बुधवार, 29 मई 2013

अंकल वान्या मे देखाइत अछि गामक उचितलाल...


वान्या के दृश्य...

रंगमंचके दुनियामे अंतोन चेख़व के शयदे लोक नै जनैत होयताह । चेख़व रूसमे जन्म लेनिहार विश्व प्रसिद्ध नाटककर छथि । हिनक जन्म 1860 ईमे 29 जनवरी क भेल छलन्हि । ई वैह समय छल जकर आसपास मैथिली भाषाक प्रथम आधुनिक नाटक [सुन्दर संयोग] लिखनिहार जीवन झा मिथिलामे अवतरित भेलाह । चेख़व के आधुनिक कहानी के विशेषज्ञ सेहो कहल जाइत छनि । हिनक रचनामे सृजित पात्रक आंतरिक मन: स्थिति के सुक्ष्मता स उजागर करबामे महारथ हाशिल छलन्हि । जखन कि ओहि समयमे हमर रचनाकार अपन समाजिके स्थितिक अध्ययन करबामे लागल छलाह । एखनो तक बहुत कम एहन रचना हमरा सबहक सोझा अछि जाहिमे व्यक्तिक अंतरद्वन्द के केन्द्रित नाट्यालेख लिखल गेल हो । चेख़व रूसी जीवनक गम्भीरता स वर्णन अपन रचनामे केलाह अछि । यैह कारण थिक जे आइयो चेखव के यथार्थवादीक प्रतिनिधिक रूप मे रूसी शिक्षा केन्द्र स्थापित केने अछि ।
 
वान्या

तात्कालीन रूसी समाजमे प्रकृतिक दुखद स्थितिक आगामी परिणति के दूरगामी दृष्टि स देखैत चेख़व एहि अंकल वान्या नामक नाट्य रचना के सृजित केलाह अछि । चेख़व कहैत छथि : अपना दिस ताकू, कतेक भारी आ उदास अछि अहाँक जीवन । उपर्युक्त कथन अक्षरस: सत्य अछि, जँ जीवनमे अपन अगिला क्षणक विवेक जागि जाई त हम सब कतेक नीक जीवन गढ़ि सकैत छी । अपना लेल अपन अगिला पीढीक लेल । चेख़व अपन थोड़ नाट्य रचना क जे कोनो नाट्य परम्परा चलि आबि रहल छल सब के मटियामेट क देलाह । हिनक चारिटा प्रमुख नाट्य रचना अछि  - द सीगल, अंकल वान्या, द थ्री सिस्टर्स आ चारिम द चेरी ऑर्चर्ड । ई सब नाटक विश्वक नाट्य लेखन शैली, नाटक संयोजन, ओहि मे अभिनय आ प्रदर्शन शैली सबमे प्रथम परिवर्तनक सूत्रपात्र अछि ।  

 

एखन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के द्वितीय वर्षक छात्र द्वारा त्रिपुरारि शर्माक निर्देशनमे अंतोन चेख़व लिखित नाटक वान्याक नाट्य प्रस्तुति चलि रहल अछि । काल्हि हमहूँ देखलहुँ । त्रिपुरारि शर्मा आजुक समयमे स्थापित नाट्य निर्देशक छथि । महिला नाट्य निर्देशकमे हिनक नाम सर्वोपरी छनि । कतेको सम्मान आ पुरस्कारक संग काल्हिये हिनका संगीत नाटक अकादेमी सम्मान स सेहो सम्मानित कयल गेलन्हि अछि । वर्तमान समय मे त्रिपुरारि जी राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय मे अभिनय विषय के प्रोफेसर संगहि कार्यकारी निदेशक सेहो छथि । 

