कविवर ज्योतिरीश्वर
कृत ‘धूर्त्तसमागम’प्रस्तुति प्रक्रिया आ
परिणति
:
‘धूर्त्तसमागम’क मूल
रचनाकार कविवर ज्योतिरीश्वर ठाकुर छथि । एहि कृति के कियो प्रहसन कहैत छथि, कियो
रूपक कहैत छथि, कियो संस्कृत भाषाक नाटक कहैत छथि, कियो किछु त’ कियो किछु । ‘धूर्त्तसमागम’क उपलब्ध पाठमे लगभग 80 प्रतिशत भाग मैथिली मे अछि, मात्र 20 प्रतिशत
भागमे संस्कृत अछि । एहि आधार पर एकरा मैथिली नाटक कहब बेसी उपयुक्त बुझना जाइछ । हम
‘धूर्त्तसमागम’ के मैथिली भाषाक पहिल नाटक
के रूपमे देखानिहारक संग छी । यैह मुख्य कारण भेल ‘धूर्त्तसमागम’ मंचित करबाक प्रमुख कारण ।
एहि नाट्य
प्रस्तुतिक लेल सबस’ पहिल आ मुख्य प्रक्रिया छल – एकर प्रस्तुति आलेख तैयार
करब । हमारा लग ‘धूर्त्तसमागम’ नाटकक
चारिटा पाठ उपलब्ध छल । डॉ. शशिनाथ झा ‘विद्यावाचस्पति’ जी द्वारा संपादित संस्कृत
आ मैथिली पाठ, वरिष्ठ रंगनिर्देशक कुणाल जी द्वारा संपादित मैथिली पाठ तथा श्रीमती
इंदुजा अवस्थी द्वारा संपादित एवं अनूदित हिन्दी पाठ । एहि सभक कतेको बेर अध्ययन
कयल गेल । मुदा, कोनो एकटा पाठ ल’ क’ मंचन तैयार करब रुचि नहि रहल छल कारण दुनू
पाठ मे नाटकीय प्रवाहक अभाव अछि । डॉ. शशिनाथ झा ‘विद्यावाचस्पति’ जी एवं श्री कुणाल
जीक मैथिली पाठक भाषा के मंच पर अनबा लेल अभिनेता के सेहो बहुत बेसी अभ्यासक
आवश्यकता होइतन्हि आ तैयो शंका बनल रहिते, जे प्रेक्षक एहि भाषा के स्वीकार करताह वा
कि नहि करताह ? मंचीय दृष्टि स’ सेहो उपर्युक्त नाट्यालेख
बहुत ओझरायल छल । एकरा फरिछाब’ मे स्वयं हमरा कतेको दिन लागी गेल त’ अभिनेता के त’
आरो बेसी ओझराहठि लगितन्हि । संभावना छल जे अभिनेता एहि आलेख के जबरदस्ती स्वीकार
करितथि । एहि स’ हुनका सबहक अभिनय निश्चित प्रभावित होइत । एहने कतेको दुविधाक कारण एहि सभ आलेख के अध्ययन
के बाद एकटा नव रंगमचीय भाषा देबाक विचार बनल । जाहि मे वर्तमान सामाजिक आ
राजनितिक व्यवस्था एवं वर्तमान रंगमचीय स्वरूप के सेहो समाहित कयल जाय । कतेको बैसार
आ रंगकर्मी संग विचार – विमर्श, वाद – विवाद के बाद एकटा नव आलेख तैयार भेल । ई
आलेख ऊपर वर्णित सभ पाठक मिश्रण बूझल जाय ।
उपर्युक्त सभ
पाठमे नट वा सूत्रधारक भूमिका आ ओकर संवाद बहुत बेसी छल, अपेक्षाकृत नटीक भूमिका आ
संवाद बहुत कम । विचार आयल -- जखन नटीक प्रवेश मंच पर हेबे करत त’ किएक नहि एहि
अभिनेत्रीक मंचोपयोगिता के कनी आर बेसी बढ़ाओल जाय ? संगहि प्रस्तुति के एकरसता स’
बचेबाक लेल नट आ नटीक बीच किछु जोड़ घटावक’ क’ संवाद के विस्तारित क’ दुनू रंगकर्मी
मे बाँटि देल जाय । संगहि संवाद अदायगी कनी नोक – झोंक बला राखल गेल । संवाद के
लयात्मक बना क’ दुनू रंगकर्मीक नृत्य मुद्रा मे आंगिक भंगिमा पर बेसी ध्यान रखबाक
प्रयास कयल गेल । चूँकि नाटक शृंगार रस प्रधान अछि तेँ नट – नटीक भाव – भंगिमा आ
संवाद वाचन मे सेहो नृत्य युक्त शृंगार रस के समावेशित कयल गेल अछि । एहि लेल
मैलोरंग रेपर्टरीक प्रियदर्शनी पूजा आ रमन कुमार सबस’ बेसी उपयुक्त रंगकर्मी छथि ।
दुनूक नृत्य विधा पर जबरदस्त पकड़ छन्हि । संगहि छोट छोट संवाद के शृंगारिकता स’ अभिव्यक्त
करबा मे माहिर सेहो । दुनू गोटे कठिन परिश्रम स’ नीक रूपक तैयार करबा मे सफल रहलाह
।
वर्तमानमे
मैलोरंग रेपर्टरी बेस पैघ टीम अछि । महिला रंगकर्मीक संख्या सेहो पर्याप्त अछि ।
तेँ कोनो नाटक बनेबा काल ध्यान राख’ पड़ैत छैक जे बेसी स’ बेसी रंगकर्मी नाटक मे
भाग ल’ सकथि । एहि नाटक मे मात्र सात – आठ रंगकर्मीक खगता छल तकरा बढ़ेबाक लेल नाटक
