सोमवार, 29 फ़रवरी 2016

प्रवीण नारायण एवं किशलय कृष्ण जीक कूटनीतिक परिणति : दिल्लीक मैथिली आन्दोलन अस्ताञ्चल दिस अग्रसर...

[ दिल्ली मे पिछला नौ दस सालमे भेल साहित्यिक सांस्कृतिक उत्कर्ष आ उठा – पटकक संदर्भमे किछु अप्पन व्यक्तिगत विचार आ दिल्लीक युवाजन हेतु निवेदन । बहुत दिन स’ मोनमे किछु घुमड़ि रहल छल । मोनक एक पक्ष रोकैत छल त’ दोसर पक्ष धिक्कारैत छल । अंत मे दोसरे पक्ष जीतल । अंतिम कहब भेल जे – “ जँ अप्पन मोनक गप्प नहि बजलहु त’ रंगकर्म छोड़ि देल जाय ।हमरा स’ रंगकर्म छोड़ल नै जा सकैत अछि तेँ लिखबा लेल बाध्य भेलहुँ । ई जनैत छी जे बहुत पैघ मिथिला समाज एहि विचार स’ सहमत नै हेताह, जे कियो हेब्बो करताह ओ मुखर नै भ’ सकताह । मुदा कयल की जाय ? मैथिल समाजमे जहिए स’ नाटक के अपन कैरियर बनेलहु तहिये स’ सब किछु अबधारि लेने छी तेँ एक बेर फेर सही । अप्पन विचार नुका क’ राखब उचित नै । उपर्युक्त दुनू भाई साहेब स’ अग्रिम माफी । ]
जुगल जोड़ी : किशलय प्रवीण ( फेर करताह किछु नवीन ) 

दिल्ली देशक राजधानी होबाक कारणे सबकेँ आकर्षित करैत अछि । एहि दिल्लीमे सबस’ पहिने पंजाबी भाषा अपन खुट्टा नीक जेना रोपि चुकल छल । तकरा बाद एवं प्रकारे उर्दू, सिंधी, बंगाली, संस्कृत सरकारी रूपे स्थापित भेल । कतेको मैथिली संगठन आ व्यक्ति समूह सालक साल मैथिली के स्थापित करबा लेल लागल रहलाह । धीरे – धीरे एहन स्थिति आबि गेलैक जे मैथिली भाषा दिल्लीक राजनीति के नीक जेना प्रभावित क’ र’ लगलैक आ अपन विस्तार संग उचित स्थान पाबि लेलक । हमर अनुभव विगत दस एगारह सालक अछि तेँ बेसी पाछाँ नहि जा सकैत छी । वर्ष 2006 स’ 2011 तक मैथिली भाषी युवकक सक्रियता ततेक बेसी भ’ गेल जे सम्पूर्ण मिथिला वासी दिल्लीक एहन युवाजन पर गौरवांवित हुअ’ लगलाह । हमर ई व्यक्तिगत अनुभव अछि जे एहि बीच ततेक सक्रियता आ आपसी मेल जोल हमरा सबके बीच बढ़ल जे लगभग तीन सय स’ बेसी मैथिल युवा लोकनि के हम सब नाम आ चेहरा जानि पहचानि गेल रही । सब गोटे अलग – अलग क्षेत्रमे अपन सक्रियता रखने छलाह । दिल्लीक कोनो कोनमे कोनो तरहक आयोजन होई कोनो तरहक कार्ड छपेबाक बेगरता नहि छलै । बस एस.एम.एस. मात्र स’ तीन स’ चारि सय युवा उपस्थित भ’ जाइत छलाह आ आयोजनमे शक्ति प्रदान क’ दैत छलाह । दिल्ली सरकार एहि मैथिल युवा लोकनिक सक्रियता के नीक जेना संज्ञान लैत छल । सब गोटे एक दोसर के सुख दु:खमे ठाढ़ देखाइत छलाह । सत्त कहू त’ हमरा सब के अपना पर घमंड हुअ’ लागल छल । देशक दोसर ठामक मैथिल युवा हेतु दिल्लीक युवा शक्ति मार्गदर्शक बनि काज क’ र’ लागल छलाह । उपर्युक्त यथास्थिति स’ अपनहु भिज्ञ होयब । एक स’ एक आयोजन होइत छल । दिल्लीक युवा लोकनि अप्पन क्षेत्र बढौलन्हि आ दिल्लीक आयोजनमे देशक दोसर दोसर भाग स’ स्थापित मैथिल सेबी लोकन्हि के आमन्त्रित क’ र’ लगलाह । चारूकात गहमा गहमीक स्थिति छल । मैथिलसेबी लोकनिक ध्यान दिल्ली दिस आकर्षित हुअ’ लागल । एहि बीच सैकड़ों मैथिलसेबी के दिल्ली आमंत्रित कयल गेलन्हि । एहि मे दूटा महत्त्वपूर्ण व्यक्ति छथि –– भाई  प्रवीण नारायण चौधरी आ भाई किशलय कृष्ण जी । भाई प्रवीण नारायण चौधरी जी ता धरि फेसबुक के माध्यमे अपना के दहेज मुक्त मिथिला नाम स’ स्थापित क’ चुकल छलाह । अपन बेबाकीपन स’ मैथिल युवा बीच सुपरिचित भ’ चुकल छलाह । संगहि किशलय कृष्ण जी सेहो मैथिली फिल्म आ मैथिली साहित्यक विशेषज्ञक रूपे मिथिलाक युवा मे अपन स्थान स्थापित क’ लेने रहथि । अपन मृदुभाषीपन आ सहजता स’ लोकप्रिय भ’ चुकल छलाह । यानी कहल जा सकैत अछि जे अपन व्यक्तिगत व्यवहार मे दुनू गोटे एक दोसरा के ठीक विपरित । एक गोटे गरम दल त’ दोसर नरम दल । एक गोटे सामाजिक आ राजनितिक विचारधारा के अनुयायी त’ दोसर गोटे साहित्यिक आ सांस्कृतिक विचारधारा के सेबक ।

