सोमवार, 29 फ़रवरी 2016

प्रवीण नारायण एवं किशलय कृष्ण जीक कूटनीतिक परिणति : दिल्लीक मैथिली आन्दोलन अस्ताञ्चल दिस अग्रसर...

[ दिल्ली मे पिछला नौ दस सालमे भेल साहित्यिक सांस्कृतिक उत्कर्ष आ उठा – पटकक संदर्भमे किछु अप्पन व्यक्तिगत विचार आ दिल्लीक युवाजन हेतु निवेदन । बहुत दिन स’ मोनमे किछु घुमड़ि रहल छल । मोनक एक पक्ष रोकैत छल त’ दोसर पक्ष धिक्कारैत छल । अंत मे दोसरे पक्ष जीतल । अंतिम कहब भेल जे – “ जँ अप्पन मोनक गप्प नहि बजलहु त’ रंगकर्म छोड़ि देल जाय ।हमरा स’ रंगकर्म छोड़ल नै जा सकैत अछि तेँ लिखबा लेल बाध्य भेलहुँ । ई जनैत छी जे बहुत पैघ मिथिला समाज एहि विचार स’ सहमत नै हेताह, जे कियो हेब्बो करताह ओ मुखर नै भ’ सकताह । मुदा कयल की जाय ? मैथिल समाजमे जहिए स’ नाटक के अपन कैरियर बनेलहु तहिये स’ सब किछु अबधारि लेने छी तेँ एक बेर फेर सही । अप्पन विचार नुका क’ राखब उचित नै । उपर्युक्त दुनू भाई साहेब स’ अग्रिम माफी । ]
जुगल जोड़ी : किशलय प्रवीण ( फेर करताह किछु नवीन ) 

दिल्ली देशक राजधानी होबाक कारणे सबकेँ आकर्षित करैत अछि । एहि दिल्लीमे सबस’ पहिने पंजाबी भाषा अपन खुट्टा नीक जेना रोपि चुकल छल । तकरा बाद एवं प्रकारे उर्दू, सिंधी, बंगाली, संस्कृत सरकारी रूपे स्थापित भेल । कतेको मैथिली संगठन आ व्यक्ति समूह सालक साल मैथिली के स्थापित करबा लेल लागल रहलाह । धीरे – धीरे एहन स्थिति आबि गेलैक जे मैथिली भाषा दिल्लीक राजनीति के नीक जेना प्रभावित क’ र’ लगलैक आ अपन विस्तार संग उचित स्थान पाबि लेलक । हमर अनुभव विगत दस एगारह सालक अछि तेँ बेसी पाछाँ नहि जा सकैत छी । वर्ष 2006 स’ 2011 तक मैथिली भाषी युवकक सक्रियता ततेक बेसी भ’ गेल जे सम्पूर्ण मिथिला वासी दिल्लीक एहन युवाजन पर गौरवांवित हुअ’ लगलाह । हमर ई व्यक्तिगत अनुभव अछि जे एहि बीच ततेक सक्रियता आ आपसी मेल जोल हमरा सबके बीच बढ़ल जे लगभग तीन सय स’ बेसी मैथिल युवा लोकनि के हम सब नाम आ चेहरा जानि पहचानि गेल रही । सब गोटे अलग – अलग क्षेत्रमे अपन सक्रियता रखने छलाह । दिल्लीक कोनो कोनमे कोनो तरहक आयोजन होई कोनो तरहक कार्ड छपेबाक बेगरता नहि छलै । बस एस.एम.एस. मात्र स’ तीन स’ चारि सय युवा उपस्थित भ’ जाइत छलाह आ आयोजनमे शक्ति प्रदान क’ दैत छलाह । दिल्ली सरकार एहि मैथिल युवा लोकनिक सक्रियता के नीक जेना संज्ञान लैत छल । सब गोटे एक दोसर के सुख दु:खमे ठाढ़ देखाइत छलाह । सत्त कहू त’ हमरा सब के अपना पर घमंड हुअ’ लागल छल । देशक दोसर ठामक मैथिल युवा हेतु दिल्लीक युवा शक्ति मार्गदर्शक बनि काज क’ र’ लागल छलाह । उपर्युक्त यथास्थिति स’ अपनहु भिज्ञ होयब । एक स’ एक आयोजन होइत छल । दिल्लीक युवा लोकनि अप्पन क्षेत्र बढौलन्हि आ दिल्लीक आयोजनमे देशक दोसर दोसर भाग स’ स्थापित मैथिल सेबी लोकन्हि के आमन्त्रित क’ र’ लगलाह । चारूकात गहमा गहमीक स्थिति छल । मैथिलसेबी लोकनिक ध्यान दिल्ली दिस आकर्षित हुअ’ लागल । एहि बीच सैकड़ों मैथिलसेबी के दिल्ली आमंत्रित कयल गेलन्हि । एहि मे दूटा महत्त्वपूर्ण व्यक्ति छथि –– भाई  प्रवीण नारायण चौधरी आ भाई किशलय कृष्ण जी । भाई प्रवीण नारायण चौधरी जी ता धरि फेसबुक के माध्यमे अपना के दहेज मुक्त मिथिला नाम स’ स्थापित क’ चुकल छलाह । अपन बेबाकीपन स’ मैथिल युवा बीच सुपरिचित भ’ चुकल छलाह । संगहि किशलय कृष्ण जी सेहो मैथिली फिल्म आ मैथिली साहित्यक विशेषज्ञक रूपे मिथिलाक युवा मे अपन स्थान स्थापित क’ लेने रहथि । अपन मृदुभाषीपन आ सहजता स’ लोकप्रिय भ’ चुकल छलाह । यानी कहल जा सकैत अछि जे अपन व्यक्तिगत व्यवहार मे दुनू गोटे एक दोसरा के ठीक विपरित । एक गोटे गरम दल त’ दोसर नरम दल । एक गोटे सामाजिक आ राजनितिक विचारधारा के अनुयायी त’ दोसर गोटे साहित्यिक आ सांस्कृतिक विचारधारा के सेबक ।

