मोहन भारद्वाज
दिल्ली
आवास
3.12.12
प्रिय प्रकाश,
मैलोरंग
अपन वार्षिकोत्सवक सातम आयोजन महेन्द्र मलंगिया पर केन्द्रित क’
रहल अछि से जानि खूब खुशी भेल. विश्वास अछि, एहि अवसर पर प्रकाशित होमयवला
स्मारिका संग्रहणीय होयत. हमर शुभकामना.
महेन्द्र मलंगिया
मैथिलीक एकमुड़िया रचनाआर छथि. ओना, कथा आ अन्यों विधा मे रचना छनि, तैयो हिनक
ख्याति अछि नाट्यकारक रूप मे. तकर कारण छैक. नाटक हिनक जीवन अछि. जीवन हिनक
साहित्य अछि. जीवन अछि चलब आ नाटक अछि संग चलब. साहित्य –
भाव नाटकक नाभि –
नाल अछि. सम्मिलित स्वेच्छा प्रणोदित नाट्य – रचनाक संग मलंगिया
एकाकार भ’
गेल छथि.
हमरा जनैत महेन्द्र मलंगिया
नाट्यकार छोड़ि आर किछु भइये नहि सकैत छलाह. नाट्यरचनाक परिचय अछि ओकर लोकपरकता. मलंगियाक
चिन्हारय अछि हुनक बगय – बानि, चालि –
ढ़ालि, बाजब –
बतिआयब, पढ़ब –
लीखब. ठेंठ –
जीवन, ठिकायल लेखन. लोकक स्थिति – चिंता सँ विकास –
सेहंता धरिक निधोख निरूपण. पूर्णांक नाटक हो वा नुक्कड़ नाटक, रेडियो नाटक रहय कि
एकांकी –
सभ ठाम थाप पड़ैत अछि आमलोकक दशा – दिशा केँ देखार करबाक खगता –
आवश्यकता पर. आ से, विषय – वस्तुए नहि, भाषा सेहो कहैत अछि. मलंगियाक
रचना मे जनगण आ ओकर संस्कृति बजैत अछि. मैथिल स्नेह आ संघर्षक भंगिमा देखाइत अछि.
मैलोरंगक वार्षिकोत्सवक
अवसर पर प्रकाशित होमयवला स्मारिकाक संग मलंगियाक कृतिक प्रकाशन, नाट्य –
रचनाक मंचन –
एहि प्रकारक सम्पूर्ण कार्यक्रम लोक – संघर्षक अभियान केँ
चड़िआयत से विश्वास अछि. बधाइ आ मंगलकामना.
अहाँक
मोहन भारद्वाज.
3.12.12
[ सुप्रसिद्ध चिंतक मोहन भारद्वाज जीक हम समस्त मैलोरंग रेपर्टरी दिस स' आभारी छियनि, जे हमर सबहक आयोजन लेल एतेक आत्मीय भ' शुभकामना देलथि अछि.]
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