| वान्या के दृश्य... |
रंगमंचके
दुनियामे अंतोन चेख़व के शयदे लोक नै जनैत होयताह । चेख़व रूसमे जन्म लेनिहार विश्व प्रसिद्ध
नाटककर छथि । हिनक जन्म 1860 ईमे 29 जनवरी क’ भेल छलन्हि । ई वैह
समय छल जकर आसपास मैथिली भाषाक प्रथम आधुनिक नाटक [सुन्दर संयोग] लिखनिहार जीवन झा
मिथिलामे अवतरित भेलाह । चेख़व के आधुनिक कहानी के विशेषज्ञ सेहो कहल जाइत छनि ।
हिनक रचनामे सृजित पात्रक आंतरिक मन: स्थिति के सुक्ष्मता स’
उजागर करबामे महारथ हाशिल छलन्हि । जखन कि ओहि समयमे हमर रचनाकार अपन समाजिके
स्थितिक अध्ययन करबामे लागल छलाह । एखनो तक बहुत कम एहन रचना हमरा सबहक सोझा अछि
जाहिमे व्यक्तिक अंतरद्वन्द के केन्द्रित नाट्यालेख लिखल गेल हो । चेख़व रूसी जीवनक
गम्भीरता स’
वर्णन अपन रचनामे केलाह अछि । यैह कारण थिक जे आइयो चेखव के यथार्थवादीक
प्रतिनिधिक रूप मे रूसी शिक्षा केन्द्र स्थापित केने अछि ।
| वान्या |
तात्कालीन
रूसी समाजमे प्रकृतिक दुखद स्थितिक आगामी परिणति के दूरगामी दृष्टि स’
देखैत चेख़व एहि अंकल वान्या नामक नाट्य रचना के सृजित केलाह अछि । चेख़व
कहैत छथि : “
अपना दिस ताकू, कतेक भारी आ उदास अछि अहाँक जीवन”
। उपर्युक्त कथन अक्षरस: सत्य अछि, जँ जीवनमे अपन अगिला क्षणक विवेक जागि जाई त’
हम सब कतेक नीक जीवन गढ़ि सकैत छी । अपना लेल अपन अगिला पीढीक लेल । चेख़व अपन थोड़
नाट्य रचना क’
क’
जे कोनो नाट्य परम्परा चलि आबि रहल छल सब के मटियामेट क’
देलाह । हिनक चारिटा प्रमुख नाट्य रचना अछि
- द सीगल, अंकल वान्या, द थ्री सिस्टर्स आ चारिम द चेरी ऑर्चर्ड
। ई सब नाटक विश्वक नाट्य लेखन शैली, नाटक संयोजन, ओहि मे अभिनय आ प्रदर्शन शैली
सबमे प्रथम परिवर्तनक सूत्रपात्र अछि ।
एखन राष्ट्रीय
नाट्य विद्यालय के द्वितीय वर्षक छात्र द्वारा त्रिपुरारि शर्माक
निर्देशनमे अंतोन चेख़व लिखित नाटक वान्याक नाट्य प्रस्तुति चलि रहल
अछि । काल्हि हमहूँ देखलहुँ । त्रिपुरारि शर्मा आजुक समयमे स्थापित नाट्य निर्देशक
छथि । महिला नाट्य निर्देशकमे हिनक नाम सर्वोपरी छनि । कतेको सम्मान आ पुरस्कारक
संग काल्हिये हिनका संगीत नाटक अकादेमी सम्मान स’
सेहो सम्मानित कयल गेलन्हि अछि । वर्तमान समय मे त्रिपुरारि जी राष्ट्रीय नाट्य
विद्यालय मे अभिनय विषय के प्रोफेसर संगहि कार्यकारी निदेशक सेहो छथि ।
अंतोन
चेख़व लिखित नाटक अंकल वान्या ओहि
आदमीक कथा अछि जे समयक संग बहुत पाछू छुटि गेल अछि । एहन व्यक्ति दोसराक लेल
निस्सन नींव गढैत अछि आ स्वयं बहुत हल्लुक बनल रहैत अछि । एहन व्यक्ति द्वारा कयल
गेल कोनो महत्वपूर्ण काज के दोसर व्यक्ति कोनो काज नै मानैत छथि । उल्टे एकरा ऊपर
अपना अपना ढंग स’
अपन विचार थोपैत रहैत अछि । कि ! एहने स्थिति मिथिलाक कृषक समुदायक नहि अछि ? हमरा
गाममे हमर खेत खरिहान के नीक जेना रखनिहार व्यक्तिक एहने हाल नै अछि ? एहि मन:
स्थिति के सृजित करैमे हमर समाज बहुत पाछाँ अछि । किछु एक दू रचना छोड़ि दी त’
हमर सृजक समाज चुप छथि । जे लोकनि लिखलाह अछि हुनका सेहो अपन समाज स’
बुझू बड़िये देल गेल छन्हि । अस्तु ।
नाटकमे एकटा
प्रोफेसर छथि हिनक पहिल पत्नी स’ एकटा बेटी छन्हि । अपन बेटी के छोड़ी
शहरमे नबकी कनिया संग रहैत छथि । नवकी कनिया हिनक विद्वता आ धन स’
आकर्षित भ’
एहन वृद्धा अवस्थामे हेबाक बादो विवाह क’ लेलन्हि । हिनक
उम्रक प्रो. साहेबक बेटी छन्हि । शहर स’ ई लोकन्हि अपन गाम
अयलाह अछि । नवकी कनियाक यौवन के देखि पड़ोसक एकटा डॉक्टर प्रो. साहेबक इलाज करबाक
लेल बेर बेर हिनका घर आब’ लगैत छन्हि । नवकी कनियाक अंत:मन मे
सेहो विद्वता आ धन स’ आकर्षित भ’
कयल गेल विवाहक फैसला आ अपन एहि यौवनक बीच द्वन्द चलैत रहैत छन्हि । प्रो. साहेबक
बेटी सेहो डॉक्टर दिस आकर्षित रहैत छथि ।
डॉक्टर दिस
एहि आकर्षणक प्रमुख कारण अछि । ओ ई जे डॉक्टर आगामी सोचक पैरवी करैत रहैत अछि ।
जीवन के हरदम सुन्दर बनेबाक गप्प करैत अछि । अपन आगामी पीढ़ीक लेल सचेत रहैत अछि ।
अपन अस्तित्व लेल स्थान बनबैत रहैत अछि,
आदि आदि । एहि सब अंतरद्वन्दक बीच अबैत छथि मामा वान्या । वान्या के
मनमे सेहो अपन जीवन लेल प्रेम प्रस्फुटित होइत अछि मुदा जे काज ओ क’
रहल अछि एहि काज के कियो काज मानिते नहि अछि । वान्या स’
प्रो. के बेटी बहुत घुलल मिलल अछि । एहि बेटीक कष्ट देखि वान्या एक दिन विद्रोह पर
उतरि जाइत अछि, जहिया प्रो. अपन एहि खेत खरिहान के बेच’
चाहैत अछि । नबकी कनियाक अंतर्द्वन्दमे सेहो यौवनक विजय होइत अछि । बेटीक एकभगहा
प्रेम पछड़ि जाइत अछि । सब गोटे एक बेर फेर अपन अपन जीवन जिबाक लेल एहि ठाम स’
निकलि जाइत अछि । रहि जाइत अछि अंकल वान्या, असहाय बेटी आ ओकर नानी ।
आशा अछि एहन
एहन नाट्य प्रस्तुति आ नाट्यालेख हमरो भाषाक रचनाकार लिखथि ।
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