गुरुवार, 29 नवंबर 2012


मलंगिया नाट्य महोत्सव

 

मैथिली लोक रंग / मैलोरंग अपन गतिविधिक सातम बर्ख पूर केलक अछि । एहि बीच संगठन दिल्‍ली सन  महानगरमे जे आयोजन / प्रकाशन वाकि उपलब्धि प्राप्त क सकल अछि, तकर मधुरगुंज प्रत्‍यक्ष वा परोक्ष रूपसँ  अहाँक समीप पहुँचेबाक प्रयास मैलोरंग करैत रहल अछि । मैलोरंग मैथिली भाषा आ संस्कृतिक संवर्धनक लेल सतत प्रयासरत अछि ।   
                                                                                  
वर्ष 2012 क पूर्णाहुतिक उपलक्ष्‍यमे  मैलोरंग अपन वार्षिकोत्‍सव के प्रसिद्ध नाटककार महेन्‍द्र मलंगिया पर केन्‍द्रित कयलक अछि । एहि मलंगिया नाट्य महोत्सव मे  मैथिलीक विभिन्‍न नाट्यदल द्वारा महेन्‍द्र मलंगियाक विभिन्न नाटकक प्रस्‍तुति (26-30 दिसम्बर, 2012) श्रीराम सेंटर, मण्डीहाउस, नई दिल्ली मे कयल जायत । नाट्यदल देशक विभिन्न शहर सँ आमंत्रित कयल गेल अछि । नाटककार महेन्‍द्र मलंगियापर केन्‍द्रित एकटा भव्‍य संगोष्‍ठी एवं हुनकर नाट्य  रचना संचयनक संग मूल्‍यांकनपरक पुस्तक नाटककार महेन्‍द्र मलंगिया : जीवन एवं सृजन सेहो प्रकाशित होयत । एही वर्षक ज्योतिरीश्वर सम्मान सेहो महेन्द्र मलंगिया के देल जेतैन ।

मलंगिया नाट्य महोत्सव आयोजनक  सविस्तृत जानकारी, मंचित नाटकक ब्रोश्यर एवं आरो कतेको महत्वपूर्ण सामग्रीक लेल आकर्षक स्मारिकाक प्रकाशन कयल जेबाक अछि । अहाँ सँ सादर अनुरोध अहि जे एहि सुन्दर आयोजन मलंगिया नाट्य महोत्सवक लेल हमरा सबकेँ अपन शुभकामना दी । एहि स हमारा सबहक विश्वास बनल रहत ।
हमरा विश्वास अछि अहाँ महोत्सव लेल अपन शुभकामना अवश्य देब ।   
आहाँक विश्वासी अनुज
[ प्रकाश झा ]  
निदेशक, मैलोरंग. 

सोमवार, 26 नवंबर 2012

मलंगिया नाट्य महोत्सव

आगामी 26 – 30 दिसम्बर, 2012 तक
मलंगिया नाट्य महोत्सव;
मैलोरंग, दिल्ली द्वारा स्थानीय श्रीराम सेंटर, मण्डी हाउस, नई दिल्ली – 01 मे प्रति दिन
सायं 6.30 बजे स’ आयोजित कयल जायत.

मलंगिया नाट्य महोत्सवमे भारतक संग नेपालक कुल पाँचटा नाट्य संगठन नाटककार महेन्द्र मलंगिया लिखित विभिन्न नाटकक मंचन करत.

मैथिली रंगमंचमे एहि प्रकारक ई पहिल आयोजन थिक जे कि कोनो एक नाटककार पर केन्द्रित होइ.
एहि नाट्य महोत्सवमे नाटककार मलंगियाक चर्चित पाँच नाटक क्रमश:
ओकरा आँगनक बारहमासा, गाम नै सुतैए, छुतहा घैल, जुआयल कनकनीओरिजनल काम चयनित कयल गेल अछि.    

आयोजनमे अपने सब स-परिवार आमंत्रित छी...
 

 

मलंगिया जी के बधाई...