पहिने कहने छलहु जे दिल्लीक युवा लोकनि अपन आयोजन मे कतेको अतिथि के आमंत्रित करैत छलाह त’ हिनको लोकनि के एक दू टा आयोजन मे नोत देल गेलन्हि । एहि दुनू व्यक्तिके दिल्लीक सक्रियता बेसी आकर्षित केलकन्हि । दिल्ली मे अपना के स्थापित करबा लेल ई दुनू गोटे विभिन्न तरहक रस्ता अपनौलन्हि । परिणामत: लगभग एक्के समय ई दुनू गोटे दिल्लीक विभिन्न आयोजन मे आने आने अतिथि जेना आमंत्रित हुअ’ लगला । एकरा मात्र संजोगे कहल जा सकैत अछि जे दिल्लीक उत्साही युवा लोकनिक दुनू फ्रंट यानी सामाजिक आ राजनितिक आयोजन मे भाई प्रवीण नारायण चौधरी जी आ दोसर साहित्यिक आ सांस्कृतिक आयोजन मे भाई किशलय कृष्ण जी अनिवार्य घटकक रूपमे उपस्थित होब’ लगलाह । अपना के स्थापित करबा लेल दुनू गोटे बुधियारी स’ दिल्लीक सक्रिय संगठनक कमजोर कड़ी के अपन शिकार बनब’ लगलाह । दिल्लीक युवा लोकनि हिनक सबहक एहि प्रयास के नहि जानि सकलाह । परिणाम भेल जे जाहि जाहि संगठन स’ ई लोकनि जुड़लाह ओ सब संगठन धीरे धीरे बँटैत गेल । जे लोकनि एक दोसराक एस. एम. एस. पर ताल ठोकि क’ अप्पन – अप्पन ऑफिस स’ भागि एक दोसराक संग ठाढ़ रहैत छलाह ओ लोकन्हि आब एक दोसराक उकटा पैंची क’ र’ लगलाह आ सबमे छत्तीसक संबंध बनि गेल । संगठन छोट होइत गेल... शक्ति क्षीण होइत गेलै । ई दुनू भौयारी अपना के अतिथिपद पर आसीन रखलाह आ अप्पन गेम खेलैत रहलाह । दिल्लीक साहित्यिक, सांस्कृतिक आ राजनीतिक आंदोलन भुस्सातरे बैसैत गेल ।    

