आजुक समयमे
जँ कतौ मैथिलीक कोनो आयोजन भ’ रहल अछि त’
अधिकांशक नाम विद्यापति स्मृति पर्व समारोह रखल जाइत छैक । सबतरि आयोजनक ई ‘हेडलाइन’
एक्के । ‘हेडलाइन’क बाद आयोजनक स्थानक नाम जोड़ि देल जाइत अछि ।
प्राय: सौंसेक विद्यापति स्मृति पर्व समारोहक आयोजन समीतिक कर्ताधर्ता
उम्रक तेसर पड़ाव पार करनिहार छथि । यानि पचास वसंत अधिकांश लोकनि देख चुकल छथि ।
अपना शहरमे साल भरि कवि कोकिल विद्यापतिक नाम पर आम मैथिलजन वा कि कॉर्पोरेट
सेक्टर स’
अर्थोपार्जन कयल जाइत अछि । कतौ तीन दिना, कतौ दू दिना त’
कतौ एक दिना भव्य आयोजनक परिकल्पना होइछ । आयोजन किएक कयल जा रहल अछि वा कि एकर की
लक्ष्य छैक आ आयोजनक परिणति की भेल तकर ब्योरा आयोजन कर्ता एहि ‘ओल्ड
इज गोल्ड’
कमीटीए टा कहि सकैत छथि ।
एहि बीच अति
महत्त्वपूर्ण, अति समृद्ध (आर्थिक रूपे, मानसिक नै) आयोजन समूह झारखण्ड मैथिल
मंच, राँची द्वारा विगत 14 – 15, अप्रैल, 2013 क’
एहने विद्यापति स्मृति पर्व समारोहक भव्य आयोजन कयल गेल । ई संयोगे जे एहि
आयोजन कर्ता लोकनिक नजरि मैलोरंग के नाटक पर अटकलन्हि । आजोजन लेल उत्साहित
भ’
हमहूँ सब पहुँचलहुँ । ई पहिल अनुभव अछि एहि मैथिल गौरव कवि विद्यापतिक नाम पर
आयोजित होम’
बला विद्यापति स्मृति पर्व समारोहक ।
आयोजन स्थल
पर पहुँचैत देरी ओत्तुक्का व्यवस्था आ भव्यताक दृश्य देखि हम अपन रंगमंडल संग
क्षुब्ध भ’
गेल रही । आपस मे बेसीकाल यैह हिसाबमे लागल रही जे एत्तेक पाई कत’
स’
आयल हौयत ? टेंटवला कतेक रुपैया लेने हेतै, लाइटबला कतेकमे साटा केने हेतैक, दू
दूटा साइलेंट जेनरेटर, ध्वनि यंत्रक विशाल – विशाल बॉक्समे कतेक
पाई लागल हेतैक, लगभग एक हजार कुर्सी लागल छैक कतेक रुपैया लागल हेतैक... आदि आदि
। हम सब अपना अपना शहर आ अपन स्थिति के तुच्छ बूझैत आगू बढ़लहुँ । संयोग जे रातिमे
पानि –
बिहाड़ि तेहन उठल जे सबटा चौपट । तैयो रातिमे कार्यक्रम भेल । हम सब थाकल रही आवास
स्थानपर जा सुति रहलहुँ । राँचीक एहि आयोजक लोकनिक अथक प्रयास बुझा रहल छल ।
भोरे जानकारी
भेटल जे कार्यक्रम त’ रातिक 2 बजे धरि चलल । मारि फँसि गेलै
तकरा बादे बंद भेल । हम चौंकलहुँ ‘मारि फँसि गेलै ?’ से कोना ?