पहिने कहने छलहु जे दिल्लीक युवा लोकनि अपन आयोजन मे कतेको अतिथि के आमंत्रित करैत छलाह त’ हिनको लोकनि के एक दू टा आयोजन मे नोत देल गेलन्हि । एहि दुनू व्यक्तिके दिल्लीक सक्रियता बेसी आकर्षित केलकन्हि । दिल्ली मे अपना के स्थापित करबा लेल ई दुनू गोटे विभिन्न तरहक रस्ता अपनौलन्हि । परिणामत: लगभग एक्के समय ई दुनू गोटे दिल्लीक विभिन्न आयोजन मे आने आने अतिथि जेना आमंत्रित हुअ’ लगला । एकरा मात्र संजोगे कहल जा सकैत अछि जे दिल्लीक उत्साही युवा लोकनिक दुनू फ्रंट यानी सामाजिक आ राजनितिक आयोजन मे भाई प्रवीण नारायण चौधरी जी आ दोसर साहित्यिक आ सांस्कृतिक आयोजन मे भाई किशलय कृष्ण जी अनिवार्य घटकक रूपमे उपस्थित होब’ लगलाह । अपना के स्थापित करबा लेल दुनू गोटे बुधियारी स’ दिल्लीक सक्रिय संगठनक कमजोर कड़ी के अपन शिकार बनब’ लगलाह । दिल्लीक युवा लोकनि हिनक सबहक एहि प्रयास के नहि जानि सकलाह । परिणाम भेल जे जाहि जाहि संगठन स’ ई लोकनि जुड़लाह ओ सब संगठन धीरे धीरे बँटैत गेल । जे लोकनि एक दोसराक एस. एम. एस. पर ताल ठोकि क’ अप्पन – अप्पन ऑफिस स’ भागि एक दोसराक संग ठाढ़ रहैत छलाह ओ लोकन्हि आब एक दोसराक उकटा पैंची क’ र’ लगलाह आ सबमे छत्तीसक संबंध बनि गेल । संगठन छोट होइत गेल... शक्ति क्षीण होइत गेलै । ई दुनू भौयारी अपना के अतिथिपद पर आसीन रखलाह आ अप्पन गेम खेलैत रहलाह । दिल्लीक साहित्यिक, सांस्कृतिक आ राजनीतिक आंदोलन भुस्सातरे बैसैत गेल ।    

भाई प्रवीण नारायण चौधरी आ भाई किशलय कृष्ण जी दिल्लीक लेल अतिथि बनि आयल छलाह । कोनो अतिथि के अतिथि जेना रहबाक चाही मुदा आतिथ्य देनिहार लोकनिक आतिथि सेवा ततेक ने नि:श्छल छल जे ओ लोकनि अतिथिक मानसिकता आ हुनक मनसा के बुझि नहि सकलाह । दुनू अतिथि लोकनि अपन अपन कार्य सिद्धि लेल लगभग सब संगठन स’ जूड़ैत गेला आ स्वार्थ सिद्धि बाद संगठन के नीक जेना दोमि देलाह । कियो कहि सकैत छथि जे हिनका लोकन्हि पर ई निराधार आरोप अछि मुदा किछु उदाहरण अछि जकरा सामने राखल जयबाक चाही :

आदरणीय किशलय भाई अपन ग्रामीण जीवनमे दू – तीनटा नाटक खेलने हेता कि नहि मुदा एकटा मजबूत संस्था के कमजोर करबाक लेल ओहिमे स’ किछु सदस्य के भाँड़ि लेलन्हि आ अलग स’ नाटकक निर्देशन करबाक भार तक उठा लेलाह । प्राय: सब रंगकर्मी के ई लोभ दैत रहलाह जे ओ मैथिली सिनेमामे कास्ट करताह । किशलय भाई द्वारा कयल गेल एहि असफल आयोजनक एक मात्र प्रभाव भेल जे सदस्य लोकनि मे व्यक्तिगत दूरी बढ़ि गेलन्हि, आपसी मतभेद आरो बढ़ि गेल । एहि युवा सदस्य लोकनि के हिनक योजनाक संज्ञान नहि भ’ सकलन्हि । भाई किशलय कृष्ण जी ठाठ स’ कृष्ण बनि पूजाय लगलाह । जे कोनो युवा रंगमंच स’ जुड़बाक लेल अबैत छलाह हुनका सबके बिच्चेमे रोकि सीरियल वा सिनेमाक झाँसा देब’ लगलाह । एहि कारण कतेको युवा अपन आर्थिक ह्रास के भुक्त भोगी भेलाह, कतेको धनवान व्यक्ति जे मैथिली नाटक लेल धन खर्च क’ र’ चाहैत छलाह ओ लोकनि टीवी सिरियल आ फिल्मक आभासी दुनिया दिस मोड़ि देल गेलाह । अलग अलग मिटिंग क’ र’ लगलाह । एक स’ एक विवाद ठाढ़ भेल । शनै:  शनै: लोक के हिनक मनसा बूझ’ मे आब’ लागल । मुदा, ता धरि बहुत देरी भ’ चुकल छल आपसी द्वन्द अपन चरम पर पहुँच गेल छल । मारि झगड़ा, फसाद, केसा – केसी तक करबौलन्हि ।  दिल्लीक सांस्कृतिक ओजस्विता हताशा दिस अग्रसर भ’ गेल । भाई किशलय कृष्ण जीक सतत प्रयास स’ संगठन टुटैत गेल, नव नव संगठन बनैत गेल । आब संगठन अपन अस्मिता के बचाब’ लेल अलग अलग विद्यापति पर्व समारोह क’ र’ लागल । प्राय: सब आयोजनमे किशलय बाबू संचालनक दायित्व सम्हार’ लगलाह । अपन वाक् पटुता स’ मात्र तीन स’ चारि सालमे दिल्लीक सब कोणमे अपना के स्थापित क’ लेलाह । मंच संचालन हेतु नीक मानदेय प्राप्त क’ र’ लगलाह, नवातूर के मंचक लोभ द’ क’ ओझराब’ लगलाह । दिल्लीमे भाई किशलय कृष्ण के त’ अपन चलि पड़लन्हि मुदा मैथिली सांस्कृतिक संस्था धीरे धीरे कमजोर होइत गेल, जे लोकन्हि काल्हि तक भैयारी जेना रहैत छलाह आब एक दोसराक शत्रु भ’ गेलाह, बात बात पर गारि फजिहत पर उतारू भ’ गेलाह । दिल्लीक सांस्कृतिक आयोजनक संख्या त’ गुणात्मक हिसाबे बढि गेल अछि, मुदा एकर संगठनात्मक स्थिति ठीक विपरित भ’ गेल अछि तकरा संज्ञान लेब जरूरी छैक । जे युवा लोकनि फ़िल्म आ टी.बी. लेल अपन अर्थ फँसेलन्हि ओ लोकन्हि आइयो किशलय भाई के डिबिया ल’ क’ गोपी बनि हेरि रहल छथि । मुदा; किशलय भाई त’ नामे स’ कृष्ण छथि, आई काल्हि कोनो नव रास रचब’ मे लागल छथि ।    

