शुक्रवार, 22 मई 2020

मलंगिया जीक शोधदृष्टि


दिनांक : 11 मई, 2020    

- डॉ. प्रकाश झा
[ नाट्याचार्य महेन्द्र मलंगिया जीक अद्यतन पुस्तक ‘प्रबन्ध संग्रह’ 2019क अंतिम त्रैमासिकमे प्रकाशित भेलन्हि अछि । ]   

सिद्धहस्थ नाटककार महेन्द्र मलंगिया जीक अद्यतन पुस्तक वर्ष 2019 ई. मे प्रकाशित भेलनि अछि – प्रबन्ध संग्रह । पिछला कतेको साल स नाटककार मलंगिया जी अपना के शोध दिस उन्मुख क लेलाह अछि । तेरह एकाँकीक संग्रह पुस्तक एक टुकड़ा पाप नाम स प्रकाशित भेल वर्ष 2018ई. मे, कविवर ज्योतिरीश्वर ठाकुर जीक वर्णरत्नाकरक तीन कल्लोलधरिक विश्लेषण शब्दक जंगलमे अर्थक खोज नामक शोध पुस्तकमे केलनि, जकर प्रकाशन वर्ष 2015 ई. अछि । वर्ष 2009 ई. मे मैथिली लोकनाट्यक विस्तृत अध्ययन एवं विश्लेषण नामक शोध पुस्तक प्रकाशित भेल छलनि ।
  
मैथिली साहित्यमे प्रस्तुतिपरक विधाक लेल ई अतिआवश्यक छल जे श्री मलंगिया अपना के एहि दिस मोड़थि । एहि विधा केन्द्रित शोध कार्य बहुत भेल अछि, मुदा जे व्यक्ति स्वयं प्रस्तुतिपरक विधामे संलिप्त छथि, हुनक शोध दृष्टि आम जनक सोझाँ लगभग नहि-ए जेना आयल अछि । अधिकांश शोध-प्रबन्ध अकादमिक दृष्टिए लिखल गेल अछि । जे किलिष्ट अछि, बोधगम्य नहि-ए जेना बुझू ।   

प्रबन्ध संग्रह मे कुल उन्नैसटा आलेख समाहित कयल गेल छैक । पुस्तकक प्रारम्भ प्रबन्ध संग्रहक प्रसंगमे होइत अछि जाहिमे शब्द -- प्रबन्ध, निबन्ध आ शोध के नीक जेना बेकछा क समझाओल गेल अछि । प्राय: एहि तीनू शब्दक अर्थ प्रथम द्रष्टा एक्के रंग लगैत अछि, मुदा तीनू एक दोसर स कतेक भिन्न अछि से एकरा पढ़ला बाद भाँज लगैत छैक । संगहि सब आलेखक पूर्वरंग, पूर्वमे छपल सब आलेखक अंतरकथा-व्यथा, कतेको आलेखक एकस्वरताक कारण आदिक विवरण द अपन निर्भीकता आ शोधकार्यपर आत्मविश्वास केँ परिचय देलथि अछि । प्राय: शोधकर्ता अपन प्रबन्धमे एहन पूर्व खुलासा नहि-ए जेना करैत छथि । एहि संग्रहमे छपल आलेखक रेंज बहुत पैघ रखलथि अछि मलंगिया सर – पहिल आलेख सन् 1972 ई. मे छपल अछि । एहि प्रकारे एहि प्रबन्ध संग्रह केँ कुल सैंतालीस सालक शोध संकलन कहल जा सकैत अछि ।             

संग्रहित आलेखमे क्रमश: विद्यापतिक उगना, लोकनाट्यक कसौटीपर सामा-चकेबा, एकटा ठिठुरल शहर मधुबनी, सामाजिक परिवर्तनमे नाटकक स्थान एवं मैथिली नाटक, प्रतिनायक चूहड़मलक मूल्यांकन, सलहेशक काल निर्धारण, राम – सिया कीर्तन, वर्णरत्नाकरक सम्पादन कार्य चलैत रहए, मिथिलामे टोना, लोककथाक जन्म आ विश्लेषण, आँखिक देखल आ कानक सुनक : सलहेश लोकनाट्य, सब गुड़ गोबर भावा, मिथिलाक राम, मैथिलीक पारंपरिक सांस्कृतिक अभिव्यक्ति, पैण्डोराक बक्सामे हाथ दैत भुवनेश्वर प्रसाद गुरुमैता, भारत – नेपालक नाट्य संबंध, अंदाजे गीता भगवान उवाच:, अहाँ सन दोसर देव नहि एवं अडी डीठि वाङ्का पीठी अछि ।


