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किछु दिन पहिने भाई जितेन्द्र नाथ जीतूक एकटा आलेख [ दर्शक दोषी नहि अछि : ललितेश
] पढ़बाक अवसर भेटल । आलेख के अभिनेता ललितेश जी स’ बातचीत क’ क’ तैयार कयल गेल छल
। ई आलेख मैथिली सिनेमा पर समकालीन स्थितिक उचित पड़ताल करैत अछि । जहिना जितेन्द्र
जी बेबाक प्रश्न केलाह अछि तहिना निष्पक्ष भाव स’ अभिनेता ललितेश जी उत्तर देलाह
अछि । एहि वार्तालाप स’ मैथिली फ़िल्मक दिशाक सेहो निर्धारित कयल जा सकैत अछि आ
वर्तमान दशा स’ सेहो साक्षात्कार कयल जा सकैत अछि । ई आलेख एक बेर फेर मैथिली
फिल्म पर किछु विचार विमर्श करबाक लेल प्रेरित केलक अछि । ]
विगत
कतेको साल स’ मैथिली सिनेमा जोर पकड़ने अछि । कतेको बेर कतेको तरहक नीक – बेजाय
सूचना सेहो भेटैत अछि । साल भरि मे कतेको फिल्मक योजनाक सूचना बनैत – बिगड़ैत अछि ।
ताहि मे स’ किछु के मुहुर्त होइत अछि । ओहि मे स’ किछु के शूटिंग सेहो होइत अछि । तकरा
बाद किछु के शूटिंग पूर्ण होइत अछि । ओहि मे स’ किछु बनिक’ तैयार होइत अछि । आब
एहि कतेको किछु मे तीन चारिटा फिल्म सिलवर पटल पर पहुँचैत अछि । अपन तकनीकी
दरिद्रताक कारण एक स’ दूटा फिल्म दू – तीन वा कि एक सप्ताह अपना के तीर क’ ल’ जेबा
मे समर्थ भ’ पबैत अछि । अस्तु ...
भाई
जितेन्द्र जीक आलेख मे मैथिली सुपरिचित फिल्म सस्ता जिनगी महग सिनुरक चर्च
भेल अछि । सिनेमा होल मे एहि फिल्म के लगबाक बाद शहर मे केहन स्थिति उत्पन्न भेल
छल आ दर्शकक आकर्षण केहन छल तकर खूब सुन्दर चित्रण कयल गेल अछि । ओहन स्थितिक
कल्पना करब आजुक समय मे दुर्लभ बुझना जाइत अछि एकर कारण ताकब आवश्यक भ’ गेल अछि ।
जहिया ममता गाबय गीत बनि सिनेमा हॉल मे लागल छल आइयो जखन एहि फिल्मक गीत सुनैत छी
त’ मोन प्रफ्फुल्लित भ’ जाइत अछि मुदा एहि फिल्मक असफलता मैथिली फिल्म इंड्रस्ट्री
के कोना प्रभावित केलक से जानि अत्यंत आशचर्य भेल । सर ललितेश जी के धन्यवाद जे
बेबाकी स’ एहि के स्वीकारलन्हि अछि ।
भाई
ललितेश जीक कथन छन्हि जे “प्राय: फिल्म निर्माण काल मे आपसी मतभेद भ’ जाइत अछि जकर
सीधा प्रभाव फिल्म पर पड़ैत छैक” । एहि बीच कतेको फिल्मक निर्माण भेल अछि । नाम
लेनाई उचित नहि मुदा बेर बेर यैह सुनबा मे आयल जे फिल्म शूटिंग के बीच मे आपसी
रंजिश भ’ गेल । ई रंजिश चाहे निर्माता लोकनिक बीच हुए आकि निर्माता निर्देशक के
बीच हुए आकि निर्देशक अभिनेताक बीच हुए मुदा घातक त’ अछिए, मैथिली फिल्म लेल ताहि
स’ मुँह त’ नुकाओल नहि जा सकैत अछि ।
उपर्युक्त
आलेख मे एकटा गप्प आरो अभरि क’ आगू आयल अछि जे सस्ता जिनगी महग सिनुर के
निर्देशक श्री मुरलीधर जी स’ आग्रह कयल गेल रहन्हि जे अहाँ अपना सिनेमा जकरा अहाँ
निर्देशित करैत छी ताहि मे अपनहि अभिनय नै करू । मुदा ओ नै मानलाह । यैह आपसी
क्लेशक मूल कारण छल । ओना ई गप्प सत्य हुए वा नहि मुदा प्राय: हम देखलहुँ अछि जे
निर्माता / निर्देशक जाहि मैथिली सिनेमा के बनैत छथि ओहि मे अपनहु मुख्य किरदार
अयबाक मोह स’ बंचित नै रहि पबैत छथि । एहि मादे जखन कखनो हिनका लोकनि स’ गप्पो भेल