महाकवि विद्यापतिक स्मृति दिवस, विगत 26 नवम्बर, 2012 क' जनकपुर नेपालमे सम्पन्न भेल ।
नेपाल सरकार द्वारा गठित विद्यापति पुरस्कार कोष सोमदिन पुरस्कारक घोषणा कएलक ।
विद्यापति मैथिली कला संस्कृति पुरस्कार मैथिलीक चर्चित नाटककार महेन्द्र मलंगियाकेँ देल जयतनि.
 
ई जानकारी पुरस्कार कोषक सदस्य सचिव श्याम सुन्दर शशि जानकारी देलन्हि अछि । जानकारी सुजीत कुमार एहि शुभ संवाद के प्रसारित कयलथि अछि । 
 
एही बेर मैथिली रंगमंचक ज्योतिरीश्वर सम्मान स' सेहो मलंगिया जी सम्मानित भेलथि अछि. ई सम्मान हिनका 26 दिसम्बर, 2012 क' दिल्ली मे प्रदान कयल जेतनि.
 
जनकारी दी जे श्री महेन्द्र मलंगिया आजुक समय मे मैथिली लोक रंग / मैलोरंग दिल्लीक अध्यक्ष छथि.
मैलोरंगक आगामी योजनामे नाटककार महेन्द्र मलंगिया लिखित नाटकक मंचन 26 - 30 दिसम्बर, 2012 धरि श्रीराम सेंटर, नई दिल्ली मे "मलंगिया नाट्य महोत्सव" नाम होयत.
 
बेसी स' बेसी गोटे आबी से हकार अछि ।
 
 

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बुधवार, 7 नवंबर 2012

प्रस्तुति : खोल दो और मोज़ेल

यह वर्ष सहादत हसन मंटो का जन्मशताब्दी वर्ष है. मंटो की दो कहानियों को लेकर दिल्ली के संभव थिएटर ग्रुप द्वारा कहानी का रंगमंच तैयार किया गया है. इसमें मंटो लिखित खोल दो और मोज़ेल कहानी को लिया गया है. इस प्रस्तुति को निर्देशित किया है देवेन्द्र राज अंकुर जी ने. प्रस्तुति में मैं भी मंच पर संलग्न हूँ.

प्रस्तुति का प्रथम मंचन बिहार के गया स्थित रेनेशां प्रेक्षागृह मे 4 नवम्बर, 2012 को  किया गया. इसके अगले दिन पटना स्थित कालिदास रंगशाला में इसका दूसरा मंचन हुआ.

देश के विभिन्न हिस्सों में अभी इस प्रस्तुति को मंचित करने की योजना है.

समय निकाल कर आप भी देखें, अच्छा लगेगा.

मंगलवार, 6 नवंबर 2012

आयोजन : लोक बिम्ब

आज के संदर्भ में दिल्ली कला एवं संस्कृति का केन्द्र है. आपको हमेशा ही देश के विभिन्न कला - संस्कृति को देखने - परखने का अवसर मिलता रहता है. दिल्ली सरकार की हिन्दी अकादमी दिनांक 8 से 11, 2012 तक लोक बिम्ब नाम से लोक सांस्कृतिक उत्सव का आयोजन कर रहा है. यह आयोजन सुरताल ओपन थिएटर, ताल कटोरा मैदान, नई दिल्ली - 01 में सायं 6.00 बजे से रखा गया है.

इस आयोजन में आप राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, उत्तराखण्ड तथा हिमाचल प्रदेश की लोक सांस्कृतिक झलकी देख सकते हैं. इन चार दिनों में मरुवाद्य, चरी, घूमर, चकरी, सिद्दी धमाल, सकाई, चांदला, होली डांण, ब्रज का रसिया, नाचा, करमा पंछी, राउतनाचा, ददरिया, देवार करमा, खोड़िया, बीजना, घोड़ी नृत्य, रागनी, विवाह बीन, प्रहसन, गोरिया, लुड्डी, वीर नारसिंह की छाया, बुढड़ा आदि लोक रंजक सांस्कृतिक देखने का अवसर मिलेगा.