एहि प्रबन्ध संग्रहक सबस पुराण शोधालेख विद्यापतिक उगना अछि, जे वर्ष 1972 ई.मे तात्कालीन स्थापित पत्रिका मिथिला मिहिरमे प्रकाशित भेल छल । एहि आलेखमे  मलंगिया जी विद्यापतिक उगनाकेँ सामाजिक मान्यता, शोध मान्यता, मनोवैज्ञानिक मान्यता आ पूर्वमे उपर्युक्त विंदु आधारित लगभग सब रचनाक संदर्भ लैत ओकरा व्यावहारिकता आ ओकर अनुक्रमणियताकेँ संयोजित क प्रतिस्थापित केलथि अछि । राजा शिवसिंहकेँ युद्धभूमि सँ भागि गेलाक बाद छद्म वेष बनाक विद्यापति संग कोनो गुप्त मंत्रणा होयबाक सूत्र केँ पकड़लनि अछि । उगना नामकरणपर सेहो – यजुर्वेद स भाषा विज्ञानक कसौटीक संग संग मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण तक अपनौलनि अछि । अंतमे विद्यापतिक रचना, ऐतिहासिकताक क्रम, राजनीतिक परिस्थित, मनोवैज्ञानिक कारण तथा कतेको एहन तथ्यकेँ संदर्भित करैत उगनाकेँ शिवसिंह होयबाक दिस संकेत केलाह अछि । एहि बीच यदा कदा विद्यापतिक रचनापर शोध होइत रहल अछि, कतेको आलेख प्रकाशित भेल अछि, मुदा विद्यापतिक रचनाक संग संग हिनक जीवनपर शोध संधानल आलेखक एखनो बहुत अभाव अछिए । एहि बीच सुखद सूचना अछि, जे प्रो. कलमानन्द विभूति आ प्रो. देवशंकर नवीन गंभीरता संग विद्यापतिपर शोध क रहलाह अछि, हुनकर सबहक शोध प्रपत्र निश्चित एहि आलेखक अगिला पौदान होयत ।   

किछु उत्साहित शोधार्थी सामा – चकेबाकेँ लोकनाट्य कहैत छथि, कियो लोकनृत्य, लोककथा आदि । जिनका जेना मोन होइत छनि से समा – चकेबा के तहिना स्थापित केलाह अछि । एहि ल समाजमे बहुत भ्रम पसरल छल । एकरा ध्यानमे लैत मलंगिया जी निराकरण दिस बढ़लैत अछि । सामा –चकेबामे गाओल जाय बला गीतक अध्ययन विश्लेषण केलाह अछि । सामा – चकेबा के लोकनाट्य माननिहारमे श्री ताराकान्त झा, डॉ. प्रेमशंकर सिंह, डॉ. प्रफुल्ल कुमार सिंह मौन’, डॉ. धीरेन्द्र आदि अपन-अपन तर्क देने छथि, जकर पड़ताल सेहो एहि आलेखमे अछि । अंतत: महेंद्र मलंगिया सामा – चकेबा के मिथिलाक एक पूजनोत्सव मानलनि अछि, जाहिमे बहिन भाइक दीर्घायु होएबाक कामना करैत छथि ।  

कोनो एकटा शहरक बहन्ने शोधालेख लिखब सेहो रेखाँकित करबाक विषय थिक । कोनो शहर कोना बनैत अछि, की की ओकर कमजोरी आ गुण थिक से एहि आलेख एकटा ठिठुरल शहर मधुबनी फरिछियाइत अछि । कोनो शहरक एहन स्थिति कहियाक छल सेहो जनतब होयब एहन आलेख लेल महत्वपूर्ण होइत अछि । जकर अभाव एहि आलेखमे अछि । मात्र अनुमान लगाओल जा सकैत अछि, जे ई आलेख मिथिला मिहिरमे छपल छल आ आलेखमे सन् 1981 ई. जनगनाक चर्च होइत अछि, ताहि हिसाबे एहि आलेखमे वर्णित मधुबनीक स्थिति 1983-86क आसपासक लगैत अछि । आब शहर बहुत बदलि गेल अछि, जँ एक दू पाराग्राफ आर बढाओल जाइत त एकर समकालीनता स सेहो अवगत भेल जा सकैत छल ।  ओना किछु तथ्य जे तहिया छल से आइयो प्रासंगिक अछिए । जेना – मैथिल लोकनि बेटाक अपेक्षा बेटीकेँ बहुत कम मानैत अछि, नाटकक मामलामे मधुबनी शहर अति भुसकौल अछि, एहिठाम साहित्यिक पोथी भेटब मुश्किल अछि, अछैत मंदिर आ पूजा पाठ होइतो सीता अपना नैहरमे मैथिलीए भाषा जकाँ उपेक्षित रहि जाइत छथि आदि आदि ।

सामाजिक परिवर्तनमे नाटकक स्थान एवं मैथिली नाटक विषयपर लिखबासँ पहिने मलंगिया सर समीक्षाक तीनू रूपक चर्चा क देने छथि, जाहिमे कोकिल, काग आ हंस समीक्षा होइत अछि । उपर्युक्त आलेखलेल काग समीक्षाक रस्ता अपनौलनि अछि । जाहिमे रचनाक केवल दोषपर आँगुर राखल जाइत अछि । एहन समीक्षा करबामे बहुत खतरा रहैत छैक, जे मैथिलीमे बहुत कम लोक हिम्मत करैत छथि । अपन शोध आलेखकेँ निर्भीकता पूर्वक बेबाकी स रखबाक कलासँ आकण्ठ डूबल मलंगियाजी मात्र बारह पृष्ठक आलेखमे लगभग टीसटा नाटक आ बीसटा नाटककारक पड़ताल केलथि अछि । ई आलेख नाटक लिखनिहार लेल पथ प्रदर्शक सिद्ध होयतनि । रचनाक संबंधमे सब त्रुटिकेँ उजागर केलाक बाद अंतमे इहो कहैत छथि – “जो देख्या सो लेख्या, मम दोष न दीयताम   

