जाहि समय मैथिली अकादेमी लेल दिल्ली मे हो हल्ला होइत छल, धरना
प्रदर्शन होइत छल, तात्कालीन मैथिली भाषी लोकनि लाठी खाइत छलाह । ओहि समय तात्कालीक
संस्था / संगठन के कर्ता धर्ता लोकनि तात्कालीन साहित्यकार लोकनि दिस स’ तिरस्कृत
छलाह । दिल्लीक मे मैथिली भाषाक लौह पुरुष विजय चन्द्र झा अपन अपन जुझाड़ू संगीक
संग दिल्लीक रने – बने भटकैत हेताह । दिल्ली मे रहनिहार हिनके उमरक मैथिली भाषी के
कोन कोन कर्म क’ र’ पड़ल हेनहि से नहि जानि... । जे से ... लड़ि जगड़ि क’ अकादेमी बनल
। अस्तु...
आई मैथिली – भोजपूरी अकादेमी, दिल्ली बनि गेल । जे लोकनि तात्कालीन
आन्दोलन पर हँसैत रहलाह आई ओकरे परिणति अकादेमी मे सादर आमंत्रित होइत छथि, सुन्दर
वातानुकूलित प्रेक्षागृह मे अप्पन अप्पन विद्वता बघारैत छथि, एहि अकादेमीक भरोसे
ए.सी. ट्रेन स’ यात्रा करैत छथि, दिल्ली मे रिक्सा पर नहि चलि पौनिहार हमर
साहित्यकार अकादेमीक गाड़ी मे विचरन करैत छथि, अकादेमीक होटल मे चिकेन आ सुराक आनंद
उठबैत छथि । मुदा आजुक समय मे दिल्ली मे चलि रहल मैथिली आन्दोलनक कोनो कान पात नै
दैत छथि । चाहे जे कोनो मैथिल संस्था, मैथिल युवा आई दिल्ली मे कोनो प्रकारक
संघर्ष क’ रहलाह अछि निश्चित रूपे ओकर परिणति आजुक पीढ़ी नहि देख सकै मुदा अगिला
पीढ़ी जरूर देखत आ इहो सत्य जे परम्परानुसार ओकर लाभ आजुक साहित्यकार लोकनि वा
हिनके धिया पुता उठौताह ।
काल्हि दिल्ली क मैथिली अकादेमीक आमंत्रण पर 10-15 टा तथाकथित
साहित्यकार दिल्लीक पहाड़गंज होटल मे उपस्थित छलाह । हिनक होटल स’ मात्र 3 किलो
मीटर पर दिल्लीक सैकड़ो युवा दिन भरि मिथिला राज्यक माँग लेल धरना प्रदर्शन क’ रहल
छलाह । मुदा मैथिल साहित्यकार सँझुका आयोजन मे जयबाक लेल अपन अपन वियहुआ कुर्ताक
क्रीच सरिया रहल छलाह । छी... छी...
आई मैथिली – भोजपुरी अकादेमी स’ भोजपुरी के अलग करबाक हल्ला करबाक
जिम्मा दिल्लीक युवाक कान्ह पर थोपनिहार हमर साहित्यकार एही अकादेमीक किरानीक
चमचागेरी मे लागल छथि मुदा मैथिल युवाक संग ठार नहि होब’ चाहैत छथि । फेर आबथु दिल्लीक
विजय बाबू, गंगेश गुंजन, परमेशर जी, राम अषीश कर्ण, जगत पासवान आदि । फेर आबथु
अखिल भारतीय मिथिला संघ, मिथिलांगन, मिथिला राज्य निर्माण सेना, निथिला विकास
परिषद, मैथिली लोक रंग । मुदा हमर साहित्यकार होटल मे बसि क’ वर्तमान आन्दोलन के
समीक्षा करताह, पान खा क’ वर्तमान युवा के दुत्कारताह आ अकादेमीक निमंत्रण पत्र के
जेबी मे सरिया क’ रखताह ।.... जै हो हमर मिथिला आ हमर संवेदनशील साहित्यकार.... ।