अंतोन चेख़व लिखित नाटक अंकल वान्या ओहि आदमीक कथा अछि जे समयक संग बहुत पाछू छुटि गेल अछि । एहन व्यक्ति दोसराक लेल निस्सन नींव गढैत अछि आ स्वयं बहुत हल्लुक बनल रहैत अछि । एहन व्यक्ति द्वारा कयल गेल कोनो महत्वपूर्ण काज के दोसर व्यक्ति कोनो काज नै मानैत छथि । उल्टे एकरा ऊपर अपना अपना ढंग स अपन विचार थोपैत रहैत अछि । कि ! एहने स्थिति मिथिलाक कृषक समुदायक नहि अछि ? हमरा गाममे हमर खेत खरिहान के नीक जेना रखनिहार व्यक्तिक एहने हाल नै अछि ? एहि मन: स्थिति के सृजित करैमे हमर समाज बहुत पाछाँ अछि । किछु एक दू रचना छोड़ि दी त हमर सृजक समाज चुप छथि । जे लोकनि लिखलाह अछि हुनका सेहो अपन समाज स बुझू बड़िये देल गेल छन्हि । अस्तु ।


नाटकमे एकटा प्रोफेसर छथि हिनक पहिल पत्नी स एकटा बेटी छन्हि । अपन बेटी के छोड़ी शहरमे नबकी कनिया संग रहैत छथि । नवकी कनिया हिनक विद्वता आ धन स आकर्षित भ एहन वृद्धा अवस्थामे हेबाक बादो विवाह क लेलन्हि । हिनक उम्रक प्रो. साहेबक बेटी छन्हि । शहर स ई लोकन्हि अपन गाम अयलाह अछि । नवकी कनियाक यौवन के देखि पड़ोसक एकटा डॉक्टर प्रो. साहेबक इलाज करबाक लेल बेर बेर हिनका घर आब लगैत छन्हि । नवकी कनियाक अंत:मन मे सेहो विद्वता आ धन स आकर्षित भ कयल गेल विवाहक फैसला आ अपन एहि यौवनक बीच द्वन्द चलैत रहैत छन्हि । प्रो. साहेबक बेटी सेहो डॉक्टर  दिस आकर्षित रहैत छथि ।

 
डॉक्टर दिस एहि आकर्षणक प्रमुख कारण अछि । ओ ई जे डॉक्टर आगामी सोचक पैरवी करैत रहैत अछि । जीवन के हरदम सुन्दर बनेबाक गप्प करैत अछि । अपन आगामी पीढ़ीक लेल सचेत रहैत अछि । अपन अस्तित्व लेल स्थान बनबैत रहैत अछि,  आदि आदि । एहि सब अंतरद्वन्दक बीच अबैत छथि मामा वान्या । वान्या के मनमे सेहो अपन जीवन लेल प्रेम प्रस्फुटित होइत अछि मुदा जे काज ओ क रहल अछि एहि काज के कियो काज मानिते नहि अछि । वान्या स प्रो. के बेटी बहुत घुलल मिलल अछि । एहि बेटीक कष्ट देखि वान्या एक दिन विद्रोह पर उतरि जाइत अछि, जहिया प्रो. अपन एहि खेत खरिहान के बेच चाहैत अछि । नबकी कनियाक अंतर्द्वन्दमे सेहो यौवनक विजय होइत अछि । बेटीक एकभगहा प्रेम पछड़ि जाइत अछि । सब गोटे एक बेर फेर अपन अपन जीवन जिबाक लेल एहि ठाम स निकलि जाइत अछि । रहि जाइत अछि अंकल वान्या, असहाय बेटी आ ओकर नानी ।


नाटकमे अभिनय पक्ष सेहो नीक जेना देखार भ सामने आओल । बेटी मारियाक भूमिका मे सोनाली बहुत नीक जेना अपन अंतर्द्वन्द के बाहर करबामे सफल चलीह । वान्या बनल छात्र विवेक के आरो अपन अभिनय क्षमता पर काज करक आवश्यकता छन्हि । एकटा बात आरो महत्वपूर्ण अछि ई जे एहि प्रस्तुति स दरभंगाक श्याम कुमार साहनी जे कि द्वितीय वर्षक छात्र छथि सेहो जूड़ल छल । श्याम द्वारा कयल गेल ध्वनि आ संगीत कथ्य के संग संग प्रवाहित होइत छल । श्याम बहुत मेहन केलक अछि से मोन नीक बात ।

आशा अछि एहन एहन नाट्य प्रस्तुति आ नाट्यालेख हमरो भाषाक रचनाकार लिखथि । 

·        

 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें