मंगलवार, 16 सितंबर 2014

स्क्रीनिंग ऑफ मैथिली फिल्म ‘हाफ मर्डर’

पूर्वरंग :  
दूरभाष संवाद :
-    सर ! किछु अभिनेता / अभिनेत्री चाही फिल्म “हाफ मर्डर” के डॅबिंग करबाक अछि ।
-    जी ! जरूर... [ किछु रंगकर्मीक मो. नं. अग्रसारित भेल ]   
[ किछु दिन बाद ]
-    सर ! एकटा वरीष्ठ अभिनेता नहि आबि पाबि रहल छथि । हुनक आग्रह छनि जे हुनक आवाज अपने दितियै । तेँ आग्रह जे कनि टाइम निकालितहु डॅबिंग लेल ।
-    हम एहि सप्ताह शहर स’ बाहर छी, अपने अगिला सप्ताहक कोनो शनि वा रवि दिन राखू ।
[ किछु दिन बाब ]
-    सर ! आब अपने आबि गेल होयब, कनि टाइम द’ दितहुँ ]  
-    हाँ ! हम आबि गेल छी, शनि दिन ठीक छ: बजे हम अबैत छी ।
[ उचित पारिश्रमिक संग हम डबिंग भेल ]
[ कतेको मास बाद । फेर दूरभाष संवाद ]
-    सर ! फिल्म “हाफ मर्डर” तैयार भ’ गेल अछि । आब एकर स्कीनिंग राख’ चाहैत छी से अपने कोनो छोट छीन हॉल सुझबितहुँ ।
-    जी ! एहि लेल मण्डी हाउस मे त्रिवेणी हॉल नीक रहत या फेर लक्ष्मी नगर मे पी.एस.के. स’ गप्प करू ।


सीन 1 : फेसबुक मैसेज बॉक्स में भाई विभय जीक संवाद – साईंचरण इंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित मैथिली फ़िल्म "हाफ़ मर्डर" केर स्क्रीनिंग शो सोमवार 15 सितम्बर 2014 समय - दोपहर 2 बजे स 5 बजे तक स्थान - बासुकी ऑडिटोरियम एंड गायत्री हॉल, लोक कला मंच, लोधी रोड, साईं बाबा मंदिर के पीछे , नई दिल्ली- 110003  नई दिल्ली में राखल गेल अछि। जाहि मे अपने "अतिथि" के रूप में सादर आमंत्रित छी।


वाह ! मैथिली फिल्म के स्क्रीनिंग शो !!!

सीन 2 : युवा मैथिली कवि मनीष झा “बौआभाई” दहेज मुक्त मिथिलाक आयोजनमे 13 सितम्बर क’ भेटैत छथि ।
-    भाईजी ! 15 क’ फिल्म स्क्रीनिंग मे एबै ने ? हम ओहि आयोजनक संचालन करब ।
-    बहुत नीक गप्प । अहाँ के बधाई ! विभय बाबू आमंत्रण देने छथि’ मुदा सोम दिन छै, ऑफिस में व्यस्तता रहतै, तैयो हम कोशिश करब अयबाक ।


सीन 3 : [ मैलोरंग के अभिनेता मनोज पाण्डेय जीक फोन अबैत अछि ]
-    सर ! क’त’ छियै ? कखन पहुँचब एहि ठाम ?
-    क’ त’ यौ ?
-    फिल्म स्क्रीनिंग मे । हम आबि गेल छी । जानकारी भेटल अछि जे अहाँ आबि रहल छी ।
-    अहाँ पहुँच गेलहुँ । हमहूँ अबैत छी ।

शुरु होइत अछि मनीष झा ‘बौआभाई’क उद्घोषणा... आब फिल्म “हाफ मर्डर”... बीच मे अल्पविराम... फेर शेष भाग... आब समापन आ समीक्षा... मुख्य अतिथि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी श्री संजय कुमार झा जीक स्वागत... फेर मंच पर अभिनेता संजय सिंह जीक स्वागत । तेसर मे हमरा बजाओल गेल... आश्चर्य... [ एकर कोनो अनुमान नहि छल हमरा ] खैर... चढ़लहुँ मंच पर. खूब नीक लागल । आयोजक के बहुत बहुत आभार । 

 

आब आओल जाय “हाफ मर्डर” फिल्म पर...   