- मस्त मस्त गीत हुअ’
लगलै, किछु दर्शक संग आयोजक लोकनि सेहो शराब पिबि क’ मस्त भ’
गेलाह त’
मारि नै फँसतै ? मस्त मस्त माने – दुई अर्थी गीत... जिंस ढ़ीला क’
र’...,
छाती मे उठैयै दरद कनी हाथ लगा द’... आदि आदि... ।
आजुक राति
हमर नाटक छल तेँ भोरे आठ बजे आयोजन स्थल पर पहुँचलहुँ । मंचक स्थिति देख अचम्भित ।
मंचक तरमे, अगल बगल, पटेल भवनक खिड़की केबारक दोगमे, रैकक हन्नामे सौंसे महग स’
महग शराबक खाली बोतल छिड़ियायल । विद्यापतिक फोटो पानिमे भीजल । विद्यापतिक
कतेको ‘कट
आउट’
इम्हर ओम्हर फेंकल । राँचीक एहि धरतीपर हमर मानसिक स्थिति विचलित होम’
लागल । नाश्ता करैत काल भनसीया स’ गप्प शुरु केलहुँ । जानकारी भेटल जे
रातिमे गीत –
नाद शुरु भेल तकरा बाद जमशेदपुर स’ आयल टीम अपन गीति – नाट्य शुरु करबा
लेल जखने मंचपर गेल कि तखने ओहि टीमक एकटा महिला कलाकार सँ एक व्यक्ति अश्लील
व्यवहार केलखिन । ई अश्लीलताक अंदाजा एहि स’ लगओल जा सकैत अछि
जे टीमक सब सदस्यक संग निर्देशक सेहो घोर आपत्ति जतेलाह । निर्देशक पंकज जी मंचपर
चढ़ि जे मोनमे अयलन्हि से कहि अपन प्रस्तुति नै करबाक निर्णय ल’
लेलाह आ रातियेमे जमशेदपुर लेल बिदा भ’ गेलाह । आब आयोजक
जे हिनका लोकनि के आमंत्रित केने रहथिन आ जिनका कारण ई लोकनि चलि गेलाह दुनू
ग्रुपमे नीक जेना मारि फँसि गेल । मारि शांत भेला उपरांत चंदा देनिहार लोकनि अरि
गेलाह जे हम गीत त’ सुनबे करब । गीत शुरु भेल आ दू बजे धरि
चलल । खूब अश्लिल गीतक माँग हुअ’ लागल । एहन गीत सुननिहार आ गीतक रसपान
करनिहारमे अधिकांश अधबेसू छलाह । फेर मारि पीट बजरल । राष्ट्रपति शासन लागल छैक,
तुरंते सेना आ पुलिस आबि गेल तखन जा’ क’
कार्यक्रम रूकल ।
एहन घटनाक
विवरण सुनितहि हमर हालतक अंदाजा लगाओल जा सकैत अछि । हमरो नाटक करबाक छल । तीन
तीनटा महिला रंगकर्मी हमरो संग छलीह । सब सदस्य संग गप्प केलहुँ । एक मत स’
ई निर्णय भेल जे नाटक करबाक अछि, कोनो व्यवधान भेला पर नाटक रोकि देब । राँचीमे
रहनिहार कतेको मित्र लोकनि [हिन्दी भाषी रंगकर्मी एवं अपन दिल्लीक कार्यालय
रा.ना.वि.] स’
सेहो सम्पर्क केलहुँ । हम अपन सहायक संग मंच निर्माणमे जुटि गेलहुँ आ अभिनेता
लोकनि नाटकक पूर्वाभ्यासमे लागि गेलाह । मंच निर्माण समय मंच पर शनै: शनै: आयोजक
लोकनि पधार’
लगलाह । हुनक आपसी वार्तालाप शुरू भेल । हम सब चुपचाप मंचक प्रकाश यंत्र, ध्वनि
यंत्र आ पर्दा लगाब’ मे व्यस्त । आयोजकक संख्या आब लगभग दस –
बारह टा भ’
गेलनि । राति की भेल छल तकर नीक जेना व्याख्या हुअ’ लागल ।