राजा सलहेश केन्द्रित तीनटा आलेख एहि संग्रहमे संकलित अछि । मलंगिया सरक कहब छनि जे सलहेशक चर्च बिना चूहरमल्लक नहि भ सकैत छैक । ई दुनू दू क्षेत्रक समसामयी राजनेता छलाह । दुनूक बीच प्राय: राजनीतिक लड़ाई चलैत छलनि । चूहरमल्ल दोसर क्षेत्रक छल, तेँ मिथिलाके साहित्यमे ओकरा कमजोर देखेबाक लेल प्रतिनायकके रूपमे प्रतिस्थापित क देल गेल । संगहि अपन शोधमे सलहेशक काल निर्धारण आठम शताब्दीक पूर्वाद्ध मानलनि अछि । आँखिक देखल आ कानक सुनल : सलहेश लोकनाट्य आलेखमे एकटा लोकनाट्य लेल जतेक तत्त्वक आवश्यकता होइत अछि तकर पड़ताल कयल गेल अछि ।   
        
राम – सिया कीर्तन केन्द्रित शोधालेख कतेको गीरह के खोलैत अछि । राम आ सीता संबन्धित कतेको प्रश्नक उत्तर शोधमे निहित अछि । कतेको प्रश्न सेहो ठाढ़ करैत छथि जेना – विद्यापति रामके संबंधमे एक्कोटा रचना किएक नहि कयलथि ? मिथिलामे रामक व्यापकता अठारहम शताब्दीक बाद भेलनि अछि । जनकपुरक स्थापना कोना भेल । आदि आदि ...
  
मैथिली साहित्यमे शोध विधा लेल सबस दुरूह आ महत्वपूर्ण लक्ष्य, जकरा मलंगियाजी बेधलथि आ सुधा निकालबाक लेल यश पौने छथि ओ थिक कविवर ज्योतिरीश्वर कृत वर्णरत्नाकरक अध्ययन आ ओकर शाब्दिक विश्लेषण । एहि लेल शब्दक जंगलमे अर्थक खोज नाम स पुस्तक सेहो प्रकाशित छनि । अपन प्रिय विषय केन्द्रित तीन पुस्तकक समीक्षाक बहन्ने शोधालेख तैयार करबाक कला मलंगियाक एहि तीनू आलेखके अध्ययन सँ अभरैत अछि । पहिल पुस्तक प्रो. आनंद मिश्र / पं. गोविंद झाक वर्णरत्नाकरके समीक्षा लेल शीर्षक आलेख अछि वर्णरत्नाकरक सम्पादन कार्य चलैत रहए । दोसर पुस्तक  मिथिला का सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवनके समीक्षालेल लिखलनि अछि सब गुड़ गोबर भावा। आ शीर्षक पैन्डोराक बक्सामे हाथ दैत भुवनेश्वर प्रसाद गुरुमैता छनि जे डॉ. भुवनेश्वर प्रसाद गुरुमैताक पुस्तक वर्णरत्नाकरमे चित्रित पूर्वमध्ययुगीन सांस्कृतिक भारत लेल लिखलथि अछि । अपन तर्कमे पहिल पुस्तकके किछु त्रुटिक संग आवश्यक मानलनि अछि, मुदा बाँकी दुनू पुस्तकके अपन शोध तर्क स नीक जेना खारिज क देलनि अछि ।  

प्रबन्ध संग्रहक बाँकियो आलेख सब शोध प्रक्रियाक तराजूपर तौलल गेल अछि । बहुत दिन बाद प्रबन्ध संग्रहक कोनो एहन पुस्तक जे रुचिगर लगै, शोध स भरल होइ मुदा बोझिल नहि बुझाय, जकरा अपन व्यक्तिगत पुस्तकालयमे आँखिक सोझाँ राखल जाय, से थिक महेंद्र मलंगियाक ई प्रबन्ध संग्रह   


पुस्तकक नाम: प्रबन्ध संग्रह
लेखक : महेन्द्र मलंगिया
ISBN: 987-81-931466-2-0. 
प्रकाशन वर्ष : 2019; कुल पृष्ठ : 216; मूल्य : 400 टाका
प्रकाशक : मलंगिया आर्ट्स, नई दिल्ली – 86.
संपर्क  : पॉकेट – बी – 05, मकान नं. 358-359, सेक्टर – 03, रोहिणी, नई दिल्ली – 32.
मो.: 09560306681, 09312919334.
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- डॉ. प्रकाश झा ( पीएच-डी.; नेट; सीनियर फेलो, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार )
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, बहावलपुर हाउस, भगवानदास रोड, नई दिल्ली – 01.
मो. + 91 9811774106, फोन : 011 23389138.




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