लगभग दू साल पहिने मधुबनीक स्थानीय आई.पी.एस. स्कूल स’ बालक – बालिका प्रेम प्रसंगवस स’ चुपचाप शहर छोड़ि भागि गेल छल । संयोग स’ ओहि समय कोनो बालकक सिर कटल लास सेहो प्रशासन के भेटल छल । किछु अज्ञानी पत्रकार आ भ्रष्ट राजनेता लोकनि एहि दुनू स्थिति 

के जोड़ि शहर मे हँगामा ठाढ़ क’ देलक । कतेको स्थान पर आगि लगाओल गेल, सम्पूर्ण शहर तहस – नहस भ’ गेल । एक – दूटा हत्या आर भ’ गेल । आदि आदि । एखनो ओहि काण्डक भोगी अरेर गामक कतेको युवा जहल मे छथि । अस्तु ।

अही काण्ड पर आधारित फिल्म अछि “हाफ मर्डर” । एखन एहि फिल्मक समीक्षा उचित नहि । फिल्मक प्रस्तुति आकर्षक अछि । पिछला कतेको मैथिली फिल्म जाहि मे तकनीकि पक्ष बहुत कमजोर रहैत अछि ताहि सब मे अपेक्षाकृत बेसी सुधार कयल गेल अछि । सिनेमाक सबल पक्ष अछि एकर संगीत । रविन्द्र जैन, मो. अज़ीज़, कुमार शानू, शान, कविता कृष्णमूर्ति, उदित नारायण झा, ज्ञानेश्वर दुबे, सुनील पवन जी आदिक गायन स’ भरल अछि ई फिल्म । संगीत निर्देशित केलाह अछि सुनील पवन जी । सिनेमा मैथिल दर्शक के अपना दिस आकर्षित करबाक सामर्थ रखैत अछि ।    एहि सिनेमाक निर्माता, निर्देशक रमानाथ झा आ सह- निर्माता आदित्य मिश्र जी छथि । एहि सम्पूर्ण टीम के हार्दिक बधाई । आगामी महीना ई फिल्म सम्पूर्ण मिथिला मे लागत । आगू एहि फिल्मक सब विन्दु पर चर्चा करब ।  


सोमवार, 11 अगस्त 2014

धन्यवाद ! हमर असंवेदनशील मैथिल साहित्यकार

जाहि समय मैथिली अकादेमी लेल दिल्ली मे हो हल्ला होइत छल, धरना प्रदर्शन होइत छल, तात्कालीन मैथिली भाषी लोकनि लाठी खाइत छलाह । ओहि समय तात्कालीक संस्था / संगठन के कर्ता धर्ता लोकनि तात्कालीन साहित्यकार लोकनि दिस स’ तिरस्कृत छलाह । दिल्लीक मे मैथिली भाषाक लौह पुरुष विजय चन्द्र झा अपन अपन जुझाड़ू संगीक संग दिल्लीक रने – बने भटकैत हेताह । दिल्ली मे रहनिहार हिनके उमरक मैथिली भाषी के कोन कोन कर्म क’ र’ पड़ल हेनहि से नहि जानि... । जे से ... लड़ि जगड़ि क’ अकादेमी बनल । अस्तु...