आब भाई प्रवीण नारायण चौधरी जीक दिल्ली कथा । अपन बेबाकीपन आ प्रतिउत्तरताक गुण स’ दिल्लीक फेसबुकिया युवामे चिर परिचित पीएनसी जी क नजरि दिल्ली पर छलन्हि । ओत्तुको युवा लोकन्हि अपना आयोजन में हिनका आमंत्रित केलन्हि । मुदा प्रवीण भाई जाहि संगठनमे अतिथि जेना आमंत्रित भेलाह ओकर संगठनात्मक समूहमे अपन दबंगई स’ हस्तक्षेप क’ र’ लगलाह । नेपालमे कार्यक्षेत्र होबाक बादो श्री चौधरी दिल्लीक विभिन्न आयोजनमे बुझू त’ महीनामे दू दू बेर अपन उपस्थिति दे ब’ लगलाह । संगठनमे हिनकर बेस हस्तक्षेपक कारण संगठन बँट’ लागल । प्रवीण भाई अपन योजनानुसार संगठनक मजबूत स्तम्भ (यानी आर्थिक सहयोग देनिहार) के धेलन्हि आ संगठनक कार्यकर्ता केँ दुत्कारि क’ भगबैत रहलाह । ई हरदम अपन गरम रूप अख्तियार केने रहलाह । सार्वजनिक रूपे आभासीय दुनिया पर अपशब्दक प्रयोगमे हिनका महारथ हाशिल छलन्हिये । दिल्लीक युवा हिनकर एहि रूपक उतारा नहि द’ पौलक फलत: किछु दिन अलग संगठन चलौलन्हि आ धीरे धीरे मिथिला मैथिलीए स’ अपना के दूर क’ लेलन्हि । मुदा एहि सब स’ प्रवीण भाई के कोनो फर्क पड़ै बला नहि छलन्हि । फेर नव संगठन स’ जूड़लाह ओकरा तोड़ेलाह । विगत पाँच सालमे निरंतर ई प्रक्रिया हिनकर चलैत रहलन्हि । दिल्लीमे हिनक प्रवेश कालमे लक्ष्य राजनीतीक छलन्हि मुदा धीरे धीरे ई अपन रंग बदल’ लगलाह । मिथिला राज्य निर्माण लेल की की नै केलाह... लक्ष्य मिथिला राज्य निर्माण कम संगठन के तोड़ब बेसी छल । संगठन तूटल कि प्रवीण भाई अपन राजनीतिक चदैरि उतारि सामाजिक ओढ़ना ओढि लेलाह । आब भाई मिथिला के दहेज मुक्त क’ र’ लगलाह... मिथिलामे सामाजिक चेतना लेल रथ पर सबार भ’ क’ भ्रमण क’ र’ लगलाह । अहू ठाम लक्ष्य संगठन के तोड़बे छल । सेह भेल संगठन टूटल कि अपन चद्दैर बदललाह आ अहि बेर मैथिली रंगमंचक विकास दिस अग्रसर भ’ गेलाह । दिल्लीक स्थापित रंग संस्था हिनका बेसी हस्तक्षेप करबाक अधिकार नहि दैत छल तेँ तमशा क’ दोसर दोसर ठामक रंग संगठन के उकसाब’ लगलाह । एत’ तक कि नेपाल – भारतक रंग सौहार्यताक संबंध के कठघरा मे ठाढ़ क’ देलाह । अहू ठाम लक्ष्य दू संगठनक बीच दूरी बढेनाई छल । से जखने पूरा भेल कि प्रवीण भाई एक बेर फेर अपन ओढ़नाक रंग बदलि लेलाह । एहि बेर हिनकर ओढ़नाक रंग मैथिली साहित्यिक विकास भ’ भेल । राता – राती ई आब ई बड़का साहित्यकार भ’ गेलाह । आशाराम बापू बनि एक स’ एक गुणी भाषण हिनका मुँह स’ निकल’ लागल । अहू ठाम हिनकर लक्ष्य पुरने जेना संगठन के तोड़ब छल, से भेबे कयल; एक्को साल नहि भेलहि कि संगठन टुटबाक पराकाष्ठा भ’ गेल । प्रवीण भाई अहू ठाम हुनके पक्षधर छलाह जे आर्थिक संबलता स’ परिपूर्ण छलथि । एहि बीच भाई साहेब अप्पन कतेको व्यक्तिगत गोटी दिल्ली मे फ़िट केलन्हि । बहुत फायदा एहन अछि जाहि स’ दोसरक भविष्य जूड़ल छैक तकर चर्च हम एहि ठाम नहि करब मुदा ओ सब काज राजनैतिक आ आर्थिक पहुँच के बिना दिल्ली मे संभव नहि छल से सबटा फायदा प्रवीण भाई नीक जेना उठेलन्हि । मिथिलाक मान थिक पाग से हमदम पहिरनाहर आदणीय प्रवीण भाई ककरो स’ बेसी मैथिली अपशब्दक प्रयोग केलथि अछि से सार्बजनिक रूपे । खैर ! आब भाई साहेब अपन चदैर फेर बदलन्हि । एहि बेर ई पत्रकारिताक ओढ़ना ओढलन्हि अछि । स्वयंभू बनि पत्रकारिता मे सेहो अपना के श्रेष्ठ घोषित क’ लेलन्हि । दिल्ली, कोलकाता, पटना, दरभंगा आदि शहर मे जे कोनो भाई बहीन लोकनि मैथिली नेट पत्रकारिता मे सालों स’ लागल छलाह तकरा सबके एक्के बेर तरैप सबस’ आगू अपना के ठाढ़ क’ लेबाक लौल मे लागि गेलाह । कुदि पड़लाह अखाड़ा मे मिथिला ज़िन्दाबाद ल’ क’ । अपन एहि नेट पत्रकारिता के माध्यमे उलहन उपराग सेहो देब’ लगलाह जे – “अहाँ अपन अपन समाचार हमरा अपने पठाबू, तखने हम एहि पर छापब ।” यानी नीक जेना पेड न्यूज के वकालत । एकटा टटका उदाहरण देखू जे 21 फरबरी क’ दिल्ली मे तीन ठाम मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य मे आयोजन भेल । दू टा त’ एहन जे एक्के बैनर यानी मैथिली साहित्य महासभा तर मे अलग अलग ठाम आयोजन भेल मुदा आदरणीय प्रवीण भाइयक मिथिला ज़िन्दाबाद मे एक्केटाक रीपोर्टिंग आयल । दोसर के मात्र चर्चा करैत ओकर आयोजक के नीक जेना आरोपित क’ देलाह, जखन कि ओ एहि दुनू आयोजन मे स्वयं उपस्थित नै रहथि । संयोग जे एहू संस्था मे किछु महीना पहिने तक प्रवीण भाई नीक जेना अपन पैठ बनेने छलाह । एक साल पहिलका आयोजनक तस्वीर देख लेल जाय । ओहू समय हम व्यक्तिगत रूपे दिल्लीक दूटा भाई स’ आग्रह केने रहियन्हि जे प्रवीण भाई अहूँ दुनू के तोड़ि देताह, मुदा ई दुनू गोटे हमर गप्प ताहि समय नहि मानलाह आ परिणाम मात्र एक साल मे आगू अछि । मतलब साफ अछि । अहू ठाम प्रवीण जी अपन गोटी फिट केने छथि । जाहि ठाम स’ दूरगामी व्यक्तिगत फायदा हेतन्हि तकरे दिस रहताह ।            