भाई प्रवीण नारायण चौधरी आ भाई किशलय कृष्ण जी दिल्लीक लेल अतिथि बनि आयल छलाह । कोनो अतिथि के अतिथि जेना रहबाक चाही मुदा आतिथ्य देनिहार लोकनिक आतिथि सेवा ततेक ने नि:श्छल छल जे ओ लोकनि अतिथिक मानसिकता आ हुनक मनसा के बुझि नहि सकलाह । दुनू अतिथि लोकनि अपन अपन कार्य सिद्धि लेल लगभग सब संगठन स’ जूड़ैत गेला आ स्वार्थ सिद्धि बाद संगठन के नीक जेना दोमि देलाह । कियो कहि सकैत छथि जे हिनका लोकन्हि पर ई निराधार आरोप अछि मुदा किछु उदाहरण अछि जकरा सामने राखल जयबाक चाही :

आदरणीय किशलय भाई अपन ग्रामीण जीवनमे दू – तीनटा नाटक खेलने हेता कि नहि मुदा एकटा मजबूत संस्था के कमजोर करबाक लेल ओहिमे स’ किछु सदस्य के भाँड़ि लेलन्हि आ अलग स’ नाटकक निर्देशन करबाक भार तक उठा लेलाह । प्राय: सब रंगकर्मी के ई लोभ दैत रहलाह जे ओ मैथिली सिनेमामे कास्ट करताह । किशलय भाई द्वारा कयल गेल एहि असफल आयोजनक एक मात्र प्रभाव भेल जे सदस्य लोकनि मे व्यक्तिगत दूरी बढ़ि गेलन्हि, आपसी मतभेद आरो बढ़ि गेल । एहि युवा सदस्य लोकनि के हिनक योजनाक संज्ञान नहि भ’ सकलन्हि । भाई किशलय कृष्ण जी ठाठ स’ कृष्ण बनि पूजाय लगलाह । जे कोनो युवा रंगमंच स’ जुड़बाक लेल अबैत छलाह हुनका सबके बिच्चेमे रोकि सीरियल वा सिनेमाक झाँसा देब’ लगलाह । एहि कारण कतेको युवा अपन आर्थिक ह्रास के भुक्त भोगी भेलाह, कतेको धनवान व्यक्ति जे मैथिली नाटक लेल धन खर्च क’ र’ चाहैत छलाह ओ लोकनि टीवी सिरियल आ फिल्मक आभासी दुनिया दिस मोड़ि देल गेलाह । अलग अलग मिटिंग क’ र’ लगलाह । एक स’ एक विवाद ठाढ़ भेल । शनै:  शनै: लोक के हिनक मनसा बूझ’ मे आब’ लागल । मुदा, ता धरि बहुत देरी भ’ चुकल छल आपसी द्वन्द अपन चरम पर पहुँच गेल छल । मारि झगड़ा, फसाद, केसा – केसी तक करबौलन्हि ।  दिल्लीक सांस्कृतिक ओजस्विता हताशा दिस अग्रसर भ’ गेल । भाई किशलय कृष्ण जीक सतत प्रयास स’ संगठन टुटैत गेल, नव नव संगठन बनैत गेल । आब संगठन अपन अस्मिता के बचाब’ लेल अलग अलग विद्यापति पर्व समारोह क’ र’ लागल । प्राय: सब आयोजनमे किशलय बाबू संचालनक दायित्व सम्हार’ लगलाह । अपन वाक् पटुता स’ मात्र तीन स’ चारि सालमे दिल्लीक सब कोणमे अपना के स्थापित क’ लेलाह । मंच संचालन हेतु नीक मानदेय प्राप्त क’ र’ लगलाह, नवातूर के मंचक लोभ द’ क’ ओझराब’ लगलाह । दिल्लीमे भाई किशलय कृष्ण के त’ अपन चलि पड़लन्हि मुदा मैथिली सांस्कृतिक संस्था धीरे धीरे कमजोर होइत गेल, जे लोकन्हि काल्हि तक भैयारी जेना रहैत छलाह आब एक दोसराक शत्रु भ’ गेलाह, बात बात पर गारि फजिहत पर उतारू भ’ गेलाह । दिल्लीक सांस्कृतिक आयोजनक संख्या त’ गुणात्मक हिसाबे बढि गेल अछि, मुदा एकर संगठनात्मक स्थिति ठीक विपरित भ’ गेल अछि तकरा संज्ञान लेब जरूरी छैक । जे युवा लोकनि फ़िल्म आ टी.बी. लेल अपन अर्थ फँसेलन्हि ओ लोकन्हि आइयो किशलय भाई के डिबिया ल’ क’ गोपी बनि हेरि रहल छथि । मुदा; किशलय भाई त’ नामे स’ कृष्ण छथि, आई काल्हि कोनो नव रास रचब’ मे लागल छथि ।    

