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रंगमंच विमर्श विशेषांक
एहि पत्रिका
के रंगमंच पर केन्द्रित कयल गेल अछि । एहि
पत्रिकाक मुख्य पृष्ठ पर मैलोरंग रेपर्टरीक चित्र छपल गेल अछि । पत्रिकाक
द्वारा ई सम्मान पाबि हम सब हर्षित छी । प्रत्रिकामे प्रकाशित लगभग सब आलेखमे मैलोरंग
अपन सकारात्मक उपस्थिति बनौने अछि । निश्चित ई मैलोरंग संग जुड़ल
प्रत्येक रंगकर्मीक अथक प्रयासक परिणति अछि । पत्रिकामे छपल आलेखमे मैलोरंगक
उपस्थितिक किछु बानगी एहि ठाम संग्रहित क’ रहल छी :
“
... मैथिली नाटक ओ रंगमंचक ख्याति देशक राजधानी दिल्ली धरि पहुँचल अछि ।
दिल्लीयोमे आइ मैथिली रंगमंच सक्रिय भेल अछि । ओहिठामक उर्जावान युवक सभ सँ एक नव
भरोस जनमल अछि । प्रकाश झा आ हुनक संगोरसँ से विश्वास उपजल अछि । ई एक नीक लक्षण
थिक । ... ”
-
अशोक [ सांध्य
गोष्ठी, दिसम्बर – 2012 / 9 ]
“...
दिल्लीक ‘मैलोरंग’
प्रदर्शनक निरंतरता ओ स्तरीयता बनौने अछि । प्रकाश एवं हुनक दल एहिमे सक्रिय अछि ।
...”
-
छत्रानन्द सिंह झा [ सांध्य गोष्ठी, दिसम्बर –
2012 / 11 ]
“... एहि वर्ष
दिल्लीमे सक्रिय प्रसिद्ध संस्था ‘मैथिली लोक रंग’
(मैलोरंग) गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोरक एकटा बंगला नाट्य कृतिक मंचन मैथिलीमे
कएलक... ...‘मैलोरंग’क
संबंधमे तँ तैयो सुनल अछि जे ओकर किछु कलाकार आ कार्यकर्ता पूर्णकालिक छथि आ एकरे
अपन आजीविकाक साधन बना लेने छथि । जँ एहन अछि तँ तखन विचार करबाक दिशा बदलय पड़त ।
...”
-
किशोर केशव [ सांध्य गोष्ठी, दिसम्बर – 2012 / 23 ]
“... दिल्लीमे ‘मैलोरंग’
आ ‘मिथिलांगन’
नाटक संस्था काज क’ रहल अछि । वर्तमानमे एकमात्र संस्था ‘मैलोरंग’
अछि । ...”
- कुमार गगन [ सांध्य गोष्ठी, दिसम्बर –
2012 / 37 ]
“... साधारण मध्यवर्गक
युवकक पलायन राजधानी दिल्ली तरफ बेसी भेल । एकर एकटा साकारात्मक
परिणाम भेल मैथिली रंगकर्मक क्षेत्रमे । ‘मैलोरंग’
आ ‘मिथिलांगन’क
स्थापना एकरे परिणाम थिक । ‘मैलोरंग’ समस्त युवा
टीमक रंगसंस्था अछि, आब तँ एकर अपन ‘रैपर्टरी’
बनि गेल छैक । ...”
- कुमार गगन [ सांध्य गोष्ठी, दिसम्बर –
2012 / 38 ]
“... मैथिलीमे एखन
रंगमंच क्रियाशील छै ओ हमरा सूचनानुसार एक मात्र दिल्लीमे अछि ‘मैलोरंग’
... ।”
-
विभूति आनंद [ सांध्य गोष्ठी, दिसम्बर – 2012 / 43 ]
“... लेकिन नियमित
जकरा कहबै से एकमात्र रंगमंचक लेल समर्पित छै ओ थिक ‘मैलोरंग’,
दिल्ली, जे गंभीरतापूर्वक मैथिली रंगमंचकेँ अपन एकटा ठामपर पहुँचेबामे लागल अछि,
जे काज पूर्वमे अरिपन, पटना कयलक पश्चात भंगिमा । ...”
-
विभूति आनंद [ सांध्य गोष्ठी, दिसम्बर – 2012 / 43 ]
“ ... भंगिम थ’स
लेलक... आब ‘मैलोरंग’
काज क’
रहल अछि । ओ आब एकटा रेपुटेड संस्था भ’ गेल छै । अखिल
भारतीय स्तरपर ओकर ऑफिस छै... ओ सेमीनार करइए... तँ वर्तमानमे कोनो एकटा मैथिली
रंगमंचक अछि तँ ओ थिक ‘मैलोरंग’ । ...”
-
विभूति आनंद [ सांध्य गोष्ठी, दिसम्बर – 2012 / 44 ]
“ ... आर बहुतो लोक
छथि जे जुड़ल छथि रंगमंचसँ, नीक-नीक संस्थासँ जेना प्रकाश झाकेँ लिय’
ओ जुड़ल छथि मैलोरंगस’ ज’ त’
नीक –
नीक काज होइत छै । हुनकामे एकटा छनि जे ओ अपन भाषाक काज क’
रहल छथि, लेकिन नव – नव जे कलाकार छथि हुनका सभकेँ ई
अपेक्षा रहैत छनि जे हमरा सिरियल भेट जाय ओ कोनो भोजपुरिये किएक ने रहय । ...”
-
विभूति आनंद [ सांध्य गोष्ठी, दिसम्बर – 2012 / 46 ]

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