लगभग अपन जीवनक पाँच – छ: साल के लक्ष्य मे एहि दुनू सज्जनक सतत प्रयास स’ दिल्ली मे एक स’ बीस संस्थाक निर्माण भेल । धीरे धीरे सब संस्था मे दिबार जेना प्रवेश क’ कमजोर करैत दिल्ली स’ प्रस्थान केलाह अछि । आब हिनकर दोसर शहर लक्ष्य होयत जेना कानपुर, गुवाहाटी आ मुम्बई । अपन कुटिल बौद्धिकताक बल पर प्रवीण भाई आ किशलय भाई एना बनल रहलाह जेना हिनका लोकनि के कोनो जानकारी नहि छन्हि । एक बेर एहने शंका एकटा युवा साहित्यकार संग चर्च केलहु त’ हुनकर कथन रहन्हि - जे जखन कोनो शहर मे ई दुनू गोटॆ प्रवेश करैत छथि त’ ओहि शहर मे सांस्कृतिक / राजनीतिक बाढ़ि आबि जाइत छैक । सब यैह सोचैत छथि जे – “ ई लोकनि कनी आर पहिने किएक नहि अयलाह ?” मुदा किछु साल बाद ओही शहरक लोक सोचैत अछि जे – “ ई दुनू लोकनि एहि शहर मे किएक अयलाह ??? हिनकर आगमन स’ पहिनेक स्थिति नीक छल ।” यैह स्थिति एखन दिल्लीक भ’ गेल अछि ।

एहि ठाम दिल्लीक एकटा संस्थाक चर्च करब अति आवश्यक भ’ जाइत अछि जे अपन स्वायतता बनेने रहल आ एहि द्वय के हिलकोरा मे अपना के बचेने रहल । ओ अछि मिथिलांगनमिथिलांगनक कर्ता धर्ता लोकनि दिल्लीक एहि बिहाड़ि – बिड्ड़ो स’ अपना के फराक रखलन्हि आ आई अपन मजबूतीक मिशाल बनल छथि । एहन संगठनात्नक परिकल्पना के सलाम होबाक चाही ।

आब जखन कि दिल्ली नीक जेना अपना मे ओझरा गेल अछि, सब युवा लोकनि एक दोसरा के अपन विरोधीक नजरि स’ देख’ लगलाह अछि । दिल्ली मे मैथिलीक आन्दोलन एक बेर फेर कमजोर परि गेल अछि; ई दुनू व्यक्ति एक भ’ एहि शहर स’ निकलि चुकल छथि । किशलय भाईक नारा छल ‘जय मैथिली’ आ प्रवीण भाईक नारा छल ‘मिथिला जिन्दाबाद’। आब ई दुनू व्यक्ति एक भ’ गेलाह अछि तेँ हिनकर नारा सेहो आब समेकित भ’ गेलन्हि अछि । किशलय भाई अपन नारा मे स’ ‘मैथिली’ देलखिन्ह आ प्रवीण भाई अपन नारा मे स’ ‘जिन्दाबाद’ रखलाह । दुनू गोटॆ एक भेलाह त’ हिनकर नारा सेहो एक भेल । आब ई दुनू गोटॆ अहाँ सबहक सम्मुख छथि एक नारा संग “मैथिली जिन्दाबाद” । ई एखन जानकारी नहि अछि जे अगिला लक्ष्य हिनकर कोन शहर छन्हि । ओना कनी बिहंगम दृष्टि स’ रखला पर स्वयं जानकारी परिलक्षित भ’ जायत । अस्तु । एक बेर फेर क्षमा भाई प्रवीण नारायण चौधरी जी आ क्षमा भाई किशलय कृष्ण जी... । 

मुदा दिल्लीक सब युवा भाई लोकनि स’ नम्र निवेदन जे एक बेर फेर स’ एक भ’ जाउ, एना एक दोसरक विरोधी बनि अपन संबंलता के कमजोर नै करू । मिथिलाक प्रत्येक युवाक ओजस्विता, संगठनात्मकता आ कर्मठता अपूर्व छन्हि । आग्रह जे एक दोसर के एक बेर फेर स’ फोन करियौन्ह, एस.एम.एस. पठबियौन्ह, हाल चाल पुछियौन्ह, भेंट – घाँट करियौन्ह । एक दोसरा स’ बढ़ल दूरी कखनो ने कखनो अहूँ के कुहेसैत होयत । फूट डालो, शासन करो बला नीति के हमरा सब के अकानक चाही । संयोगे अछि जे सन् 1640 मे अजुके दिन (01 मार्च) ब्रिटेन के मद्रास मे व्यापार केन्द्र खोलबाक अनुमति भेटल छल, परिणाम की भेल से हम सब बुझैते छी । दिल्लीक मैथिली आन्दोलन के अस्ताञ्चल दिस अग्रसर किन्नहु नै होब’ देबाक चाही

·        


कुल शब्द : 2,482. 

23 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. भाई ! हम सब व्यथित छी । महीनो स' व्यथित छलहु, तखने ने लिखलहुँ ।

      हटाएं
  2. प्रकाश भैया अपनेक इ पोस्ट पर आय हम्मर ध्यान गेल अपने जे भी लिखने छी कटु सत्य अछि किएक जे कुनु ने कुनु मोर पर हमहुँ भुक्तभोगी छी।

    जवाब देंहटाएं
  3. की कही, की लिखी, मार्मिक अभिव्यक्ति प्रकाश जी. जां एना भेलय , त बड्ड ख़राब बात. ओना इ त सत्य जे एखन ओ दुनु ओतेक एक्टिव नै छैथ फेसबुक पर.