आई मैथिली – भोजपूरी अकादेमी, दिल्ली बनि गेल । जे लोकनि तात्कालीन आन्दोलन पर हँसैत रहलाह आई ओकरे परिणति अकादेमी मे सादर आमंत्रित होइत छथि, सुन्दर वातानुकूलित प्रेक्षागृह मे अप्पन अप्पन विद्वता बघारैत छथि, एहि अकादेमीक भरोसे ए.सी. ट्रेन स’ यात्रा करैत छथि, दिल्ली मे रिक्सा पर नहि चलि पौनिहार हमर साहित्यकार अकादेमीक गाड़ी मे विचरन करैत छथि, अकादेमीक होटल मे चिकेन आ सुराक आनंद उठबैत छथि । मुदा आजुक समय मे दिल्ली मे चलि रहल मैथिली आन्दोलनक कोनो कान पात नै दैत छथि । चाहे जे कोनो मैथिल संस्था, मैथिल युवा आई दिल्ली मे कोनो प्रकारक संघर्ष क’ रहलाह अछि निश्चित रूपे ओकर परिणति आजुक पीढ़ी नहि देख सकै मुदा अगिला पीढ़ी जरूर देखत आ इहो सत्य जे परम्परानुसार ओकर लाभ आजुक साहित्यकार लोकनि वा हिनके धिया पुता उठौताह ।
काल्हि दिल्ली क मैथिली अकादेमीक आमंत्रण पर 10-15 टा तथाकथित साहित्यकार दिल्लीक पहाड़गंज होटल मे उपस्थित छलाह । हिनक होटल स’ मात्र 3 किलो मीटर पर दिल्लीक सैकड़ो युवा दिन भरि मिथिला राज्यक माँग लेल धरना प्रदर्शन क’ रहल छलाह । मुदा मैथिल साहित्यकार सँझुका आयोजन मे जयबाक लेल अपन अपन वियहुआ कुर्ताक क्रीच सरिया रहल छलाह । छी... छी...


आई मैथिली – भोजपुरी अकादेमी स’ भोजपुरी के अलग करबाक हल्ला करबाक जिम्मा दिल्लीक युवाक कान्ह पर थोपनिहार हमर साहित्यकार एही अकादेमीक किरानीक चमचागेरी मे लागल छथि मुदा मैथिल युवाक संग ठार नहि होब’ चाहैत छथि । फेर आबथु दिल्लीक विजय बाबू, गंगेश गुंजन, परमेशर जी, राम अषीश कर्ण, जगत पासवान आदि । फेर आबथु अखिल भारतीय मिथिला संघ, मिथिलांगन, मिथिला राज्य निर्माण सेना, निथिला विकास परिषद, मैथिली लोक रंग । मुदा हमर साहित्यकार होटल मे बसि क’ वर्तमान आन्दोलन के समीक्षा करताह, पान खा क’ वर्तमान युवा के दुत्कारताह आ अकादेमीक निमंत्रण पत्र के जेबी मे सरिया क’ रखताह ।.... जै हो हमर मिथिला आ हमर संवेदनशील साहित्यकार.... ।        

बुधवार, 4 जून 2014

वर्तमान मैथिली सिनेमा [ अभिनेता ललितेश जी आ जितेन्द्र नाथ जीतूक बहन्ने ]

[ किछु दिन पहिने भाई जितेन्द्र नाथ जीतूक एकटा आलेख [ दर्शक दोषी नहि अछि : ललितेश ] पढ़बाक अवसर भेटल । आलेख के अभिनेता ललितेश जी स’ बातचीत क’ क’ तैयार कयल गेल छल । ई आलेख मैथिली सिनेमा पर समकालीन स्थितिक उचित पड़ताल करैत अछि । जहिना जितेन्द्र जी बेबाक प्रश्न केलाह अछि तहिना निष्पक्ष भाव स’ अभिनेता ललितेश जी उत्तर देलाह अछि । एहि वार्तालाप स’ मैथिली फ़िल्मक दिशाक सेहो निर्धारित कयल जा सकैत अछि आ वर्तमान दशा स’ सेहो साक्षात्कार कयल जा सकैत अछि । ई आलेख एक बेर फेर मैथिली फिल्म पर किछु विचार विमर्श करबाक लेल प्रेरित केलक अछि । ]
  
विगत कतेको साल स’ मैथिली सिनेमा जोर पकड़ने अछि । कतेको बेर कतेको तरहक नीक – बेजाय सूचना सेहो भेटैत अछि । साल भरि मे कतेको फिल्मक योजनाक सूचना बनैत – बिगड़ैत अछि । ताहि मे स’ किछु के मुहुर्त होइत अछि । ओहि मे स’ किछु के शूटिंग सेहो होइत अछि । तकरा बाद किछु के शूटिंग पूर्ण होइत अछि । ओहि मे स’ किछु बनिक’ तैयार होइत अछि । आब एहि कतेको किछु मे तीन चारिटा फिल्म सिलवर पटल पर पहुँचैत अछि । अपन तकनीकी दरिद्रताक कारण एक स’ दूटा फिल्म दू – तीन वा कि एक सप्ताह अपना के तीर क’ ल’ जेबा मे समर्थ भ’ पबैत अछि । अस्तु ...

