वयं वर्णन क रहल छल ।  आसमानी रंगक पिछला स्तर पर बनाओल गेल विभिन्न नृत्य मुद्रा सहजहि सुन्दर अनुभूति दैत छलैक । खूब पैघ प्रेक्षागृह, सुन्दर मंच, नीक प्रकाशयंत्र, उत्तम ध्वनि व्यवस्था आदि आदि । विभिन्न डी. पी. एस. स आयल छात्र, हुनक संग आयल शिक्षक, अभिभावक आ स्थानीय सुधिजन स भरल छल प्रेक्षागृह ।
गीत अभिनीत प्रतियोगिता मे कक्षा VI – VIII तक के विद्यार्थी भाग ल सकैत छलाह । एहिमे कविताक सामूहिक काव्य प्रस्तुति करबाक छल । जाहिमे तीन छात्रक समूह भाग ल सकैत छलाह । कविताक नाट्य प्रस्तुतिक लेल छ: मिनटक समय निर्धारित कयल गेल रहैक । समूहक एक प्रतिभागी द्वारा गीत वाकि कविताक प्रस्तुति तथा दू प्रतिभागी द्वारा ओहिपर अभिनय करबाक छल । एतेक नियमावलीक संग तीसटा विद्यालय भाग लेलक ।
अपन निर्धारित समय स शुरू भेल प्रतियोगिता । एकक बाद दोसर स्कूलक विद्यार्थी लोकनि बेरा बेरी मंच पर अबैत गेलाह । अद्भुत प्रतिभा । किछु विद्यार्थीक प्रतिभा देख क मुग्ध रही । छात्र लोकनि के मंचक एतेक संज्ञान हम लाइटमे छी कि नै, हमर आवाज प्रेक्षागृहमे नीक जेना पहुँचैत अछि कि नै, गायन संग अभिनय करनिहार मित्रक बीच तालमेल बैसि रहल अछि कि नै, संगीत अभिनय संग चलि रहल अछि कि नै, मेक-अप, वस्त्र विन्यास, मंच पर आनल गेल सब समानक अभिनेता द्वारा उपयोग भ रहल अछि कि नै ई कहि सकैत छी जे मात्र छ: मिनट आ तीन व्यक्ति मे सम्पूर्ण रंगस्वाद । किछु स्कूलक बच्चा ततेक मेहनत स मंचपर उपस्थित भेल छलाह जे देखि दंग भेल रही ।
एहि प्रतियोगिता के नारी पात्रपर केन्द्रित कयल गेल छल । रानी लक्ष्मी बाई, पन्ना धाई, यशोधरा, उर्मिला, मदर टेरेसा, इन्दिरा गांधी, कल्पना चावला, किरण वेदी सन नारी पात्र केन्द्रित प्रस्तुति प्रतियोगितामे आयल छल । मुदा बेसी स्कूल रानी लक्ष्मी बाई पर अपन प्रस्तुति तैयार केने छल । आईस लगभग अस्सी साल पहिने सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा लिखल गेल कविता झाँसी की रानी आम जनमे प्रचलित आ प्रसंसित अछि । एहि कवितामे जे ऊर्जा आ लयात्मकता छैक से रंगमंचक लेल अनुकूल अछि । जखन विद्यार्थी लोकनिक मुँह स निकलैत छल :
सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,
बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी
,
गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी
,
दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।
चमक उठी सन सत्तावन में
, वह तलवार पुरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।
 
जहिना कवितामे ओज अछि तहिना विद्यार्थीक ओज स पूरित वातावरण अदृश्य ऊर्जा प्रवाहित क रहल छल । आ जखने निम्न पाँति आबैत छल :

जाओ रानी याद रखेंगे ये कृतज्ञ भारतवासी,
यह तेरा बलिदान जगावेगा स्वतंत्रता अविनासी
,
होवे चुप इतिहास
, लगे सच्चाई को चाहे फाँसी,
हो मदमाती विजय
, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी।
तेरा स्मारक तू ही होगी
, तू खुद अमिट निशानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी ।।

कि देह सिहरि उठैत छल । यैह अछि रंगमंचक शक्ति । कोनो वातावरण उपस्थित करबाक शक्ति जेना रंगकर्म मे अछि दोसर कोनो आन विधामे नै छैक ।
अहिना नाटकक मूल तत्व द्वन्द आ दृश्यात्मकताक समावेश सेहो प्रचूर मात्रामे अछि । मात्र तीन गोटॆ मिलि क एहि कविताक ततेक रूप आ बिम्ब प्रस्तुति केलन्हि जे देखि सुभद्रा जीक लेखनी क्षमता आ एहि कविताक रंगोपयोगी सृजनताक भान सहजहि भ जाइत छैक । जँ लेखनी आ कथ्यमे दम छैक त आमजन ओकरा अपनेबे करत ई एहि बात स जाहिर होइत अछि ।


ई आयोजन एकटा दोसर अर्थमे सेहो हमरा लेल महत्वपूर्ण छल । अपन वाल्याकाल मे गोपाल दास नीरज जीक कविता पढैत रही । आई एहि आयोजनक समापन समारोहक मुख्य अतिथि नीरज जी छलाह । लगभग नब्बे वर्षक नीरज साहब अपन उम्रक एहि पड़ाव मे सेहो अपन रचना आ समाजक प्रति सचेत भ आयोजनमे उपस्थित भेलाह । जखन माइक पर ओ अपन रचना :
स्वप्न झरे फूल से,
मीत चुभे शूल से,
लुट गये सिंगार सभी बाग़ के बबूल से,
और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे
कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे!

सुनौलन्हि त प्रेक्षागृह मे उपस्थित सब दर्शक रोमांचित छलाह । अपन संभाषण के समापन नीरज साहब अपन्हि रचना स केलन्हि :

आदमी को आदमी बनाने के लिए , ज़िन्दगी में प्यार की कहानी चाहिए
और कहने के लिए कहानी प्यार की, स्याही नहीं, आँखों वाला पानी चाहिए ।


देश प्रेम स लवरेज़  दिल्ली पब्लिक स्कूल, बुन्दशहरक छात्र लोकनि द्वारा प्रस्तुति मिले सुर मेरा तुम्हारा, तो सुर बने हमारा समापन भेल ई आयोजन । डी.पी.एस. सोसाइटी के चेयरमैन श्री अशोक चन्द्र जी, प्रधानाचार्य श्री जगदीश चन्द्र पंत आदि स विदा लैत एकटा सुखद अनुभूतिक दिन मोनमे ल श्री ब्रजेन्द्र त्रिपाठी, श्री प्रयाग शुक्ल, श्री अमिताभ श्रीवास्तव संग हम दिल्लीक लेल प्रस्थान केलहुँ...

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