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. संजय बाबु हम एक्टिव छी - ओतबे जतेक पहिने रही। हमर सब अभियानो ओतबे एक्टिव अछि। किसलय जी केर ओतेक जानकारी नहि हमरा लंग। आर जतेक आरोप लगेलनि अछि, पूछियौन जँ एक बापक बेटा होएथ तऽ एकहु टा प्रमाणित करैथ।

      हटाएं
    2. संजय बाबु हम एक्टिव छी - ओतबे जतेक पहिने रही। हमर सब अभियानो ओतबे एक्टिव अछि। किसलय जी केर ओतेक जानकारी नहि हमरा लंग। आर जतेक आरोप लगेलनि अछि, पूछियौन जँ एक बापक बेटा होएथ तऽ एकहु टा प्रमाणित करैथ।

      हटाएं
    3. प्रवीण भाई ! के भाषा स' लागि गेल होयत जे ई केहन प्रवृत्तिक छथि । चट द' बापे पर पहुँच जाइत छथिन्ह, जखन कि हम की हमर किछु पाँतिए हिनका पर भारी छन्हि ।

      हटाएं
  4. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    जवाब देंहटाएं
  5. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    जवाब देंहटाएं
  6. प्रिय प्रकाश झा,

    अहाँक लेख पढबा मे स्वयं आरोपी प्रवीण बहुत प्रसन्न भेलहुँ आ हमर सोच आइ आरो वलिस्ठ भेल जे बस अपन कार्य करैत चलू आर दुनिया केँ अपना-अपना दृष्टिकोण सँ ओकरा ऊपर समीक्षा करय दियौक। ओना जानकारी मे कनेक उल्टा-सीधा भेल अछि, ओ एकटा रंगकर्मी केँ मंचीय प्रस्तुतिक समय तकनीकी तौर पर करहे पड़ैत छैक, से अहाँ केलहुँ। जानकारी एतेक जरुर राखू जे प्रवीण नारायण जाहि कार्य केँ जहिया सँ जेना शुरु केलाह, ओ सबटा आइयो ओतबे प्रखरता संग ओहिना चलि रहल छैक। ओ चाहे २००७ केर मई सँ धर्म-मार्ग (आध्यात्मिक अध्ययन केन्द्र) हो, या दहेज मुक्त मिथिला (मार्च ३, २०११) सँ समस्त भारत ओ नेपाल केर समस्त मिथिला (जतय-जतय मैथिलीभाषी रहि रहला अछि) मे अभियान हो, या फेर १० दिसम्बर २०१२ डा. धनाकर ठाकुर द्वारा जन्तर-मन्तर (दिल्ली)क धरना मे युवाक नगण्य सहभागिता सँ आहत आर फेर बिहार गीत मे मिथिलाक अपमान सँ आहत तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार केँ पत्र लिखि ओहि राज्य गीत केँ सुधार करैत ओहिमे जनक-जानकी-भारती-मंडन-विद्यापति-वाचस्पति-गार्गी-मैत्रेयी आदिक भूमि मिथिला केँ ससम्मान संबोधन करबाक अनुरोध पर चुप्पीक बाद 'मिथिला राज्य निर्माण' केर संकल्प ८ जनबरी, २०१३ केँ एकटा 'कन्नारोहट कार्यक्रम, मिथिला चौक, दिल्ली' सँ आरम्भ कय कवि एकान्त द्वारा कैल गेल प्रण जे ४ दिन अनशन करैत मिथिला लेल लड़ब तेकर समर्थन मे २२-२५ मार्च केर अनशन मे २२-२४ मार्च धरि लेल जन्तर-मन्तर पर आयब, फेर अप्रैल ७ वृहत् युवा सम्मेलन सँ साल २०१३ मे हजारों युवा केँ मिथिला व मैथिली लेल जोड़बाक संकल्प पर कार्य करब आ फेर फाइनली १४ अप्रैल, २०१३ केँ विश्व मैथिल संघ, बुरारी केर आयोजन तथा अध्यक्ष हेमन्त झा केर संयोजन मे मिथिला राज्य निर्माण सेनाक गठन.... तदोपरान्त जमीनी कार्यक्रम 'मिथिला राज्य निर्माण यात्रा' केर विभिन्न चरण मे सहभागिता दैत मिथिलाक १५ जिल्ला मे स्वराज्य लेल जागरुकताक प्रसार आर मिथिला राज्य लेल संघर्षशील सब संस्था केँ एक बैनर 'मिथिला राज्य संयुक्त संघर्ष समिति' मे अनबाक वास्ते सफलतम् प्रयास सँ १९ अगस्त, २०१३ केँ दरभंगाक सर्वदलीय सम्मेलन द्वारा डा. बैद्यनाथ चौधरी बैजू केर नेतृत्व मे पूर्व विश्वास निहित करैत अपन संकल्प केर दिशा मे डेग बढायब... आर फेर नेतृत्व करबाक होड़बाजी होएत देखि मिथिला राज्य निर्माण सेना सँ आराम लैत अपन दोसर लाइन केँ नेतृत्व हस्तान्तरण करैत केवल मार्गदर्शक केर भूमिका मे अपना केँ सीमित राखि अपन योगदान निरंतरता मे रखैत, २१ अगस्त, २०१४ केँ प्रो. मायानन्द मिश्र केर प्रेरणास्पद विचार जे हम मैथिल आइयो कमजोर नहि बस बिखड़ल तिल समान यत्र-तत्र पसरल छी ताहि सँ अपन शक्ति ह्रासित भेल बुझैछ सुनला आ गुनलाक बाद 'मैथिली महायात्रा' केर संकल्प जेकर शुभारंभ सितम्बर ९, २०१४ दिल्लीक साईंधाम सँ कएल जाहि मे मुख्य अतिथि डा. देवशंकर नवीन समान महत्वपूर्ण व्यक्तित्व केँ आमंत्रित करबा सँ लैत आरो-आरो विभिन्न कार्य मे कौशल कुमारजीक अनुशंसा पर स्वयं अहाँ (प्रकाश झा, मैलोरंग) केर सहयोग सँ कार्यक्रमक आयोजन आर फेर देशक विभिन्न भाग मे ओहि यात्रा सँ बिखड़ल तिल सबकेँ 'मैथिली' केर गूड़क पाक मे बान्हि रहल छी। एखन धरि कोलकाता, कानपुर, दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, जमशेदपुर, सप्तरी, जनकपुर, सिरहा, मोरंग, गुआहाटी, काशी, आदि कतेको ठाम एहि यात्रा सँ मैथिल समाज केँ संदेश देल जा चुकल अछि जे अपन बिखड़ल शक्ति केँ जोड़ू आर फेर सँ मिथिलाक अस्मिता केँ जगाउ।

    क्रमशः....

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. उँह ! प्रवीण भाई पूरा महाभारते लिख देलाह... ओना हिनकर बायोडाटा नीक छन्हि...