भाई जितेन्द्र जीक आलेख मे मैथिली सुपरिचित फिल्म सस्ता जिनगी महग सिनुरक चर्च भेल अछि । सिनेमा होल मे एहि फिल्म के लगबाक बाद शहर मे केहन स्थिति उत्पन्न भेल छल आ दर्शकक आकर्षण केहन छल तकर खूब सुन्दर चित्रण कयल गेल अछि । ओहन स्थितिक कल्पना करब आजुक समय मे दुर्लभ बुझना जाइत अछि एकर कारण ताकब आवश्यक भ’ गेल अछि । जहिया ममता गाबय गीत बनि सिनेमा हॉल मे लागल छल आइयो जखन एहि फिल्मक गीत सुनैत छी त’ मोन प्रफ्फुल्लित भ’ जाइत अछि मुदा एहि फिल्मक असफलता मैथिली फिल्म इंड्रस्ट्री के कोना प्रभावित केलक से जानि अत्यंत आशचर्य भेल । सर ललितेश जी के धन्यवाद जे बेबाकी स’ एहि के स्वीकारलन्हि अछि ।  

भाई ललितेश जीक कथन छन्हि जे “प्राय: फिल्म निर्माण काल मे आपसी मतभेद भ’ जाइत अछि जकर सीधा प्रभाव फिल्म पर पड़ैत छैक” । एहि बीच कतेको फिल्मक निर्माण भेल अछि । नाम लेनाई उचित नहि मुदा बेर बेर यैह सुनबा मे आयल जे फिल्म शूटिंग के बीच मे आपसी रंजिश भ’ गेल । ई रंजिश चाहे निर्माता लोकनिक बीच हुए आकि निर्माता निर्देशक के बीच हुए आकि निर्देशक अभिनेताक बीच हुए मुदा घातक त’ अछिए, मैथिली फिल्म लेल ताहि स’ मुँह त’ नुकाओल नहि जा सकैत अछि ।

उपर्युक्त आलेख मे एकटा गप्प आरो अभरि क’ आगू आयल अछि जे सस्ता जिनगी महग सिनुर के निर्देशक श्री मुरलीधर जी स’ आग्रह कयल गेल रहन्हि जे अहाँ अपना सिनेमा जकरा अहाँ निर्देशित करैत छी ताहि मे अपनहि अभिनय नै करू । मुदा ओ नै मानलाह । यैह आपसी क्लेशक मूल कारण छल । ओना ई गप्प सत्य हुए वा नहि मुदा प्राय: हम देखलहुँ अछि जे निर्माता / निर्देशक जाहि मैथिली सिनेमा के बनैत छथि ओहि मे अपनहु मुख्य किरदार अयबाक मोह स’ बंचित नै रहि पबैत छथि । एहि मादे जखन कखनो हिनका लोकनि स’ गप्पो भेल त’ हिनक सबहक तर्क रहैत छन्हि जे “हम त’ बाल्ये काल स’ नाटक खेलाइत रही । ओ त’ जीवन यापन करबाक लेल दोसर धन्धा मे लागि गेलहुँ “आ तें ओ अपना के सिनेमाक अभिनय मे बिलकुल फिट बुझि लैत छथि । ओहिना जेना एखनहु गाम मे बेसी चन्दा देनिहार के क्रिकेटक कप्तान बना देल जाइत छन्हि । सिनेमा जतबे कठिन विधा अछि अपन पाइयक बले ई लोकनि ओतबे हल्लुक बना दैत छथि । तकर परिणाम की होइत अछि से आई हम अहाँ भोगि रहल छी । आ एहि परिणामक दोषो हमरे लोकन्हि पर मढ़ि देल जाइत अछि जे दर्शक देखबे नै करैत छथि मैथिली सिनेमा ।