मे कोरस के प्रयोग कयल गेल । कोरस रहला स’ बहुत रास दृश्य सृजित करबा मे सेहो
सहयोग भेटैत अछि । नाटकक संवाद, कथ्य आदि स्थापित करबामे सेहो बल भेटैत छैक आ
प्रेक्षक चित्त केँ सेहो अपना दिस आकर्षित कयने रहैत छैक । तेँ एहि प्रस्तुति मे
पाँच गोट कोरसक सेहो उपयोग कयल गेल अछि । ई लोकनि कखनो गबैत छथि, कखनो नृत्य करैत
छथि, कखनो समवेत संवाद बजैत छथि, पात्र के मंच पर रंग पट्टिकाक संग अनबा आ वापस ल’
जयबाक रंगयुक्ति सेहो करैत छथि । विभिन्न प्रकारक दृश्य मंच पर अवरतित करबा मे
सहयोग दैत छथि । विभिन्न प्रस्तुति मे अलग अलग युवा रंगकर्मी कोरस मे अबैत जाइत
रहलाह अछि । बुझू ई नव नव रंगकर्मीक लेल रंग प्रशिक्षण सेहो अछि आ ‘धूर्त्तसमागम’ नाटकक मुख्य पात्र लेल प्रवेश द्वार सेहो । आवश्यकता भेला पर अही कोरस मे
स’ कोनो रंगकर्मी मुख्य पात्र लेल आसानी स’ सेहो तैयार भ’ सकताह, इहो ध्यान राखल
गेल छल । आगू एहन स्थिति बनबो कयल । कोनो रेपर्टरी लेल ई आवश्यक होइत अछि, तखनहि
कोनो प्रस्तुति दीर्घजीवी भ’ सकैत अछि । ‘धूर्तसमागम’ लेल एखन तक जे रंगकर्मी कोरस
केलन्हि अछि से छथि : नीतीश, निखिल, केशव, रोशन, संजीव, मनीष, मणिशंकर, शिवस्वरूप,
दीपानंद ।
मूलनाटक मे
पात्रक नाम सब निम्न प्रकारेँ अछि : सूत्रधार, विश्वनगर, स्नातक, मृतांगार ठक्कुर, असज्जाति मिश्र, विदूषक, मूलनाशक, नटी, सुरतप्रिया आ अनंगसेना
। मूल पाठ आ ताहि आधारित अन्य पाठक अध्ययन स’ लागल जे सब कियो अपना हिसाबे नाम
गढ़ने छथि – ठक्कुर भ’ गेलाह ठाकुर जेना विदूषक
लेल विवरण मे लिखल गेल अछि बन्धुवंचक, त’ सभ गोटे एहि मात्रके मूल नाम बन्धुवंचक
बना लेने छथि । एहि तरहक प्रयोग नाटक के कमजोर नहि क’ क’ बेसी उपयुक्त बनबैत अछि ।
नाटक मे सूत्रधार आ हुनकर कनिया नटी अछि । ताल मेल बैसेबाक लेल हम सूत्रधार के
बदला नट – नटी कयल । वर्तमान समय मे ‘विश्वनगर’ नाम आमजन लेल कठिनाह संगहि तेँ
विश्वनगर के बदलि क’ विश्वनाथ राखल ठाकुर आ मिश्र जीक प्रयोग अन्य पात्र संग भेले
छल तेँ विश्वनाथ जीक टाइटिल ‘झा’ राखि देल गेल । नट द्वारा संवाद सेहो बजाओल गेल
जे – “ई पं. विश्वनगर उर्फ पं. विश्वनाथ झा थिकाह । तहिना ‘स्नातक’ नाम आब चलन मे
नहि अछि । तेँ एहि लेल एहन नाम तकबाक प्रयास कयल गेल जे प्राय: स्नातक प्रवृतिक व्यक्ति सभ गाम मे विराजमान होथि ।
एहि लेल बंगट नाम सबस’ बेसी उपयुक्त भेटल । तेँ हमर प्रस्तुति आलेखमे विश्वनगर आ
स्नातक जोड़ी के नाम पं. विश्वनाथ झा एवं बंगट भ’ गेल । हलाँकि मंचनमे एहि बदलावक
सूचना समाहित कयल गेल ताकि सुधि प्रेक्षकके कोनो प्रकारक भ्रम नहि होनि । मृतांगार
ठक्कुर, असज्जाति मिश्र सन दुनू पात्र लग अपन अपन टाइटिल
छलन्हिए तेँ हिनका दुनू गोटे के नाम प्रस्तुतिमे एक बेर स्थापित केलाक बाद हिनक
टाइटिल ठाकुरजी आ मिश्रजी स’ संबोधन बढ़ाओल गेल अछि । विदूषक लेल सभ गोटॆ बंधुबंचक
नाम रखने छथि । हमहूँ एहि नाम संग भेलहुँ । एहि नाममे अनुनासिक प्रयोग संवाद
विविधता लेल सार्थक अछि । सूरतप्रिया आ अनंगसेना चिरपरिचित नाम अछिए । मूलनाशक
पात्र हमर प्रस्तुति आलेख स’ गायब छथि मुदा हिनक उपस्थिति मूलनाशके नाम स’ होइत
अछि । ई
भेल पात्रक नामांकरण आब चली नाटकक कथ्य पर ।
‘धूर्त्तसमागम’ लेल मंचीय आलेख तैयार करबा काल हमरा आगू हमर वर्तमान प्रेक्षक उपस्थित
छलाह, मन:स्थिति मे ज्योतिरीश्वर आ संग मे सैनिक रूपी हमर युवा रंगकर्मी । एहि