आयोजकमे सेहो दूटा ग्रुप भ’ गेल छल । मंचपर जे किछु होयत ओकरा भंडुल
करब दोसर ग्रुपक उद्येश्य छल । जानकारी भेल जे हिनको लोकनि के नीक जेना मारि
लगलन्हि । एक दोसरके अपन माथक टेटर देखाबैत छलाह त’ कियो पीठक
निशान । सबहक उम्र बुझू पचास स’ उपरे छल । हम झारखण्डक एहि भूमि पर
सभ्रांत आ समृद्ध मैथिलजनक स्थिति स’ क्षुब्ध । परिस्थिति
के भँपैत हम आयोजक स’ आग्रह कयल जे कार्यक्रमक शुरुआत हमरे
सबहक नाटक स’
क’देल
जाय । आयोजकमे किछु गोटे अत्यंत आत्मीय आ मानसिक सहयोगी । हिनका लोकनि स’
गप्प क’
क’
नीक अनुभव करैत रही । हिनका लोकनिक संख्या बहुत थोड़ छल । मुदा किछु आयोजक पाइयक
ठसक मे चूर । फैसला भेल जे नाटक उद्घाटन आ विद्यापति गीतक तुरत बाद होयत ।
रातिक लगभग
एग्ग्यारह बजे दर्शकक संख्या लगभग हजार । आयोजक आयोजनमे दुनू पाटी नीक तैयारीमे
छलाह । मंचपर हिनका बजबियौन त’ हुनका बजबियौन । हमरा बैच दिय’
त’
हुनका दियौन । अगिला कुर्सी पर ओकरा किएक बैसाओल गेल त’
फलां बाबू किएक पाछा बैसताह । एहने स्थिति – परिस्थितिमे लगभग
साढ़े एग्यारह बजे रातिमे शुरू भेल नाटक पैघ नटकिया के । नाटक नीक जेना आगू
बढ़ि रहल छल । तीन दृश्यक बाद आयोजकमे एक गोटे आग्रह केलन्हि जे दू सीनक बीचमे गीत
नै हेतैक की ? हम कहलियैन – नै नाटक शुरू भेल त’
समाप्ते होयत । चरिम दृश्यक बाद फेर तीन चारि गोटे आयोजक अयलाह आ क’ह’
लगलाह “
जे बहुते गबैया के आनि लेल गेल छैक । जँ ई लोकनि गीत नै गेताह / गेतीह त’
हमर सबहक पाइ बूड़ि जायत तेँ दू सीनक बीच बीचमे गीत देब’
दियौ । नाटक त’
भोर तक चलबे करतै । एत्तुक्का दर्शक भोर पाँच बजे तक रहताह ।”
गप्प करथि ओ लोकनि आ शर्मसार भ’ रहल छलहुँ हम । पाँचम दृश्य समाप्त भेल
। छठम दृश्य होइत रहै, फेर आग्रह आयल । आब हम नाटक समाप्त क’
देल जाय सैह उचित बूझि अपन अभिनेता लोकनि के मंच पर जयबा स’
रोकि लेलहुँ । सब रंगकर्मीक मनसिक स्थितिक अंदाजा लगाओल जा सकैत अछि । राति बेसी
भेल जा रहर छल । सब गोटे अत्यंत दु:खी भ’ बिना किछु खेने
अपना आवास पर चलि गेलाह । सुतताह की, सब गोटॆ राति भरि एहि विद्यापति स्मृति
पर्व समारोहक आयोजक लोकनिक मानसिक दरिद्रताक चर्च करैत रहलाह । एहि विषम
परिस्थितिमे स्थानीय अभिनेता आदरणीय राजीव जीक मानसिक सहयोग हमर रंगकर्मी के
संबंलता प्रदान केलकन्हि से नै बिसरल जा सकैत अछि । हाँ ! एहि तरहक स्थिति स’
हमहूँ सब रूबरू नै भेल रही तेँ हमरा सब लेल ईहो बुझू जरूरीये छल । एहि ठोकर स’
हम सब खूब नीक जेना किछु कठोर सपत नाटकक मादे ल’ लेलहुँ । सिखै
त’
छै लोक ठोकरे स’ ने...