मैथिली सिनेमा के स्थापित नहि हेबाक कारण एकटा इहो अछि जे सिनेमा बनेनिहार चाहे मैथिल होथि वा कोनो दोसरो भाषाक व्यक्ति । मूल रूप स’ हुनकर ई एकटा व्यवसाय होइत छन्हि । अपन सिनेमा के ओ लोकन्हि एकटा प्रोडक्ट के रूप मे देखैत छथि । मुदा, मैथिली मे सिनेमा बनौनिहार लोकन्हि प्राय; एकर ठीक विपरित सोच स’ आगू अयलाह अछि । प्राय: निर्माताक मोन ई रहैत छन्हि जे एक्के बेर मे बेसी स’ बेसी मैथिल हमरा व्यक्तिगत रूपे जनथि, हमर समाज मे प्रतिष्ठा (धनक आधारपर) हुए । तेँ ओ लोकन्हि पाँच – दस लाख रुपैया खर्च करैत छथि ( जखन कि एकटा नाटक करबा मे आब तीन स’ चारि लाख टाकाक खर्च अबैत अछि ), अपने स्वयं सिनेमाक सौसे पर्दा पर सजि धजि क’ उपस्थित रहैत छथि । अपना हिसाबे तथाकथित निर्देशक के ‘सजेशन’ दैत रहैत छथि । अपना पसन्द के महिला कलाकार के चुनाव करैत छथि । पुरुष पात्र मे अपन समसोची संगी साथी, लगुआ भगुआ के राखि लैत छथि । एक दू महीना खूब जमि क’ शूटिंग चलैत अछि । खूब मस्ती होइत छैक । तरह – तरह के कथा सब निकलि क’ बाहर अबैत रहैत अछि । जे कियो मनोनुकूल कार्य नै केलाह वा केलीह हुनका बिच्चहि मे घरक रस्ता देखा देल जाइत अछि चाहे ओ फिल्मक निर्देशके किएक ने होथि । अभिनेत्री / अभिनेताक कथे कोन ।

मैथिलीक सिनेमा एखनो तक नीक कथ्य के ल’ क’ आगू नहि बढ़ि सकल अछि । जिनका लग नीक कथ्य छन्हि हुनक प्रस्तुति सालों स’ ओरियाने मे लागल अछि । आ जहिया बनि क’ आओत ता धरि ओहो पुरान भ’ जाएत ।  एहना स्थिति मे दर्शक के कतेक दोष देल जाय ?  एहि ठाम हम ललितेश जीक विचार राख’ चाहब – “ सब बनायल ट्रेड पर काज करताह आ रिकबरीक बहाना बनेताह । अहाँ दर्शक के पास नीक सिनेमा बनाक’ आबू त’ । फूसिये दर्शक पर आरोप नै लगाबू ।” – ई कथन अक्षरस; सत्य अछि ।

एहि बीच मैथिली सिनेमा स’ जूड़ल आरो कतेको व्यक्ति स’ गप्प होइत रहल अछि । कतेको सिनेमा के डबिंग / एडिटिंग / शूटिंग के देखबाक, करबाक मौका भेटल अछि । तेहन तेहन अनुभव अछि जे हास्यास्पद, अशोभनीय आ हतोत्साहित करै बला लागत । एहन संस्मरण आगू जरूर शेयर करब । तैयो मैथिली सिनेमा बनेनिहार स’ हाथ जोड़ि निवेदन जे अपन कंसेप्ट साप क’ क’ एहि विधा के आगू बढ़ाबथि । किछु गोटे सार्थक प्रयास क’ रहलाह अछि मुदा ततेक संख्या मे स्वलोलूप लोकन्हि फड़ि गेल छथि जे सार्थक लोकनिक गिनती हेरा जेना गेल अछि ।      
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सोमवार, 10 मार्च 2014