आब भाई प्रवीण नारायण चौधरी जीक दिल्ली कथा । अपन बेबाकीपन आ प्रतिउत्तरताक गुण स’ दिल्लीक फेसबुकिया युवामे चिर परिचित पीएनसी जी क नजरि दिल्ली पर छलन्हि । ओत्तुको युवा लोकन्हि अपना आयोजन में हिनका आमंत्रित केलन्हि । मुदा प्रवीण भाई जाहि संगठनमे अतिथि जेना आमंत्रित भेलाह ओकर संगठनात्मक समूहमे अपन दबंगई स’ हस्तक्षेप क’ र’ लगलाह । नेपालमे कार्यक्षेत्र होबाक बादो श्री चौधरी दिल्लीक विभिन्न आयोजनमे बुझू त’ महीनामे दू दू बेर अपन उपस्थिति दे ब’ लगलाह । संगठनमे हिनकर बेस हस्तक्षेपक कारण संगठन बँट’ लागल । प्रवीण भाई अपन योजनानुसार संगठनक मजबूत स्तम्भ (यानी आर्थिक सहयोग देनिहार) के धेलन्हि आ संगठनक कार्यकर्ता केँ दुत्कारि क’ भगबैत रहलाह । ई हरदम अपन गरम रूप अख्तियार केने रहलाह । सार्वजनिक रूपे आभासीय दुनिया पर अपशब्दक प्रयोगमे हिनका महारथ हाशिल छलन्हिये । दिल्लीक युवा हिनकर एहि रूपक उतारा नहि द’ पौलक फलत: किछु दिन अलग संगठन चलौलन्हि आ धीरे धीरे मिथिला मैथिलीए स’ अपना के दूर क’ लेलन्हि । मुदा एहि सब स’ प्रवीण भाई के कोनो फर्क पड़ै बला नहि छलन्हि । फेर नव संगठन स’ जूड़लाह ओकरा तोड़ेलाह । विगत पाँच सालमे निरंतर ई प्रक्रिया हिनकर चलैत रहलन्हि । दिल्लीमे हिनक प्रवेश कालमे लक्ष्य राजनीतीक छलन्हि मुदा धीरे धीरे ई अपन रंग बदल’ लगलाह । मिथिला राज्य निर्माण लेल की की नै केलाह... लक्ष्य मिथिला राज्य निर्माण कम संगठन के तोड़ब बेसी छल । संगठन तूटल कि प्रवीण भाई अपन राजनीतिक चदैरि उतारि सामाजिक ओढ़ना ओढि लेलाह । आब भाई मिथिला के दहेज मुक्त क’ र’ लगलाह... मिथिलामे सामाजिक चेतना लेल रथ पर सबार भ’ क’ भ्रमण क’ र’ लगलाह । अहू ठाम लक्ष्य संगठन के तोड़बे छल । सेह भेल संगठन टूटल कि अपन चद्दैर बदललाह आ अहि बेर मैथिली रंगमंचक विकास दिस अग्रसर भ’ गेलाह । दिल्लीक स्थापित रंग संस्था हिनका बेसी हस्तक्षेप करबाक अधिकार नहि दैत छल तेँ तमशा क’ दोसर दोसर ठामक रंग संगठन के उकसाब’ लगलाह । एत’ तक कि नेपाल – भारतक रंग सौहार्यताक संबंध के कठघरा मे ठाढ़ क’ देलाह । अहू ठाम लक्ष्य दू संगठनक बीच दूरी बढेनाई छल । से जखने पूरा भेल कि प्रवीण भाई एक बेर फेर अपन ओढ़नाक रंग बदलि लेलाह । एहि बेर हिनकर ओढ़नाक रंग मैथिली साहित्यिक विकास भ’ भेल । राता – राती ई आब ई बड़का साहित्यकार भ’ गेलाह । आशाराम बापू बनि एक स’ एक गुणी भाषण हिनका मुँह स’ निकल’ लागल । अहू ठाम हिनकर लक्ष्य पुरने जेना संगठन के तोड़ब छल, से भेबे कयल; एक्को साल नहि भेलहि कि संगठन टुटबाक पराकाष्ठा भ’ गेल । प्रवीण भाई अहू ठाम हुनके पक्षधर छलाह जे आर्थिक संबलता स’ परिपूर्ण छलथि । एहि बीच भाई साहेब अप्पन कतेको व्यक्तिगत गोटी दिल्ली मे फ़िट केलन्हि । बहुत फायदा एहन अछि जाहि स’ दोसरक भविष्य जूड़ल छैक तकर चर्च हम एहि ठाम नहि करब मुदा ओ सब काज राजनैतिक आ आर्थिक पहुँच के बिना दिल्ली मे संभव नहि छल से सबटा फायदा प्रवीण भाई नीक जेना उठेलन्हि । मिथिलाक मान थिक पाग से हमदम पहिरनाहर आदणीय प्रवीण भाई ककरो स’ बेसी मैथिली अपशब्दक प्रयोग केलथि अछि से सार्बजनिक रूपे । खैर ! आब भाई साहेब अपन चदैर फेर बदलन्हि । एहि बेर ई पत्रकारिताक ओढ़ना ओढलन्हि अछि । स्वयंभू बनि पत्रकारिता मे सेहो अपना के श्रेष्ठ घोषित क’ लेलन्हि । दिल्ली, कोलकाता, पटना, दरभंगा आदि शहर मे जे कोनो भाई बहीन लोकनि मैथिली नेट पत्रकारिता मे सालों स’ लागल छलाह तकरा सबके एक्के बेर तरैप सबस’ आगू अपना के ठाढ़ क’ लेबाक लौल मे लागि गेलाह । कुदि पड़लाह अखाड़ा मे मिथिला ज़िन्दाबाद ल’ क’ । अपन एहि नेट पत्रकारिता के माध्यमे उलहन उपराग सेहो देब’ लगलाह जे – “अहाँ अपन अपन समाचार हमरा अपने पठाबू, तखने हम एहि पर छापब ।” यानी नीक जेना पेड न्यूज के वकालत । एकटा टटका उदाहरण देखू जे 21 फरबरी क’ दिल्ली मे तीन ठाम मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य मे आयोजन भेल । दू टा त’ एहन जे एक्के बैनर यानी मैथिली साहित्य महासभा तर मे अलग अलग ठाम आयोजन भेल मुदा आदरणीय प्रवीण भाइयक मिथिला ज़िन्दाबाद मे एक्केटाक रीपोर्टिंग आयल । दोसर के मात्र चर्चा करैत ओकर आयोजक के नीक जेना आरोपित क’ देलाह, जखन कि ओ एहि दुनू आयोजन मे स्वयं उपस्थित नै रहथि । संयोग जे एहू संस्था मे किछु महीना पहिने तक प्रवीण भाई नीक जेना अपन पैठ बनेने छलाह । एक साल पहिलका आयोजनक तस्वीर देख लेल जाय । ओहू समय हम व्यक्तिगत रूपे दिल्लीक दूटा भाई स’ आग्रह केने रहियन्हि जे प्रवीण भाई अहूँ दुनू के तोड़ि देताह, मुदा ई दुनू गोटे हमर गप्प ताहि समय नहि मानलाह आ परिणाम मात्र एक साल मे आगू अछि । मतलब साफ अछि । अहू ठाम प्रवीण जी अपन गोटी फिट केने छथि । जाहि ठाम स’ दूरगामी व्यक्तिगत फायदा हेतन्हि तकरे दिस रहताह ।            