तीनू मे लगभग सात सय वर्षक दूरी हमरा पाटक छ्हल । तेँ बीचक बाट पर चलल गेल अछि ।
ज्योतिरीश्वरक कृत ‘धूर्त्तसमागम’ के
उत्कृष्ठ सरलीकरण कयल गेल अछि डॉ. शशिनाथ झा ‘विद्यावाचस्पति’ जी द्वारा । हिनक
मैथिली शब्द के नाट्य ध्वनि शब्द मे
बदलबाक प्रयास भेल । कथ्य मे जे कोनो बात नुकयल छल तकरा आरो नीक जेना फरिछाओल गेल
। नाटक ताहि समयक समसामयिक राजनीति पर प्रहार करैत अछि तकरा वर्तमान राजनीति दिस
मोड़बाक कतौ कतौ प्रयास कयल गेल । कोनो कोनो संवाद पात्र संग नहि जाति अछि ओहि
संवाद के दोसर पात्र स’ बजाओल गेल । पैघ संवाद के बाँटि क’ छोट छोट बनाओल गेल ।
संवाद मे दुहराव सेहो बहुत बेसी छल तकर रूप बदलबाक प्रयास सेहो कयल गेल अछि ।
‘धूर्त्तसमागम’ एकटा महत्वपूर्ण पात्र अछि मूलनासक । एकर विवरण अछि जे ई ... नापित (नौआ), धूर्त्त । यानि ई पात्र
मूलरूपे हजाम पेशाक अछि । डॉ. शशिनाथ झा ‘विद्यावाचस्पति’
जी द्वारा संपादित आलेख मे दृश्य अछि जे मंचपर अनंगसेना आ विदूषक अछि, तखने
मूलनाशक प्रवेश करैत अछि, अपन परिचय दैत अछि, अनंग स’ अपन शुल्क मँगैत अछि,
असज्जाति मिश्र के बाँन्हि दैत अछि आ चुपचाप बिना शुल्क लेने ससरि जाइत अछि ।
कुणाल जीक आलेख मे मूलनाशक अनंगसेना स’ तगेदा करैत अछि, असज्जाति मिश्र के बाँन्हि दैत अछि आ अनंगसेना के अपना संग ल’ क’ चलि जाइत
अछि, विदूषक (बंधुबंचक) जे कनिए काल पहिने अनंगसेना स’ प्रणय निवेदन करैत छल से
चुपचाप देखैत रहि जाइत अछि, कोनो प्रतिक्रिया नहि करैत अछि । प्रस्तुति के दृष्टि
स’ ई सब कथा एना लगैत अछि जेना मूल लेखक किछु आर कह’ चाहैत छलाह मुदा से कोनो
कारणवस आलेख मे नहि आबि सकल अछि ।
ईहो भ’ सकैत
अछि जे मूलनाशक के वर्तमान मे ‘व्यूटीपार्लर’ के मालिक जेना मानल जाय । जहिना आजुक
परिस्थिति मे ‘व्यूटीपार्लर’ वा ‘मसाज केन्द्र’ स’ कतेको प्रकारक समाचार अबैत रहैत
अछि प्राय: एहि सब केन्द्र स’ “एहि ठाम स’
देह व्यापारक व्यवसाय सेहो चलि रहल छैक” । भ’ सकैत अछि ज्योतिरीश्वर के समय मे
अनंगसेना अपन दैहिक साज-सज्जा लेल मूलनाशक हजामक केन्द्रक उपयोग करैत होथि आ ओकर
उधारी बहुत बेसी भ’ गेल होइ । एहि सब के चुकता करबा लेल ओ समाजिकरूपे प्रतिष्ठित आ
आर्थिक रूपे सम्पन्न असज्जाति मिश्रक हाथ पकड़ि लेने होथि । वा अन्य कोनो लक्ष्य...
। हम कोनो निर्णय पर नहि पहुँच रहल छलहुँ तेँ एहि प्रस्तुति के पात्र मूलनाशक के
हटा देल, मुदा मूलनाशकक सब संवाद के बंधुबंचक संग लगेबाक प्रयास करल । आलेख मे
मूलनाशक के जोड़ब हम आवश्यक मानैत छी । एहि लेल कनी आर शोधक आवश्यकता छैक, ताहि दिस
सेहो हमर प्रयास चलि रहल अछि । जँ कियो नीक जेना एहि दृश्य के फरिछौताह त’ सेहो
उत्तम होयत ।
मैलोरंग
रेपर्टरी मे ‘धूर्त्तसमागम’ मे नट आ नटीक भूमिका लेल सबस’ उपयुक्त
रमन आ प्रियदर्शनी पूजा उपस्थित छल । पहिनहि कहल जे ई दुनू नृत्य मे सिद्धहस्त छथि
। हमर परिकल्पनाक अनुरूप नट – नटीक भूमिका लेल एकदम फिट । एहि नाटकक सबस’ अहम
भूमिका अछि विश्वनगर उर्फ बाबा विश्वनाथ झा आ स्नातक यानी बंगटलाल । एहि मे कोनो
संदेह नहि जे वर्तमान मे मैथिली रंगमंच पर मुकेश झा अपन अभिनय क्षमता आ विविधताक
धनी अभिनेता छथि, कोनो पात्र के कोना पकड़ल जाय आ ओकरा कोना मंच पर उपस्थित कयल जाय
एहि लेल सतत क्रियाशील रहैत छथि मुकेश । मुकेश स’ बेसी नीक जेना ‘विश्वनाथ झा’क
चरित्र के मंच पर अननिहार कोनो दोसर अभिनेता एखन हमरा नजरि मे नहि छलाह, तेँ एहि
दुरूह पात्र लेल मुकेश झा एक मात्र विकल्प भेलाह । संगहि हिनक चेला स्नातक यानी