फागुन महीना रंग बरसे : एम.एल.आर मीडिया प्रा. लि. क पहिल एल्वम 


फागुन महीना रंग बरसे सीडीक आवरण 
5 मार्च, 2014 क’ राजधानी पटना में रिलीज भेल मैथिली, हिन्दी आ भोजपुरी होली गीतक एल्वम फागुन महीना रंग बरसे । एकर गीत आ संगीत दीपक ठाकुरक छनि आ मुख्य स्वर राजीव रंजन झा, पवन नारायण आ सुश्री सत्या मिश्रा देने छथि । हिमांशु एस. झा आ साउण्ड वेव्स द्वारा प्रस्तुत मैथिली, हिन्दी आ भोजपुरी के 6 टा गीत स’ सजल ई एल्वम बाज़ार मे उपलब्ध अछि ।एल्वम रिलीजक अवसर पर सुप्रसिद्ध रंगकर्मी प्रेमलता मिश्र ‘प्रेम’, श्री कुणाल, श्री कमल मोहन चुन्नु, श्री प्रकाश झा, श्री अनिल मिश्रा, श्री बटुक भाई, श्री किशोर केशव, श्री मुकेश झा, पत्रकार सुनील कुमार झा आदि लोकन्हि उपस्थित छलाह । एत्तेक मैथिली साहित्यिक आ सांस्कृतिक महत्वपूर्ण हस्ताक्षक उपस्थिति मे एल्वम के लोकार्पण मैथिलीक पहिल घटना अछि । एहि अवसर पर राजीव रंजन झा आ सत्या मिश्रा एल्वमक गीत गाबि दर्शक के आनन्दित केलाह ।  आजुक समय मे जखन कि होलीक नाम पर एक स' एक अश्लिल गीतक भरमार भ' जाइत अछि, भोजपुरी गीत सामाजिक संबंध के धज्जी उड़बैत अछि एहना समय मे फागुन महीना रंग बरसे मोन मे होलीक गुदगुद्दी उत्पन्न करैत अछि । 

फागुन महीना रंग बरसे के लोकार्पित करैत अग्रज लोकन्हि 
युवा गायक राजीव रंजन अपन परीश्रम स' आजुक युवा पीढ़ी मे स्थापित नाम भ' चुकल छथि । दीपक ठाकुर अपन लेखनी आ संगीत संयोजन स' निरंतर विस्तार पाबि रहल छथि । एहि दुनू युवा जोड़ीक मैथिली संगीत जगत मे पदार्पण नव दिशा द' रहल अछि । हिनका लोकनिक रचना प्रक्रिया आ मैथिली संस्कारक प्रति अनुराग निश्चित रूपे मैलोरंग सन समृद्ध रंगमंडलक सांस्कृतिक वातावरणक परिणति अछि । मैलोरंग के सेहो अपन अहि युवा पीढ़ी पर गर्व होइत अछि । फागुन महीना रंग बरसे मे मैलोरंग युवा अभिनेत्री सत्या मिश्राक आवाज़ सेहो अहाँ के मोहित करत । सुश्री सत्याक ई आवाज़ मैथिली संगीत मे अपन अलग स्थान बनाओत ई परिलक्षित होइत अछि । मैथिली संगीत जगतक स्थापित नाम भाई पवन नारयण द्वारा हमर मैलोरंगक प्रति सहृदय भावक हम सब आभारी छी । अपन अवाज़ एहि युवाक संग द' अपना लेल हमरा लोकनिक हृदय मे अपन स्थान आरो मजबूत केलाह अछि । मैलोरंगक अप्पन स्टूडियो एम.एल.आर मीडिया प्रा. लि. द्वारा पहिल पुष्पक लेल राजीव मिश्रा आ मुकेश झा के हार्दिक बधाई । राजीव मिश्राक प्रलेखण सेहो समुचित छन्हि से देखार भ' रहल अछि । मैथिल समाज स' आग्रह जे एहि एल्वम के जरूर सूनी आ अपन विचार स' एहि युवा जोड़ीक उत्साहवर्धन करी ।