सोमवार, 18 मार्च 2013

रंगपूर्वी

कैटलॉग मे स' लेल गेल चित्र
रंगपूर्वी 13 नाम स मैथिली भोजपुरी अकादेमी, दिल्ली सात दिवसीय राष्ट्रीय कला प्रदर्शनीक आयोजन केलक अछि । आयोजन ललित कला अकादेमीक, कला प्रदर्शनी हाँल मे लागल अछि । इहो कहि दी जे ई स्थान रवीन्द्र भवन, कॉपरनिकस मार्ग, मण्डी हाउस, नई दिल्ली 01 पर स्थित अछि ।   एहै कला प्रदर्शनी मे कुल 45 गोट वरीष्ठ आ कनिष्ठ कला सृजक अपन कलाक प्रदर्शन लगेने छथि । पद्मश्री जगदम्बा देवीक कृति कहार संग शशिकला देवीक गाछ सेहो देखबाक लेल भेटत । स्वर्गीय यमुना देवीक कृत्ति (भरनी रूपमे), स्व. चानो देवीक चित्र (गोदना रूपमे), बौआ देवीक चित्र सेहो लगाओल गेल अछि ।  
प्रदर्शनीमे लागल चित्र [कैमरा स']

कलाक एहि राष्ट्रीय प्रदर्शनी मे युवा कलाकारक उत्साह देखि क भविष्यक आस प्रस्फुटित होइत अछि । युवा कलाकार मुरारीक कृत्ति देख क लगैत अछि जे ई युवा उम्र मे युवा जरूर छथि मुदा अपन कला सर्जना मे परिपक्व छथि । एहि युवाक उत्साह बढ़ेबाक लेल सचिन्द्रनाथ सन स्थापित कलाकार सेहो अपन कलाकृत्तिक संग आगू आयल छथि । युवा मालविका राज, ध्रुव कुमार, प्रेरणा झाक चित्र आकर्षित करैत अछि ।


युवा कलाकार मुरारीक कलाकृत्ति [कैमरा स']
 एहि कला प्रदर्शनी के देखि वरीष्ठ कला समीक्षक विनोद भारद्वाजक कहब छनि :
तथाकथित लोककला और समकालीन कला में सार्थक संवाद जरूरी है और रंगपूर्वी इस दिशा में एक सुन्दर कोशिश है । मिसाल के लिए मधुबनी कला को एक ओर बचाये बनाये रखने का महत्व है, दूसरी ओर इस प्रदेश की युवा अभिव्यक्ति को समकालीन मान लेने में भी कोई हर्ज नहीं है । -         विनोद भारद्वाज

 वरीष्ठ चित्रकार श्याम शर्मा एक मात्र काष्ठ छापा चित्रकार छथि । हिनकर कृत्ति सेहो लागल अछि । चित्रकार अनिल सिन्हा, मिलन दासबी. के. जैम, पांडेय राजीव नयन, राजेंन्द्र प्रसाद संग संगीता गुप्ता, वंडना श्रीवास्तव कला दीर्घा मे अपन सशक्त उपस्थित देने छथि । बिहारक मजबुत हस्ताक्षर नरेन्द्र पाल सिंह, मनोज बच्चन, रविन्द्र दास, विपिन शर्मा आदिक कला देखबा लेल राखल अछि ।

दिल्ली मे एहन तरहक आयोजन त होइते रहैत अछि मुदा सम्पूर्ण आयोजन में पूरब के रंग स सजनाई दोसर आयोजन स एकरा फराक करैत अछि ।

 कला समीक्षक रवीन्द्र त्रिपाठीक कहब छनि :
भारत एक विशाल देश बा और एकर में नाना परकार के कला रूझान बाटे । जवन जवन इलाके के कला के चरचा कम होइलक या ना होइलक, ओकरा मतलब इ ना बा कि उहाँ के कलाकार के या कला के महत्त्व कम ह गइल । हाँ, उनकर चर्चा कम होखेला जेकरा कारण कुछ लोगन के समझ बन जाला कि इ इलाका में बढ़ि कलाकार हइए नइखन । लेकिन का इ बात से इनकार किया जा सकेला कि मधुबनी कला के बिना जाज के भारतीय कला पर पूरा बात हो सकेला ? - रवीन्द्र त्रिपाठी.

मधुबनी चित्रकला मे युवा पीढ़ी खूब प्रयोग क रहल छथि । अपन परम्परा स आगू बढ़ि क नव नव प्रयोग क रहल छथि । आइ हिनका लोकनिक पेंटिंग मे समकालीन कथाक अनुगुंज देखना जाइत अछि । हमर युवा प्रतिभाक सम्मान आवश्यक अछि ।

-  प्रकाश झा