लगभग अपन जीवनक पाँच – छ: साल के लक्ष्य मे एहि दुनू सज्जनक सतत प्रयास स’ दिल्ली मे एक स’ बीस संस्थाक निर्माण भेल । धीरे धीरे सब संस्था मे दिबार जेना प्रवेश क’ कमजोर करैत दिल्ली स’ प्रस्थान केलाह अछि । आब हिनकर दोसर शहर लक्ष्य होयत जेना कानपुर, गुवाहाटी आ मुम्बई । अपन कुटिल बौद्धिकताक बल पर प्रवीण भाई आ किशलय भाई एना बनल रहलाह जेना हिनका लोकनि के कोनो जानकारी नहि छन्हि । एक बेर एहने शंका एकटा युवा साहित्यकार संग चर्च केलहु त’ हुनकर कथन रहन्हि - जे जखन कोनो शहर मे ई दुनू गोटॆ प्रवेश करैत छथि त’ ओहि शहर मे सांस्कृतिक / राजनीतिक बाढ़ि आबि जाइत छैक । सब यैह सोचैत छथि जे – “ ई लोकनि कनी आर पहिने किएक नहि अयलाह ?” मुदा किछु साल बाद ओही शहरक लोक सोचैत अछि जे – “ ई दुनू लोकनि एहि शहर मे किएक अयलाह ??? हिनकर आगमन स’ पहिनेक स्थिति नीक छल ।” यैह स्थिति एखन दिल्लीक भ’ गेल अछि ।