      हटाएं
  7. एतय प्रकाश झा, मैलोरंग यदि हमर गतिविधि सँ दिल्लीक विभिन्न संस्था केँ टूटैत देखि रहला अछि तऽ हुनकर समझ आ सद्भावना केँ बलिहारी देबाक मोन होएत अछि। मिनाप, जनकपुर केर सुनील कुमार मल्लिक भाइ द्वारा लगायल गेल आरोप केँ अपन न्युजपोर्टल पर स्थान देल आ निर्भीक विचार सेहो राखल जे आखिर आमंत्रण हुनका सबकेँ कियैक नहि.... ई बात प्रकाश जी केँ चुभलनि, चुभबे टा नहि केलनि... वरन् ओ काफी पर्सनल होएत हमरा तऽ मानू जेना घोरिकय पीबि जेता ततेक आक्रोश सब रखलैन। हम अपन ऐगला दिल्ली यात्रा मे घोरिकय पीबाक मौका प्रकाश जी केँ देब कहने रही, ताहि अनुरूपे ओतय हुनका संग एक हप्ता प्रतीक्षा करैत भेंट कैल। भेंट भेलाक बाद राग बदलल छल हुनकर। ओ मिडिया द्वारा नाटककर्मीक संघर्ष केँ कोनो स्थान नहि देल गेल मुदा छूछ आलोचना सब करैत अछि, कहियो कियो कोनो कार्य मे सहयोगक भावना नहि रखैत अछि, एना मे फूसिक आलोचना हुनका वर्दाश्त नहि होएत अछि आर हमर ओ समाचार सेहो किछु ताहि तरहक जरल पर नून छींटबाक कार्य केलक से ओ कहलैन। फेर हम सब एक-दोसराक सहयोगी टा बनी आ बेकार मे बिना सरोकार वा प्रयोजन दूसबाक कार्य वा छूछ आलोचना कार्य करबा सँ बची ई सब संकल्प लैत संगे गरमा-गरम चाह-कफी बाहर मे पीबि एक दोसर सँ विदा लेने रही। संयोगवश वरिष्ठ रंगकर्मी शुभ नारायण झा व फिल्म निर्देशक - पटकथा लेखक अनुप कुमार सेहो (बाद मे) संग छलाह। काफी देर तक हम सब सकारात्मक चर्चा कएने रही। परन्तु बाद मे कोनो एक समाचार हमरा मैसेज कय देबाक अनुरोध पर हड़बड़ायल प्रकाशजी पुनः नकारात्मक लैत अपन बेइज्जती मानिकय हमरा व हमर उपक्रम केँ कोनो जोकरक नहि कहैत अपमानित करबा सँ कोनो कसैर बाकी नहि रखलैन। ई हुनकर आदति छन्हि जे पहिने जुत्ता भिजाकय मारू आ 'क्षमा-क्षमा' बेर-बेर करैत रहू। जानथि प्रकाश आ जानय हुनकर धर्म!! हम कि बाजू, कतेक बाजू आ कियैक बाजू!! प्रकाशजी तऽ कमो-समो, हिनकर एक सहयोगी आ रंगकर्म दुनियाक एकटा जानल-मानल अभिनेता 'मुकेश झा, बड़हा गाम, मधुबनी जिल्ला' छथि ओ किछु बेसिये आमिल पीबि लेने छथि। ओ हमर अनेको नाम रखने छथि, हमर बेटीक एडमिशन करेबाक लेल हम किनको 'गोरधरिया' कैल से आ कतेको रास 'पूँजीपति' गतगर मैथिल केर चाटुकारिता करैत अपन जीवन-यापन आदि चला रहल छी से सब बहुते रास रिकार्ड रखने छथि। आइयो कौशल कुमार जे हमरा सँ सुपरिचित छथि, हुनकर वालपर कोढि उन्टेलनि तऽ भैर घर छेड़लनि समान कतेको बेर उल्टी केलैन अछि। अन्त मे हम एक्के टा कविता लिखलः हे उधो! बूरिराजक नहि अन्त!!... आशा नहि, अपितु विश्वास अछि जे आइ न काल्हि एहि संदेह-शक केर दरिया मे उग-डूम-उग-डूम कय रहला भाइ लोकनिक नजरि पर सँ चोन्हरी हँटत। जँ एक बापक बेटा होइथ, ई वा केओ जिनका कोनो प्रकारक आक्षेप प्रवीण नारायण प्रति लगेबाक गांइर मे तागत भऽ रहलैन अछि तऽ एकोटा आरोप केँ प्रमाणित करैथ, सार हम ओत्तहि अपन गरदनि काटिकय हिनका सब केँ नहि देल तऽ हम एक बापक बेटा नहि। रे! जे गलती करय ओकरा होएत छैक भय। जखन हम केकरो गोरधरिया करबे नहि केलहुँ, केकरो चाटुकारिता हमर खूने मे नहि, तखन तूँ कि तोहर सात पुस्त उठिकय हमरा गलत प्रमाणित करय, हम अपन गरदनि ओत्तहि दय देबौक।

    हरिः हरः!!