बंगटलाल लेल उपस्थित छलाह जितेन्द्र जीतू । जितेन्द्र वर्तमान मे मुम्बई मे रहैत
छथि । बहुत दिन स’ हुनकर विचार छलन्हि पुन: मैथिली नाटक करबाक । हमरा लेल सुन्दर
मौका छल । मुकेश आ जितेन्द्र दुनूक जोड़ी के एक बेर फेर स’ मैथिली मंच पर अनबाक ।
जितेन्द्र एकाग्रचित्त अभिनेता छथि । कोनो पात्रक कतेक आयाम भ’ सकैत अछि, कोनो
संवाद के कतेक प्रकारे अभिव्यक्त कयल जा सकैत अछि ताहि मे माहिर छथि जितेन्द्र ।
हिनका दुनू गोटे के निर्देशक रूपे मात्र एतबे कहबाक रहैत अछि जे हमरा की चाही । ई
दुनू एक संग ततेक विविधता ल’ अबैत छथि जे निर्देशक के विशेष सोच विचारक आवश्यकते
नहि रहि जाइत छैक । तहिना चरित्र मृतांगार ठक्कुर यानी
मृतांगार ठाकुर लेल हमरा सोझाँ छलाह संतोष कुमार । कोनो पात्र के आँगिक परिचालन
एवं वाचिक विविधता स’ स्थापित करबा मे सिद्धहस्थ छथि संतोष कुमार । मृतांगार ठाकुर
के सम्पूर्ण नाटक मे सबस’ कम संवाद अछि मुदा एकरा कोना पैघ कयल जाय आ बाँकी सब
पात्रक आगू कोना ठाढ़ कयल जाय ई बहुत कठिन काज छल, जकरा संतोष जी बखूबी निभेलन्हि ।
एहि पात्र संग एकटा आर विडम्बना भेल अछि । एखन तक जतेक प्रस्तुति भेल अछि सभ मे, नव नव रंगकर्मी एहि पात्र के अभिनीत केलाह
अछि । दोसर खेप जखन ‘धूर्त्तसमागम’ के
मंचन करबाक योजना बनल त’ एहि पात्र लेल उपस्थित भेलाह – मायानंद झा । मायानंद झा
सेहो अपन शारीरिक गठन मे वर्तमान मे उपस्थित सभ रंगकर्मी स’ अपना आप के फराक करैत
छथि । एहि पात्र लेल हिनक ई रूप सर्वथा उपयुक्त छल । पात्र पाँच दिनक अथक मेहनत के
बाद मायानंद जी एहि पात्र के सुन्दर आ सहज बनौलन्हि । हिनक अभिनय सेहो प्रेक्षक के
खूब पसिन परलन्हि । पूर्व प्रस्तुति स’ कनियो झूस नहि रहलाह, बल्कि पात्र संग
मजगूती स’ उपस्थित भेलाह । जखन एहि प्रस्तुति के काठमाण्डू मे प्रस्तुत करबाक बेर
आयल त’ मायानंद जी सेहो व्यक्तिगत कारण स’ दिल्ली मे उपस्थित नहि छलाह, तखन एहि लेल
तैयार भेल पूर्व कोरस करनिहार संजीव कुमार । हमरहि टा नहि हम सभ रंगकर्मी संजीव
लेल सशंकित रही । मुदा, तेसर दिनक पूर्वाभ्यास मे संजीव द्वारा पात्र लेल कयल गेल
व्यक्तिगत तैयारी अत्यधिक प्रभावित केलक । संजीव के प्रशिक्षण देबाक भार उठेलन्हि
जितेन्द्र जीतू । ई कहैत हमरा गौरव भ’ रहल अछि जे संजीव काठमाण्डूक प्रस्तुति मे
मृतांगार ठाकुरक पात्र लेल कोनो प्रकारक शिकाइतक मौका नहि देलक । प्रेक्षक लग अपन
पात्र के नीक जेना पहुँचेलक ।
एक
बेर अहिना कहियो मनीषा झा जिज्ञासा केने रहथि जे – सर ! हमरो कहियो कोनो नाटक मे
अभिनय करबाक मौका दियौने’ । बात आयल गेल बीत गेल । एहि बीच मनीषा झा स’ कतेको बेर
फोन पर गप्प भेल छल आ हुनक फेसबुक पोस्ट स’ हिनक परिचिति भेटैत रहैत छल । एहि बीच
एकाएक मनीषा मुम्बई स’ दिल्ली अयलीह । भेंट भेला पर कहलीह जे – सर ! हम दू – तीन
महीना दिल्ली मे रहब, अहाँ कोनो नाटक करी त’ हमरो कहब । हम चट द’ कहि देलियन्हि जे
4 जून स’ पूर्वाभ्यास अछि, आबि सकी त’ आबू । मनीषा जीक हम कहियो कोनो प्रकारक
अभिनय नहि देखने रहियन्हि । हमरा लेल ओ एकदम नव छलीह, मुदा हुनक प्रखर विचार स’ हम
रूबरू होइत रही तेँ ई विश्वास भ’ गेल छल जे ‘धूर्त्तसमागम’ के सूरतप्रिया सन बोल्ड चरित्र लेल मनीषा एकदम उपयुक्त छथि । मुदा डर छल
जे मनीषा ठीके नाटक लेल तैयार छथि की ? आ एहन पात्र मंच पर उपस्थित करबा लेल सेहो
मानसिक रूपे तैयार हेतीह वा नहि ? मुदा आश्चर्य ! 04 जून क’ ठीक समय पर मनीषा