आयोजकमे जे
लोकनि हमरा सबके निमंत्रण देने रहथि, शर्मसार छलाह । ओ लोकनि बेचारे हमरा लोकनिक
सोझा किएक औताह ? दोसरा दिन जखन लगभग एग्यारह बजे ओही स्थान पर गेलहुँ त’
नीक जेना जानकारी भेटल जे आयोजक लोकनि राति भरि दारू पीलाह आ मंचपर अभद्र स’
अभद्र गीतक आनंद सोम रसक संग लेलाह । विद्यापतिक आगू मंचपर : बुढ़बा....
बिहारी नौजवान... आदि गीत स’ समाप्त भेल ई पर्व समारोह ।
एहन आयोजनमे
नीक जेना सोम रसक पान होइत आयल अछि जे सुनबामे बेसी काल अबैत अछि । अत्यंत खराब
लगैत अछि मुदा, हमर मैथिल समाजक ई त’ परम्परा थिक । विद्यापति
सेहो नीक जेना भाँग खाइत छलाह । उगना भाँग पिसब लेल नियुक्ते भेल छल । भाँगक स्थान
आब सोम रस [शराब] ल’ लेलक अछि ताहि स’
की ? विद्यापति आ रानी लखिमाक बीचक संबंध पर कतेको विद्वान अपन माथा लगा चुकल छथि
। विद्यापति सेहो शृंगार रसक माहिर कवि छथि तेँ हिनका फोटोक आगू ई लोकनि आजुक
मेनका / रम्भा आदिक फोटो अपन छातीमे
फेवीकॉलस’
चिपकबैत छथि ताहिमे हिनक की गलती ???
राँची स’
बिदा हुअ’
लगलहुँ । स्टेशन तक पहुँचाबय लेल झाँरखण्ड मैथिली मंचक तीन चारिटा पदाधिकारी अयलाह
। गेस्टहाउस स’
निकलैत काल “एहि
ठाम जे त्रुटि भेल हुए से एत्तैहि बिसरि जायब...” कल जोड़ने ठाढ़ बुजुर्ग अध्यक्ष महोदय... मुदा,
हमहूँ की करू ? अपन स्थिति त’ बिसरि गेलहुँ महोदय मुदा पूर्वर्ती
कलाकार पीढ़ी के जानकारी देब बेसी आवश्यक अछि । जे एहन एहन भ्रष्ट आयोजकक मानसिकता
स’
विचलित नहि होबय ।
एहि ठाम
दिल्लीमे हमरा लोकनि के पहुँचइ स’ पहिनहि तथाकथित शुभचिंतक लोकनि अपन
सूचनातंत्र स’
ई जानकारी प्राप्त क’ चुकल छलाह । ई लोकनि सेहो अपना के
संस्कृतिकर्मी कहैत छथि । अपन कथ्यमे कनी आरो नून मिर्चाई लगा क’
हमर कलाकारक आत्मसम्मान पर कुठाराघात करबाक कोनो मौका नहि चुकलाह अछि । विगत डेड़
महीनामे प्राय: सब सार्बजनिक स्थान पर हिनका लोकनिक मुख्य चर्चाक विषय यैह रहलन्हि
अछि । एतेकटा दिल्लीमे ई संख्या मात्र दू गोटेक छनि । आब हम हिनका लोकनिक नाम कोना
लिखू ? छथि त’
ई लोकनि बहुत आत्मीय । आम प्रेक्षक हिनका लोकनिक एहि चुटकी के सुनि हमरा सब स’
बेसी हत्प्रभ होइत छथि,ए एहि निन्दनीय कथामे ई लोकनि किम्हर ठाढ़ छथि ? हम आभारी छी
अपन कलाकार के जे एहि विषम परिस्थितिमे सेहो हमरा संग मजबूती स’
ठाढ़ छथि ।





प्रकाश भैया,
जवाब देंहटाएंउपरोक्त सम्पूर्ण घटना के हम अक्षरशः बड़ा ध्यान स' पढलहु अछि आ निष्कर्षतः इएह कहल जा सकैत अछि जे किछु चन्द विकृत मानसिकताक व्यक्तिक कारणें सम्पूर्ण मैथिल समाज कलंकित अछि।
धन्यवाद के पात्र छी अहाँ आ अहाँक रंगकर्मी लोकनि जे कि एहनो सन विषम परिस्थिति में अनुशासन के पालन करैत रहलाह।