    जवाब देंहटाएं
  8. एतय प्रकाश झा, मैलोरंग यदि हमर गतिविधि सँ दिल्लीक विभिन्न संस्था केँ टूटैत देखि रहला अछि तऽ हुनकर समझ आ सद्भावना केँ बलिहारी देबाक मोन होएत अछि। मिनाप, जनकपुर केर सुनील कुमार मल्लिक भाइ द्वारा लगायल गेल आरोप केँ अपन न्युजपोर्टल पर स्थान देल आ निर्भीक विचार सेहो राखल जे आखिर आमंत्रण हुनका सबकेँ कियैक नहि.... ई बात प्रकाश जी केँ चुभलनि, चुभबे टा नहि केलनि... वरन् ओ काफी पर्सनल होएत हमरा तऽ मानू जेना घोरिकय पीबि जेता ततेक आक्रोश सब रखलैन। हम अपन ऐगला दिल्ली यात्रा मे घोरिकय पीबाक मौका प्रकाश जी केँ देब कहने रही, ताहि अनुरूपे ओतय हुनका संग एक हप्ता प्रतीक्षा करैत भेंट कैल। भेंट भेलाक बाद राग बदलल छल हुनकर। ओ मिडिया द्वारा नाटककर्मीक संघर्ष केँ कोनो स्थान नहि देल गेल मुदा छूछ आलोचना सब करैत अछि, कहियो कियो कोनो कार्य मे सहयोगक भावना नहि रखैत अछि, एना मे फूसिक आलोचना हुनका वर्दाश्त नहि होएत अछि आर हमर ओ समाचार सेहो किछु ताहि तरहक जरल पर नून छींटबाक कार्य केलक से ओ कहलैन। फेर हम सब एक-दोसराक सहयोगी टा बनी आ बेकार मे बिना सरोकार वा प्रयोजन दूसबाक कार्य वा छूछ आलोचना कार्य करबा सँ बची ई सब संकल्प लैत संगे गरमा-गरम चाह-कफी बाहर मे पीबि एक दोसर सँ विदा लेने रही। संयोगवश वरिष्ठ रंगकर्मी शुभ नारायण झा व फिल्म निर्देशक - पटकथा लेखक अनुप कुमार सेहो (बाद मे) संग छलाह। काफी देर तक हम सब सकारात्मक चर्चा कएने रही। परन्तु बाद मे कोनो एक समाचार हमरा मैसेज कय देबाक अनुरोध पर हड़बड़ायल प्रकाशजी पुनः नकारात्मक लैत अपन बेइज्जती मानिकय हमरा व हमर उपक्रम केँ कोनो जोकरक नहि कहैत अपमानित करबा सँ कोनो कसैर बाकी नहि रखलैन। ई हुनकर आदति छन्हि जे पहिने जुत्ता भिजाकय मारू आ 'क्षमा-क्षमा' बेर-बेर करैत रहू। जानथि प्रकाश आ जानय हुनकर धर्म!! हम कि बाजू, कतेक बाजू आ कियैक बाजू!! प्रकाशजी तऽ कमो-समो, हिनकर एक सहयोगी आ रंगकर्म दुनियाक एकटा जानल-मानल अभिनेता 'मुकेश झा, बड़हा गाम, मधुबनी जिल्ला' छथि ओ किछु बेसिये आमिल पीबि लेने छथि। ओ हमर अनेको नाम रखने छथि, हमर बेटीक एडमिशन करेबाक लेल हम किनको 'गोरधरिया' कैल से आ कतेको रास 'पूँजीपति' गतगर मैथिल केर चाटुकारिता करैत अपन जीवन-यापन आदि चला रहल छी से सब बहुते रास रिकार्ड रखने छथि। आइयो कौशल कुमार जे हमरा सँ सुपरिचित छथि, हुनकर वालपर कोढि उन्टेलनि तऽ भैर घर छेड़लनि समान कतेको बेर उल्टी केलैन अछि। अन्त मे हम एक्के टा कविता लिखलः हे उधो! बूरिराजक नहि अन्त!!... आशा नहि, अपितु विश्वास अछि जे आइ न काल्हि एहि संदेह-शक केर दरिया मे उग-डूम-उग-डूम कय रहला भाइ लोकनिक नजरि पर सँ चोन्हरी हँटत। जँ एक बापक बेटा होइथ, ई वा केओ जिनका कोनो प्रकारक आक्षेप प्रवीण नारायण प्रति लगेबाक गांइर मे तागत भऽ रहलैन अछि तऽ एकोटा आरोप केँ प्रमाणित करैथ, सार हम ओत्तहि अपन गरदनि काटिकय हिनका सब केँ नहि देल तऽ हम एक बापक बेटा नहि। रे! जे गलती करय ओकरा होएत छैक भय। जखन हम केकरो गोरधरिया करबे नहि केलहुँ, केकरो चाटुकारिता हमर खूने मे नहि, तखन तूँ कि तोहर सात पुस्त उठिकय हमरा गलत प्रमाणित करय, हम अपन गरदनि ओत्तहि दय देबौक।

    हरिः हरः!!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सत्त गप्प ओक के अहिना लगैत छैक । प्रवीण भाई ततेक ने तमशायल छथि जे एक्केटा पोस्ट कतेको बेर क' रहलाह अछि ।

      हटाएं
  9. Prakash bhai apnek baat sa dukhi chhi..muda satya eha aichh..abai wala din me ehan type ke lok ke katau maan samman nahi bhettain...hamesha bejjat hetah se hamra lagi rahal aichh..ummid aichh abo sudharai ke prayas kartah..apnek Vibhay Kumar Jha

    जवाब देंहटाएं
  10. Prakash bhai apnek baat sa dukhi chhi..muda satya eha aichh..abai wala din me ehan type ke lok ke katau maan samman nahi bhettain...hamesha bejjat hetah se hamra lagi rahal aichh..ummid aichh abo sudharai ke prayas kartah..apnek Vibhay Kumar Jha

    जवाब देंहटाएं
  11. Prakash Bhai jee ke maithali ke lail gambhirta AA anubhav dekhait aanha ke sab gapp par gahan chintan karab,or e bahoot dukhad

    जवाब देंहटाएं
  12. प्रिय प्रकाश भाई...अपनेक चिंता आ चिंतन स अवगत भेलहुँ। किछु ज्यादे नै बाजब कियाकि आन्दोलनी छी मुदा आहाँक माध्यम स मिथिला आ मैथिल के ई बचन दय रहल छी जे दिल्ली के की सम्पूर्ण हिन्दुस्तान बा विश्व के मैथिल सबके एक सूत्र में जोड़बाक जे हमर परिकल्पना ऎ से पूर्ण होमय। काज सुरु भय गेल अइछ आ एकर एक झलक सबगोटे 21 फेब्रुअरी के देखने होयब, दोसर आ कनी आओर वृहत झलक 20 मार्च'2016 के राजेंद्र भवन (अवसर-मैथिल होली मिलन समारोह, दिल्ली-एनसीआर) में संभवतः भेंटत। सबके साथ लाबय के अनुपम प्रयास सुरु भय चुकल अइछ।
    सबगोटे स आग्रह करव जे हमर आ हमर सहयोगी सबक ई चिरंजीवी प्रयास के सहयोग आ मार्गदर्शन करी।
    अपने सबहक- शरत् कुमार झा
    जय मिथिला- जय मैथिली।।

    जवाब देंहटाएं
  13. प्रिय प्रकाश भाई...अपनेक चिंता आ चिंतन स अवगत भेलहुँ। किछु ज्यादे नै बाजब कियाकि आन्दोलनी छी मुदा आहाँक माध्यम स मिथिला आ मैथिल के ई बचन दय रहल छी जे दिल्ली के की सम्पूर्ण हिन्दुस्तान बा विश्व के मैथिल सबके एक सूत्र में जोड़बाक जे हमर परिकल्पना ऎ से पूर्ण होमय। काज सुरु भय गेल अइछ आ एकर एक झलक सबगोटे 21 फेब्रुअरी के देखने होयब, दोसर आ कनी आओर वृहत झलक 20 मार्च'2016 के राजेंद्र भवन (अवसर-मैथिल होली मिलन समारोह, दिल्ली-एनसीआर) में संभवतः भेंटत। सबके साथ लाबय के अनुपम प्रयास सुरु भय चुकल अइछ।
    सबगोटे स आग्रह करव जे हमर आ हमर सहयोगी सबक ई चिरंजीवी प्रयास के सहयोग आ मार्गदर्शन करी।
    अपने सबहक- शरत् कुमार झा
    जय मिथिला- जय मैथिली।।

    जवाब देंहटाएं
  14. जेहन करनी तेहने भरनी मने जेहन खोजलह हो कुटुम तेहन भेटलह हो कुटुम भाया सभ पापक सजा अहीठाम भेटै छै.