स्क्रिप्ट संग पूर्वाभ्यास लेल उपस्थित छलीह । हम जेना आ जतेक मेहनत हिनका स’
करबाब’ चाहलहुँ मनीषा ओकरा नीक जेना केलीह आ अपन पात्र के नीक जेना जीलीह ।
वर्तमान समय मे मैथिली महिला रंगकर्मी मे एखन ‘धूर्त्तसमागम’क सूरतप्रिया सन बोल्ड चरित्र निभेनिहारि बहुत थोड़ अभिनेत्री छथि । दोसर
पात्र अछि अनंगसेना । एहि लेल मैलोरंगक अभिनेत्री सोनिया झा त’ पहिने स’ तय छलीह ।
सोनिया बहुत साल स’ मैलोरंगक संग जुड़ल छथि । हमरा विश्वास रहैत अछि जे कोनो पात्र
सोनिया के देल जेतन्हि ओकरा ओ मनोयोग स’ करतीह । चाहे वो जेहन पात्र हो, सोनिया
हरदम तैयार रहैत छथि । मुम्बई स’ दिल्ली आबि मैलोरंग संग मैथिली नाटक सालों स’ क’
रलह छथि । जे कोनो कठिन पात्र के मैलोरंग मंच तक अनलक, सोनिया ओकरा नीक जेना
निभेलीह, जेना नाटक आब मानि जाउ मे बुचिया क चरित्र । प्रियदर्शिनी पूजा, सोनिया आ
मनीषा तीनू अभिनेत्री ‘धूर्त्तसमागम’ लेल
कठोर परिश्रम केलन्हि अछि आ एहि प्रस्तुति के सार्थक ऊँचाई तक पहुँचेलन्हि ।
नाटकक
अंतिम भाग मे अबैत अछि असज्जाति मिश्र आ बंधुबंचक (विदूषक) । ई पात्र सेहो जोड़ा
पात्र बूझल जाय । असज्जाति मिश्र शारीरिक रूपे कनी स्थिर आ विदूषक कनी चंचल । ताहि
रूप मे हमरा लग अपन व्यक्तिगत प्रकृति मे दूटा पात्र उपस्थित छलाह – ऋतुराज आ मनोज
पाण्डेय । ओना अनुभव आ उम्र मे ऋतुराज स’ बेसी परिपक्व मनोज जी छथि, मुदा व्यवहार
मे मनोज जी ऋतुराज स’ बेसी फुर्तिला छथि । तेँ हिनका बंधुबंचक (विदूषक) आ ऋतुराज
लेल उचित पात्र भेल असज्जाति मिश्र । दुनूक आपसी तालमेल पहिनहु नीक छन्हि आ मंच पर
सेहो सुन्दर बनल रहल । मनोज जी जहिना व्यक्ति नीक छथि तहिना रंगकर्मी सेहो नीक छथि
। हिनकर तालमेल किनको संग आराम स’ बैस जाइत छन्हि । हिनका मे कनियो एहन भाव नहि
रहैत छन्हि जे हमरा कोन पात्र भेट रहल अछि बल्कि हिनक चिंता रहैत छन्हि – जे
चरित्र भेटल अछि तकरा बखूबी मंच धरि पहुँचाबी । बहुत रंगकर्मी सब पात्र करबा मे
ना-नुकुर सेहो करैत छथि मुदा मनोज जी मे ई अवगुण नहि छन्हि । उपर्युक्त पात्र लेल
जतेक शारीरिक लोच आ विविधता एकटा अभिनेता मे अयबाक छल से दुनू गोटे अनलाह ।
काठमाण्डूक प्रस्तुति मे मनोज जी व्यक्तिगत व्यस्तताक कारण नहि जा सकलाह तखन हिनक
स्थान पर अयलाह नीतीश कुमार । नीतीश पहिने एहि नाटक मे कोरस मे भाग लेने रहथि ।
नीतीश सेहो बहुत अनुशासित अभिनेता छथि । ऋतुराज संग मिलि क’ अथक परिश्रम नीतीश
केलन्हि आ अपन चरित्र के मनोज जी तक पहुँचेबाक नीक प्रयास केलन्हि । ई छल हमर ‘धूर्त्तसमागम’ लेल मंचपरक रंगकर्मीक समूह । आब हम ल’
चलैत छी मंचक पाछाँ ।
पूर्वाभ्यास
शुरू मे एक सप्ताह तक तीन घंटाक छल । जाहि मे पहिल एक घंटा शारीरिक व्यायाम, दोसर
घंटा प्रस्तुति आलेख पर बात – विचार आ अंतिम यानी तेसर घंटा रंगकर्मी द्वारा नाटक
पाठ । दोसर सप्ताह मे शारीरिक व्यायाम लेल छऊ गुरु भूमिकेश्वर जी के अमंत्रित कयल
गेलन्हि । संगहि नृत्य लेल एक दू दिन समय
देलीह कथक नृत्यांगना श्रीमती प्रतिभा सिंह जी आ पूजा प्रियदर्शनी एवं
रमण कुमार त’ सभ दिन नृत्यक अभ्यास करबैते छलाह । नाट्यालेख
सेहो नीक जेना सभ रंगकर्मी के फरिछा गेल छलन्हि ।आब एक घंटा नाट्य गति संचालन आ दू
घंटा नाट्याभ्यास शुरू भ’ गेल । संगहि पूर्वाभ्यासक समय आब तीन स’ चारि घंटा कयल
गेल । अंतिम घंटा मे संगीत पर काज प्रारंभ भेल । अंतिम सप्ताह मे पूर्वाभ्यास पाँच
घंटा पर चलि गेल । जाहि मे वस्त्र विन्यास आ सेट पर सेहो काज हूअ” लागल ।