सादर,
मनीष झा "बौआभाइ"
मो. न.-09717347995
www.writermanishjha.blogspot.com
बहुत बहुत धन्यवाद मनीष,
जवाब देंहटाएंएहि मे कोनो शक नहि जे हमर रंगकर्मी धन्यवादक पात्र छथि । एहि संस्कृतिकर्मी के अहाँसन संस्कृति कर्मीक बेगरता सदैब रहैत छनि । अहाँक संग हमरा सभ के भेटैत अछि । हम सब गौरवांवित भ' उठैत छी आ दुगुना उत्साह स' नव नव काज करबा मे जुटि जाइत छी ।
एक बेर फेर धन्यवाद,
अहाँक अग्रज
प्रकाश
Kshubdh....ati kshubdh....nindaneey....hamra nai bujhal chhal....prakash ji poora vritant parhi k dukhi chhee. ..hamar ekta mitr santosh ranchi ke secretariat (jal sansadhan) me kaaryarat chhathi...karykram ke ek saptahak baad dilli aayal chhalah bhent bhelah t atyadhik prashansa karait chhalah kaaryakram ke...parantu satyata s aai avgat bhelahu...bujhi nai paaib rahal chhee je ee 'somras' prem appan maithil samaj me kiyak ette gahir paith bana rahal achhi. ..gaamak durga puja tak ehi s dooshit bhel ja rahal achhi. ..virodh kayla uttar jhagra mol liya...doo chair dinak gaam pravas ...oho kam s kam kono dharmik wa sanskrutik kaaryakram me ehi sabh ke nishiddh karbaak chahi...Kichhu karnai jaroori achhi. ..nai t ee barhite rahat...ahaank ette neek naatakak kadar waih nai k sakait achhi jekara kala wa sanskriti s door door tak kono vasta nai ho...dharm aa sanskriti Ke kee hum sab ehan kichhu lokak kaaran s gart me doobebak prayasak mook darshak banal rahi sakait chhee?
जवाब देंहटाएंभाई नमस्कार !
जवाब देंहटाएंआयोजक लोकनि के कोनो आयोजनक एकटा मापदण्ड स्थापित क'र' पड़तनि । अपना समाज मे प्रचलित अछि जे आयोजन कियो क' सकैत अछि जकरा लग पाई छैक । मुदा कोनो आयोजन के विधिवत कोना कयल जाय एहि लेल विशेषज्ञक जरूरत स' हमर समाज अनभिज्ञ अछि । अहाँ नीक जेना जनैत छी जे आयोजन केना आ कोन रूपे होयबाक चाही । एहि लेल उचित प्रशिक्षित लोकनि के जोड़ॅब अति आवश्यक अछि ।
खैर ! ई त' एकटा आयोजनक हमर व्यक्तिगत अनुभब छल ।
भाई आब त' भेंट घाँट दियौ । अहूँ दिल्ली मे बहुत कम रहैत छी । समय निकालू ने ।
ई स्थिति मात्र राँचीए टा के नहीं बहुतायत येह हाल अछि विद्यापति समारोहक , चंदा के धंधा संग मौज मस्ती विद्यापति जी के पाग दोपटा पहिरेय धोती खोली नाच होइत अछि ! जे अभद्र श्लील गीत जात्ते बेसी गेता-नाचता हुनकर सम्मान तत्ते बेसी ! ई विषय अति निंदनीय अछि !!हाय रे मैथिल
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