    विदेह सदिखन सापेक्ष बेबहार करै छी। नीक लग नीक आ खराप लग खराप। किसलय कृष्ण आ प्रवीण नारायण चौधरी सभ दिनक खराप छल। आ तही दुआरे 2012मे सभ किछुकेँ देखैत किसलय कृष्ण आ प्रवीण नारायण चौधरीकेँ विदेहसँ बैन कऽ देल गेल। कहबी छै जे नीकक सपोर्ट नीके करै छै आ खरापक सपोर्ट खरापे। ओइ समयमे किसलय कृष्ण आ प्रवीण नारायण चौधरी केर सपोर्टमे दिल्ली, कलकत्ता, बंबइ आर सभ ठामक कुकर्मी संस्था सभ एक भऽ कऽ विदेहक विरोधमे आबि गेला। आबिए नै गेला विरोधक नीच स्तरपर आबि कऽ विदेहक सदस्यक घर-परिवारकेँ सेहो गरिएला। सभसँ बेसी दुखद रहल जे सभ किछु जनितों कलकत्ताक झकाझक धोती-तिलकधारी आ अपनाकेँ सभ्य मानऽ बला एकटा संस्थाक कर्ता-धर्ता सेहो किसलय कृष्ण आ प्रवीण नारायण चौधरीक पक्षमे आ विदेहक विरोधमे आबि गेला।

    खराप लोक खरापे होइ छै चाहे ओकरा जेहन माहौल दियौ। जखन मामिला किछु ठंडाएल तखन किसलय कृष्ण आ प्रवीण नारायण चौधरी अपन गलत काज ओही आदमी वा संस्थाक संग करऽ लगला जे की किछु दिन पहिने धरि ऐ दूनूकेँ विदेहक विरोधमे ठाढ़ केने छलाह। किसलय कृष्ण आ प्रवीण नारायण चौधरी ई दूनू भस्मासुर अछि। जेना गाम-घरमे कुकुर लेल कहबी छै जे "खो पोसनाहरकेँ" तेहने बूझू। 2012मे जहिया विदेह ऐ दूनूकेँ बैन केलक तहियासँ आइ धरि ऐ दूनूक बहुत पोसक भेलै आ ई दूनू हरेक पोसक के खा कऽ बैसि गेल।

    ई तँ विदेह धन्यवादक पात्र अछि जे ओ समय रहैत किसलय कृष्ण आ प्रवीण नारायण चौधरीक चरित्र बुझलक आ ओकरा सार्वजनिक रूपसँ 2012हेमे उजागर केलक मुदा जो रे दिल्ली, कलकत्ता, पटना आ आन ठामक कुकर्मी लोक आ संस्था तों सभ किसलय कृष्ण आ प्रवीण नारायण चौधरीकेँ विदेहक विरुद्ध अनलह आ आब ई दूनू तोरे चिबा गेलौ।

    ई जे भेल से तँ हेबाके छलै चाहे आइ की काल्हि। किसलय कृष्ण आ प्रवीण नारायण चौधरी ई दूनू दोषी अछि मुदा ताहूसँ बेसी दोषी ओ कुकर्मी संस्था ओ लोक सभ अछि जे ऐ दूनूकेँ विदेहक विरोधमे ठाढ़ केलक।

    विदेह किसलय कृष्ण आ प्रवीण नारायण चौधरीकेँ माफी तँ दऽ सकैए मुदा दिल्ली, कलकत्ता, पटना आ आन ठामक कुकर्मी लोक आ संस्थाकेँ ओ कहियो नै।

    आइ साबित भऽ रहल अछि जे जेहन करनी तेहने भरनी मने जेहन खोजलह हो कुटुम तेहन भेटलह हो कुटुम भाया सभ पापक सजा अहीठाम भेटै छै.

    जवाब देंहटाएं
  15. उपर्युक्त आलेख के विरोध मे एक्कोटा कमेंट नहि आयल अछि एखन तक' जखन कि पक्ष मे सैकड़ों । एतेको लोकनि फोन स', एस.एम.एस. स' त' फेसबुक कमेंट मे आलेखक उपयोगिताक पक्ष मे अपन अपन मत देलन्हि अछि । किछु युव खास क' दिल्लीक; एहि आलेख पर चुप छथि वा कि तटस्थ छथि कारण प्राय: हुनका सब लोकन्हि के मंतव्ये स' ई आलेख तैयार भेल अछि । उपर्युक्त संदर्भ मे कतेको चर्चा वर्चा प्राय: सब युवा तूर संग भेल अछि । सबहक एक्के मत जे बिलाड़ि के गरदनि मे घंटी के बान्हत ??? समाजक उत्तरदायित्व स' भागव उचित नहि । आलेख लिखल गेल । आब भाई प्रवीण जी आ भाय किशलय जी अगिया बेताल भेल छथि । कियो कोर्ट मे जेबाक गप्प क' रहल छथि त' कियो पंचैती बैसेताह । उखैड़ मे मुँह देलियै त' मुसड़ाक डर ??? ताहू मे एहन लोक सब स' ??? भाई हद्दे भ' गेल । आगू बढ़ि क' हम नाम नहि लेबनि मुदा इहे लोकनि पूछथि जे दिल्लीक कोन युवा हिनका लोकनिक एहि प्रकारक व्यवहार स' त्रस्त नहि छथि ? ई लोकन्हि स्वयं नाम बाजथि आ हम हिनका लोकन्हि के ओही व्यक्तिक संग हिनका लोकन्हिक संबंध मे भेल चर्चाक प्रमाण दैत छियन्हि । भाई !!! तामस स' बेसी जरूरी अछि अपन एहि प्रकारक दूगामी व्यवहार के त्यागब । अहाँ दुनू गोटे हमर मित्र छी, से हमरा लगैत अछि आ मित्रक काज होइत छैक आगाह करेनाई, से करेलहु अछि । ई अहाँक मोन जे हमरा अपन दुश्मन मानी वा मित्र । हम जे लिखलहु ताहि हेतु कोनो प्रकारक दुविधा मे नहि छी । अस्तु...

    जवाब देंहटाएं