नाटक ‘धूर्त्तसमागम’ लेल सबस’ बेसी महत्वपूर्ण काज छल एकर संगीत संयोजन । एहि लेल मैलोरंग मे
दीपक ठाकुर के भार देल गेलन्हि । दीपक किछु गीत तैयार केलन्हि । फेर राजेश पाठक,
अनिल मिश्रा के जोड़ल गेलन्हि । मैलोरंगक हरफनमौला छथि राजीव रंजन झा । जहिना
सुन्दर ई गीत गबैत छथि तहिना संगीतक प्रति हिनकर आकर्षण छन्हि । एहि नाटकक संगीत
लेल मुख्य सूत्रधार भेलथि राजीव रंजन । राजेश पाठक जी, अनिल मिश्रा जी आ दीपक
ठाकुर जीक बीच सामन्जस बनबैत सभटा गीत तैयार भेल आ मुख्य स्वर लेल राजीव स्वयं
रहथि । आब अति आवश्यकता छल मुख्य महिला स्वरक । एकरा लेल अनिल मिश्रा जी नाम
सुझेलथि सुश्री सुष्मिता झी जीक । हमरा हिनका स’ कोनो परिचय नहि छल । अनिल जीक
कहला पर हिनका स’ सम्पर्क कयल गेल । सुष्मिता जी अयलीह । जहिना देखबा मे सुन्दर
तहिना हिनक कंठ स्वर । पहिल दिन जखन नाटकक पूर्वाभ्यास मे ई अपन कार स’ उतरलीह आ
दिल्लीक गर्मी मे पसीना पसीना भ’ निच्चा मे बैसि क’ गायन के अभ्यास शुरु कयलीह त’
हमर मोन कहलक जे अजुका दिन हिनकर अंतिमे दिन बूझल जाय । ई सुकमारि नाटक सन कठोर आ
गरीब विधा मे नहि रहि सकतीह । मुदा, हमर अनुमान गलत भेल सुष्मिता जी सभ दिन समय पर
उपस्थित भ’ नाटकक नीरस पूर्वाभ्यास के आनन्द लैत रहलीन आ महिलाक मुख्य स्वर दैत रहलीह
। हिनका सब संग संगीत कोरस मे संग रहथि – अमर जी, भास्कर, ज्योति, नीतीश, शिवानी, सोनी
आदि लोकन्हि ।
एहि नाटक लेल
वस्त्र विन्यास करब सेहो दुरूह छल । वस्त्र विन्यास लेल सातम शताब्दीक वस्त्र
सज्जाक अध्ययन कयल गेल । कतेको प्रकार स’ एहि लेल शोध भेल । एकरा सहज करबा लेल
नाटकक पात्र के हम समूह मे बँटलहुँ । जेना कोरस सभहक एक समूह, नट + नटी, बाबा
विश्वनाथ + चेला बंगट, सूरतप्रिया + अनंगसेना, असज्जाति मिश्र + बंधुबंचक, मृतांगर
ठाकुर असगरे । आब एहि समूह मे वस्त्र विन्यास के साम्य सथापित करैत सोचब शुरू भेल
। कोरस लेल एक रंग के वस्त्र राखल गेल ।
उज्जर धोती पर नील सन बैंगनी दुपटा । नट लेल लाल रंगक मिरजई राखल गेल आ नटीक लेल
कंचुकी आ भरतनाट्यम स’ मिलैत जुलैत पाजामी । जेहन रंगक नटक मूल वस्त्र छल तेहने
रंगक नटीक ओढ़नी राखल गेल जाहि स’ नट – नटीक आपसी जुड़ाब देखाओल जा सकै । बाबा
विश्वनाथ झा के एक खण्डी केसरिआ धोती आ उज्जड़ डोपटा देल गेल आ तहिना ठीक तकर
विपरित चेला बंगट के एक खण्डी उज्जड़ धोती आ केसरिया डोपटा । बाबा त’ परिपक्व भ’
गेल अछि तेँ पूर्ण केसरिया, चेला बाबा बनबाक प्रक्रिया मे अछि तेँ एखन मात्र डोपटा
केसरिया । मृतांगर ठाकुर संग कोनो जोड़ नहि छल तेँ एकदम अलग तरहक पहिरन राखल गेल,
जाहि स’ धनिकक बोध होई । पाढ़िदार लाग टुहटुह धोती जड़ीदार बंडी आ गरदनि मे कतेको
प्रकारक हार । आब बारी छल सुरतप्रिया आ अनंगसेनाक । दुनूक पहिरन मे सेहो एक
प्रकारक साम्य अछि । एकक साड़ी जेहन रंगक दोसरक ब्लाउज ओहने रंगक । तहिना असज्जाति
मिश्र आ बंधुबंचक लेल सेहो कयल गेल । असज्जाति
मिश्र के वर्तमान न्यायाधीशक गाउन देल गेल आ बंधुबंचक के वर्तमान पुलिसक शर्ट ।
हिनका दुनूक वस्त्र विन्यास प्रवेशकाल अर्धदेह राखल गेल छल, मुदा जखन ई लोकनि
न्याय लेल तैयार होइत छथि तखन वर्तमान रूप धारन करैत छथि । कारण वर्तमान
न्यायतंत्र आ पुलिस तंत्र के देखायब छल । ‘धूर्तसमागम’ लेल वस्त्र संयोजनक भार
छलन्हि सुश्री सोनिया झाक । सोनिया के एहि कार्य मे सेहो खूब रुचि छन्हि । जे कोनो
वस्त्र आ ओकर रंग वा साइज हिनका कहल जाइत छन्हि ओकरा सौंसे दिल्लीक बजार वा अन्य