त’ हिनक सबहक तर्क रहैत छन्हि जे “हम त’ बाल्ये काल स’ नाटक खेलाइत रही । ओ त’
जीवन यापन करबाक लेल दोसर धन्धा मे लागि गेलहुँ “आ तें ओ अपना के सिनेमाक अभिनय मे
बिलकुल फिट बुझि लैत छथि । ओहिना जेना एखनहु गाम मे बेसी चन्दा देनिहार के
क्रिकेटक कप्तान बना देल जाइत छन्हि । सिनेमा जतबे कठिन विधा अछि अपन पाइयक बले ई
लोकनि ओतबे हल्लुक बना दैत छथि । तकर परिणाम की होइत अछि से आई हम अहाँ भोगि रहल
छी । आ एहि परिणामक दोषो हमरे लोकन्हि पर मढ़ि देल जाइत अछि जे दर्शक देखबे नै करैत
छथि मैथिली सिनेमा ।
मैथिली
सिनेमा के स्थापित नहि हेबाक कारण एकटा इहो अछि जे सिनेमा बनेनिहार चाहे मैथिल
होथि वा कोनो दोसरो भाषाक व्यक्ति । मूल रूप स’ हुनकर ई एकटा व्यवसाय होइत छन्हि ।
अपन सिनेमा के ओ लोकन्हि एकटा प्रोडक्ट के रूप मे देखैत छथि । मुदा, मैथिली मे
सिनेमा बनौनिहार लोकन्हि प्राय; एकर ठीक विपरित सोच स’ आगू अयलाह अछि । प्राय:
निर्माताक मोन ई रहैत छन्हि जे एक्के बेर मे बेसी स’ बेसी मैथिल हमरा व्यक्तिगत
रूपे जनथि, हमर समाज मे प्रतिष्ठा (धनक आधारपर) हुए । तेँ ओ लोकन्हि पाँच – दस लाख
रुपैया खर्च करैत छथि ( जखन कि एकटा नाटक करबा मे आब तीन स’ चारि लाख टाकाक खर्च
अबैत अछि ), अपने स्वयं सिनेमाक सौसे पर्दा पर सजि धजि क’ उपस्थित रहैत छथि । अपना
हिसाबे तथाकथित निर्देशक के ‘सजेशन’ दैत रहैत छथि । अपना पसन्द के महिला कलाकार के
चुनाव करैत छथि । पुरुष पात्र मे अपन समसोची संगी साथी, लगुआ भगुआ के राखि लैत छथि
। एक दू महीना खूब जमि क’ शूटिंग चलैत अछि । खूब मस्ती होइत छैक । तरह – तरह के
कथा सब निकलि क’ बाहर अबैत रहैत अछि । जे कियो मनोनुकूल कार्य नै केलाह वा केलीह
हुनका बिच्चहि मे घरक रस्ता देखा देल जाइत अछि चाहे ओ फिल्मक निर्देशके किएक ने
होथि । अभिनेत्री / अभिनेताक कथे कोन ।
मैथिलीक
सिनेमा एखनो तक नीक कथ्य के ल’ क’ आगू नहि बढ़ि सकल अछि । जिनका लग नीक कथ्य छन्हि
हुनक प्रस्तुति सालों स’ ओरियाने मे लागल अछि । आ जहिया बनि क’ आओत ता धरि ओहो
पुरान भ’ जाएत । एहना स्थिति मे दर्शक के
कतेक दोष देल जाय ? एहि ठाम हम ललितेश जीक
विचार राख’ चाहब – “ सब बनायल ट्रेड पर काज करताह आ रिकबरीक बहाना बनेताह । अहाँ
दर्शक के पास नीक सिनेमा बनाक’ आबू त’ । फूसिये दर्शक पर आरोप नै लगाबू ।” – ई कथन
अक्षरस; सत्य अछि ।
एहि
बीच मैथिली सिनेमा स’ जूड़ल आरो कतेको व्यक्ति स’ गप्प होइत रहल अछि । कतेको सिनेमा
के डबिंग / एडिटिंग / शूटिंग के देखबाक, करबाक मौका भेटल अछि । तेहन तेहन अनुभव
अछि जे हास्यास्पद, अशोभनीय आ हतोत्साहित करै बला लागत । एहन संस्मरण आगू जरूर
शेयर करब । तैयो मैथिली सिनेमा बनेनिहार स’ हाथ जोड़ि निवेदन जे अपन कंसेप्ट साप क’
क’ एहि विधा के आगू बढ़ाबथि । किछु गोटे सार्थक प्रयास क’ रहलाह अछि मुदा ततेक
संख्या मे स्वलोलूप लोकन्हि फड़ि गेल छथि जे सार्थक लोकनिक गिनती हेरा जेना गेल अछि
।
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