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| कैटलॉग मे स' लेल गेल चित्र |
रंगपूर्वी
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13 नाम स’ मैथिली –
भोजपुरी अकादेमी, दिल्ली सात दिवसीय राष्ट्रीय कला प्रदर्शनीक आयोजन केलक अछि ।
आयोजन ललित कला अकादेमीक, कला प्रदर्शनी हाँल मे लागल अछि । इहो कहि दी जे ई स्थान
रवीन्द्र भवन, कॉपरनिकस मार्ग, मण्डी हाउस, नई दिल्ली –
01 पर स्थित अछि । एहै कला प्रदर्शनी मे
कुल 45 गोट वरीष्ठ आ कनिष्ठ कला सृजक अपन कलाक प्रदर्शन लगेने छथि । पद्मश्री
जगदम्बा देवीक कृति कहार संग शशिकला देवीक गाछ सेहो देखबाक लेल भेटत
। स्वर्गीय यमुना देवीक कृत्ति (भरनी रूपमे), स्व. चानो देवीक चित्र (गोदना रूपमे),
बौआ देवीक चित्र सेहो लगाओल गेल अछि ।
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| प्रदर्शनीमे लागल चित्र [कैमरा स'] |
कलाक एहि
राष्ट्रीय प्रदर्शनी मे युवा कलाकारक उत्साह देखि क’ भविष्यक आस
प्रस्फुटित होइत अछि । युवा कलाकार मुरारीक कृत्ति देख क’
लगैत अछि जे ई युवा उम्र मे युवा जरूर छथि मुदा अपन कला सर्जना मे परिपक्व छथि ।
एहि युवाक उत्साह बढ़ेबाक लेल सचिन्द्रनाथ सन स्थापित कलाकार सेहो अपन कलाकृत्तिक
संग आगू आयल छथि । युवा मालविका राज, ध्रुव कुमार, प्रेरणा झाक चित्र आकर्षित करैत
अछि ।
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| युवा कलाकार मुरारीक कलाकृत्ति [कैमरा स'] |
एहि कला
प्रदर्शनी के देखि वरीष्ठ कला समीक्षक विनोद भारद्वाजक कहब छनि :
“तथाकथित
लोककला और समकालीन कला में सार्थक संवाद जरूरी है और रंगपूर्वी इस दिशा में
एक सुन्दर कोशिश है । मिसाल के लिए मधुबनी कला को एक ओर बचाये –
बनाये रखने का महत्व है, दूसरी ओर इस प्रदेश की युवा अभिव्यक्ति को समकालीन मान
लेने में भी कोई हर्ज नहीं है ।” -
विनोद भारद्वाज
वरीष्ठ चित्रकार
श्याम शर्मा एक मात्र काष्ठ छापा चित्रकार छथि । हिनकर कृत्ति सेहो लागल अछि ।
चित्रकार अनिल सिन्हा, मिलन दासबी. के. जैम, पांडेय राजीव नयन, राजेंन्द्र प्रसाद
संग संगीता गुप्ता, वंडना श्रीवास्तव कला दीर्घा मे अपन सशक्त उपस्थित देने छथि ।
बिहारक मजबुत हस्ताक्षर नरेन्द्र पाल सिंह, मनोज बच्चन, रविन्द्र दास, विपिन शर्मा
आदिक कला देखबा लेल राखल अछि ।
दिल्ली मे एहन तरहक आयोजन त’
होइते रहैत अछि मुदा सम्पूर्ण आयोजन में पूरब के रंग स’
सजनाई दोसर आयोजन स’ एकरा फराक करैत अछि ।
कला समीक्षक
रवीन्द्र त्रिपाठीक कहब छनि :
“भारत एक
विशाल देश बा और एकर में नाना परकार के कला रूझान बाटे । जवन –
जवन इलाके के कला के चरचा कम होइलक या ना होइलक, ओकरा मतलब इ ना बा कि उहाँ के
कलाकार के या कला के महत्त्व कम ह गइल । हाँ, उनकर चर्चा कम होखेला जेकरा कारण कुछ
लोगन के समझ बन जाला कि इ इलाका में बढ़ि कलाकार हइए नइखन । लेकिन का इ बात से
इनकार किया जा सकेला कि मधुबनी कला के बिना जाज के भारतीय कला पर पूरा बात हो
सकेला ?”
- रवीन्द्र त्रिपाठी.
मधुबनी चित्रकला मे युवा पीढ़ी खूब
प्रयोग क’
रहल छथि । अपन परम्परा स’ आगू बढ़ि क’
नव नव प्रयोग क’
रहल छथि । आइ हिनका लोकनिक पेंटिंग मे समकालीन कथाक अनुगुंज देखना जाइत अछि । हमर
युवा प्रतिभाक सम्मान आवश्यक अछि ।
- प्रकाश झा
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