कोनो स्थान स’ ताकि हेरि क’ ल’ अयबा मे महारथ छन्हि । सोनिया एहि काज लेल कतेको
बेर डालचन्द कॉस्ट्यूम आ लोकल बाजार मे दौड़ल हेतीह तकर गिनती नहि अछि । एहि काज मे
कखनो ज्योति, कखनो नीतीश, त’ कखनो मनीष आदि स’ सहयोग लैत रहलीह ।
प्रस्तुति
लेल प्रकाश व्यवस्था महत्वपूर्ण पक्ष अछि । एहि के नीक जेना परिकल्पित केलाह श्याम
साहनी, तकरा सब प्रस्तुति मे संचालित करैत छथि संजीव कुमार ‘बिट्टू । संजीव कुमार
‘बिट्टू’ प्रस्तुति हेतु अति महत्वपूर्ण काज सब सम्पादित केलथि अछि । जेना सेट
लगायब, प्रचार प्रसार लेल पोस्टर परिकल्पित करब आदि आदि ।
हमर प्रयास
रहैत अछि जे नाटक मे सेटक ताम झाम बेसी नहि रहै । ‘धूर्त्तसमागम’ नाटक मे सबटा धूर्त्त अछि, संगहि ई सब कियो अपना हिसाबे समाज मे चलबाक जोगार
मे, एक दोसरा स’ उपरा – उपरी करबा मे व्यस्त बुझाइत अछि । बहुत मंथन के बाद एहि
लेल तोड़ निकलल मंच पर ‘शतरंज’ बनाओल जाय ।
आब एहि ‘शतरंज’ के कोना मंच पर उतारल जाय से व्योंत लगौलन्हि श्याम साहनी । श्याम
साहनी के एहि मे महारथ छन्हि । ओ एहि लेल रस्सीक उपयोग केलन्हि । आ एकरा शतरंजक
रूप देलाह । परिकल्पना श्याम साहनीक छन्हि
जकरा संजीव बिट्टू विस्तार दैत छथि अपन संगी सबहक संग जाहि मे प्रमुख छथि - स्वाभिमान, साकेत गौतम, संजीव, विक्रम आदि ।
नाटक ‘धूर्त्तसमागम’ तैयार करबा मे सबस’ मुख्य व्यक्ति छथि श्याम साहनी । श्याम राष्ट्रीय
नाट्य विद्यालय स’ प्रशिक्षित छथि । जहिना नाम तहिना हिनक व्यवहार । ने कोनो तामस
आ ने हरबरी, अपन सब रंगकर्मी चाहे ओ वरीष्ठ होथि वा कनिष्ठ श्याम सबहक प्रिय भ’
जाइत छथि । एहि प्रस्तुतिक सहायक निर्देशक श्यामे छथि । नाटकक अभिनय पक्षक पूरा
भार हिनके उपर छल । संगहि कोनो पात्र मंचपर कोना अओताह आ कोना जेताह तकर परिकल्पना
सेहो श्याम कयने छथि । दृश्य विन्यास, प्रकाश परिकल्पना, मंच परिकल्पना आदि मे
मुख्य भूमिका श्याम साहनीक छन्हि । संगहि प्रस्तुतिक समय श्याम संगीत कक्षमे
विभिन्न वाद्ययंत्र संग उपस्थित रहैत छथि ।
मैलोरंगक अन्य रंगकर्मीक सहयोग के नहि बिसरल
जा सकैत अछि । ई लोकन्हि हरदम ‘धूर्त्तसमागम’रूपी यज्ञ मे आहूति दैत रहलाह । जाहि मे प्रमुख छथि - दीपक यात्री, नीरा
कुमारी, सत्यकेति मिश्रा, प्रभात रंजन, सुधा झा, निशा कुमारी, आनंद राउत, मणिशंकर,
अरविन्द सिंह, जितेन्द्र नाथ ‘जीतू’, सागर झा आदि । नाटक लेल आर्थिक एवं अन्य
सहयोग लेल संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार; राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली;
साहित्य कला परिषद, दिल्ली सरकार; गाँधी हिन्दुस्तानी साहित्य सभा, दिल्ली केँ
हार्दिक धन्यवाद ।
हम आभारी छी
अपन सभ रंगकर्मीक जे लोकन्हि हमर परिकल्पना के प्रेक्षक लोकन्हि तक अनबा मे अथक
परिश्रम केलन्हि अछि संगहि एहि नाट्य प्रस्तुतिक हजारो देश – विदेशक प्रेक्षक केँ
धन्यवाद जे लोकन्हि अपन व्यस्तम समय निकालि विभिन्न प्रेक्षागृहमे उपस्थित भ’ हमर
सबहक एहि नाट्य प्रस्तुति के देखलाह अछि आ आगुओ देखताह । हुनका लोकनिक त’
विशेषरूपे जे लोकन्हि नाटक देखलन्हि आ अपन प्रतिक्रिया लेखनी रूपमे हमरा उपलब्ध
करौलन्हि । जाहि स’ ई पुस्तक अपन गरिमा प्राप्त करबामे सफल भेल अछि । एहि अवसर पर
अपन मित्र कौशल कुमार मिश्रा जीक विशेष आभार जे डॉ. शशिनाथ झा ‘विद्यावाचस्पति’ जी
स’ हुनका द्वारा सम्पादित कविशेखराचार्य ज्योतिरीश्वर कृतं ‘धूर्त्तसमागम’ नाटकक संस्कृत पाठ के पुनर्प्रकाशन हेतु हमरा अनुमति दियौलन्हि । अंत मे