एहि ठाम दिल्लीक एकटा संस्थाक चर्च करब अति आवश्यक भ’ जाइत अछि जे अपन स्वायतता बनेने रहल आ एहि द्वय के हिलकोरा मे अपना के बचेने रहल । ओ अछि मिथिलांगनमिथिलांगनक कर्ता धर्ता लोकनि दिल्लीक एहि बिहाड़ि – बिड्ड़ो स’ अपना के फराक रखलन्हि आ आई अपन मजबूतीक मिशाल बनल छथि । एहन संगठनात्नक परिकल्पना के सलाम होबाक चाही ।

आब जखन कि दिल्ली नीक जेना अपना मे ओझरा गेल अछि, सब युवा लोकनि एक दोसरा के अपन विरोधीक नजरि स’ देख’ लगलाह अछि । दिल्ली मे मैथिलीक आन्दोलन एक बेर फेर कमजोर परि गेल अछि; ई दुनू व्यक्ति एक भ’ एहि शहर स’ निकलि चुकल छथि । किशलय भाईक नारा छल ‘जय मैथिली’ आ प्रवीण भाईक नारा छल ‘मिथिला जिन्दाबाद’। आब ई दुनू व्यक्ति एक भ’ गेलाह अछि तेँ हिनकर नारा सेहो आब समेकित भ’ गेलन्हि अछि । किशलय भाई अपन नारा मे स’ ‘मैथिली’ देलखिन्ह आ प्रवीण भाई अपन नारा मे स’ ‘जिन्दाबाद’ रखलाह । दुनू गोटॆ एक भेलाह त’ हिनकर नारा सेहो एक भेल । आब ई दुनू गोटॆ अहाँ सबहक सम्मुख छथि एक नारा संग “मैथिली जिन्दाबाद” । ई एखन जानकारी नहि अछि जे अगिला लक्ष्य हिनकर कोन शहर छन्हि । ओना कनी बिहंगम दृष्टि स’ रखला पर स्वयं जानकारी परिलक्षित भ’ जायत । अस्तु । एक बेर फेर क्षमा भाई प्रवीण नारायण चौधरी जी आ क्षमा भाई किशलय कृष्ण जी... । 

मुदा दिल्लीक सब युवा भाई लोकनि स’ नम्र निवेदन जे एक बेर फेर स’ एक भ’ जाउ, एना एक दोसरक विरोधी बनि अपन संबंलता के कमजोर नै करू । मिथिलाक प्रत्येक युवाक ओजस्विता, संगठनात्मकता आ कर्मठता अपूर्व छन्हि । आग्रह जे एक दोसर के एक बेर फेर स’ फोन करियौन्ह, एस.एम.एस. पठबियौन्ह, हाल चाल पुछियौन्ह, भेंट – घाँट करियौन्ह । एक दोसरा स’ बढ़ल दूरी कखनो ने कखनो अहूँ के कुहेसैत होयत । फूट डालो, शासन करो बला नीति के हमरा सब के अकानक चाही । संयोगे अछि जे सन् 1640 मे अजुके दिन (01 मार्च) ब्रिटेन के मद्रास मे व्यापार केन्द्र खोलबाक अनुमति भेटल छल, परिणाम की भेल से हम सब बुझैते छी । दिल्लीक मैथिली आन्दोलन के अस्ताञ्चल दिस अग्रसर किन्नहु नै होब’ देबाक चाही

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