हम अपन सम्पूर्ण मैलोरंग टीम दिस स’ आभारी छी ‘नेपाल संगीत तथा नाट्य प्रज्ञा –
प्रतिष्ठान, काठमाण्डू’क एवं अग्रज श्री रमेश रंजन झा (प्राज्ञ परिषद सदस्य,
प्रमुख नाट्य विभाग) केँ जे ‘ज्योतिरीश्वर रंग उत्सव, 2075’ (आसार 8 – 10 गते) मे
‘धूर्त्तसमागम’ नाटक के आमंत्रित क’ क’ मैलोरंग के मैथिली भाषाक पहिल टीम होयबाक गरिमा
प्रदान केलथि जकरा नाट्य प्रस्तुति करबाक लेल नेपाल देशक सरकारी आमंत्रण प्राप्त
भेल हो ।
छपैत छपैत : प्रस्तुति
भेल । हमर सभ रंगकर्मी अपन प्रस्तुति स’ खुश छलाह । हमरो आत्मसंतुष्टि भेल । कतेको
लोकन्हि कतेको प्रकारक प्रतिक्रिया देलन्हि, कतेको लोकन्हि प्रस्तुति देखला बाद
अभिभूत छलाह त’ कतेको लोकन्हि कतेको प्रश्न उठौलन्हि । लागल जे ई प्रस्तुति
प्रेक्षक लोकन्हिके अपन अपन प्रतिक्रिया देबालेल उद्वेलित क’ दैत छन्हि । मुदा
पहिल प्रतिक्रिया प्राय: सबके एक्के छलन्हि, जे प्रस्तुति हुनका लोकन्हि के मनभावन
लगलन्हि । तखन विचार आयल जे किएक नहि प्रेक्षक लोकन्हिक प्रतिक्रिया के समायोजित
कयल जाय ? एहन प्रयास प्राय: भेलो नहि अछि । तेँ सब स’ आग्रह कयल जे ओ लोकन्हि अपन
अपन प्रतिक्रिया लिखितरूपे देथि । प्रतिक्रिया सब आब’ लागल । आश्चर्यरूपे सबहक
प्रतिक्रिया एकदोसरा स’ भिन्न छल । हँ ! कतेको गोटे अपन अपन आलेखमे नाटकक कथासार
लिखलन्हि, से पाठक लेल दोहराव सन लगैत तेँ हुनका सबहक आलेख सँ कथासार हटा देल गेल
अछि ।
एहि पुस्तकके
अध्ययन स’ नाट्यकलालेल समीक्षात्मक दृष्टि की होबाक चाही से नीक जेना फरिछाओत । हम
अपनो चकित छी । सम्पूर्ण आलेखक अध्ययनक बाद परिणाम कोनो निश्चित नहि अबैत अछि जेना
– किनको संगीत अद्भुत लगैत छन्हि त’ किनको एहिमे किछु त्रुटि लगैत छन्हि । किनको
संगीतमे खांटी मैथिलीपन चाही त’ किनको मैथिलीसंग चलताऊँ संगीतक फ्यूजन चाहियन्हि ।
तहिना वस्त्र-विन्यासमे किनको परम्पराशील वस्त्र चाही त’ किनको परम्परासंग वर्तमान
के समेकितरूप चाही । वस्त्र विन्यासमे किनको बेसी चमक बुझेलन्हि त’ किनको एहन प्रयोग
खूब नीक लगलन्हि । किनको मंचसज्जा हल्लुक होयब नीक लगैत छन्हि त’ किनको एहन मंच
खाली बुझाइत छन्हि । किनको आलेखमे शुद्धता चाही (यानी जेहन पं. ज्योतिरीश्वर
लिखलन्हि छथि) त’ किनको आलेखमे समकालीनताक पुट खूब प्रभावित करैत छन्हि । किनको
अत्यधिक अश्लील बुझाइत छन्हि त’ किनको श्लील आ अश्लील के बीच मजबूत सीमारेखा
देखाइत छन्हि ।
हँ ! प्रस्तुतिक
मादे दूटा सुधार हमरो उचित बुझना गेल अछि । ताहिदिस प्रो. देवशंकर नवीन संग आरो
कतेको समीक्षक लोकन्हि हमर ध्यान आकृष्ट करौलन्हि अछि । ओना हम अपनहु पहिने स’ एहि
दिस साकांक्ष रही, मुदा हमर पूर्व प्रस्तुतिमे एहन सुधार नहि भ’ सकल छल, आगामी
प्रस्तुतिमे हम अवश्य एहि सुधार दिस देलहु अछि । कतेक सफल भेलन्हुँ अछि से पुन:
प्रेक्षकक आगू अछि । पहिल छल पात्रक नाम
बदलब आ दोसर मूलनाश पात्र के विलोपित क’ देब । पात्रक नाम बदलबक संदर्भमे हम कोनो
विशेष परिवर्तन नहि केने रही । जाहि पात्रक नाम बदलल गेल छल तकर सूचना हमर पात्र
अपन संवाद मे द’ दैत छथि, मुदा हमरा लगैत अछि ई बेसी प्रभावी नहि भ’ सकल ।
। हँ !
स्नातकक नाम ‘बंगट’ कयल गेल अछि, तकर सूचना हम नहि द’ सकल छी । आब एकर सुधार आलेख मे क’ देल गेल अछि ।
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डॉ. प्रकाश झा.
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