बुधवार, 28 अप्रैल 2021

ऋषि बशिष्ठ जीक ‘सिया’ के सकल देखैत

मर सभहक पीढ़ीक रंगकर्मीमे किछुए व्यक्ति एहन भेलाह, 

जिनका मैथिली साहित्यसँ सहो आकर्षण भेलन्हि । संगहि ई लोकनि साहित्य सृजनमे सेहो समर्पणसंग योगदानक’ रहलाह अछि । एहन रंगकर्मीमे प्रमुख नाम छथि - ऋषि बशिष्ठ । हमरा लेल गौरवबोध अछि, जे मैथिली रंग संसारक हमर प्रथम मित्र छथि ऋषि बशिष्ठ । तेँ हिनकर सृजन यात्राक हम अपनाकेँ प्रत्यक्षदर्शी मानि गौरवान्वित होइत छी ।


 

अपन बाल्येवस्थासँ रंगमंचपर चढ़निहार ऋषि बशिष्ठ; विभिन्न रंग संस्थासंग जूड़ि आगू बढ़ैत नाट्यशास्त्रमे एम. ए. तक दक्षता प्राप्त छथि ।  जहियासँ साहित्य रचना दिस अग्रसर भेलाह त’ अपन शुरुआत बाल

साहित्यक लेखनस’ प्रारंभक’ कथा लेखन, उपन्यास लेखन, सम्पादन, शोध-आलेख स’ बढ़ैत बढ़ैत नाटक लेखनधरि पहुँचलाह अछि । अद्भुत हास्य-व्यंग क्षमताक प्रत्युत्तरकर्त्ता ऋषि बशिष्ठक रचना-सौष्ठव हिनक सब विधामे लक्षित होइत छन्हि ।

 


साल 2007 स’ हिनक रचनाक पाठन, अध्ययन, विश्लेषण करैत रहलहुँ अछि । जहिना हिनक रचना मिथिलाक ग्राम्य-जीवनक ‘माटि परक लोक
क मुखसँ निकसल मनलग्गू शब्द संयोजनसँ प्रारंभ होइत छन्हि तहिना ओ अपन संपूर्णतामे कखनो पाठकक मोनके आह्लादित करैत अछि, कखनो उद्वेलित करैत अछि, कखनो तरंगित करैत अछि त’ कखनो व्यंगवाणिसँ अंतस्थलके बेधैतो अछि । यानी बहुत दिन धरि अपन धप्पा पीठपर थोपने रहैत अछि ।   

 


हिनक अद्यतन रचनामे ‘कलश यात्रा’ नामक उपन्यास हिनक लेखन समृद्धिकेँ उत्कृष्ठता दिस तीव्र गतिसँ बढबैत अछि । तहिना हिनक पूर्व प्रकाशित हास्य – व्यंग्य नाटक ‘बाबा दंडोत बच्चा जय सियाराम’ खूब आकर्षक छन्हि । गाम – गाम एहि नाटक प्रदर्शन भेल अछि आ वर्तमानमे सहो बहुत माँग छैक  

 

आब हमरा सभक सोझाँ ऋषि बशिष्ठ जीक नव रचना नाटकक रूपमे ‘सिया के सकल देखि’ आयल अछि । ई नाट्य रचना मिथिला समाजक गाम – गाम आयोजित रामलीला कम्पनीक आयोजनक बहन्ने निर्मित भेल अछि । गाममे महीना भरि आयोजित रामलीलाक दौरान गामक बनैत – बिगडैत स्थिति – परिस्थितिके सुंदर नाटकीय ढंग स’ समायोजित कयल गेल अछि एहि नव कृतिमे । नाट्य लेखनक कठिन प्रारूप यानी – ‘नाटक के भीतर नाटक’ युक्तिक अद्भुत सूत्र – संयोजनक परिणति अछि ‘सिया के सकल देखि’ ।

 

मास धरि चलैत ‘रामलीला’ टीममे की की घटैत अछि, गाममे कोना – कोना आयोजन होइत अछि, रामलीलाक सदस्यक बीच केहन बात – व्यवस्था बनैत अछि, गामक लोक आ रामलीला टीमक बीच कहेन संबंध स्थापित भ’ जाइत अछि, रामलीलाक संदर्भमे गामक  विभिन्न अवस्थाक लोकक बीच कहेन कहेन चर्च – र्च शुरू भ’ जाइत अछि, विशेष क’ महिला समुदायमे आदि – आदि परिस्थितिके बान्हबाक प्रयास कयल गेल अछि उक्त नाटकमे ।  



नाटकमे कखनो रामलीलाक दृश्य उभरैत अछि त’ कखनो गामक दृश्य । सब दृश्य एक दोसर स’ तेनाने गुम्फित होइछ जे एक दोसरक पूरक भ’ जाइत अछि । इएह एहि नाटकक खासियत अछि । नाटक प्रेक्षक आ पाठकके कखनो रामलीलाक रामायणक रसास्वादन करबैत अछि त’ कखनो अपन गामक वर्तमान स्थितिक दर्शन करबै अछि । सीताक दू रूप – एकटा जनकपुरधामक आ श्रीरामक सीता दोसर गामक वर्तमान सीता; दुनू मानसिक सोचकेँ अनुभव करबाक मौका दैत अछि ई नाटक ‘सिया के सकल देखि’।

 

नाटक  त’ देखैमे छोट लगैत अछि, मुदा हमरा विश्वास अछि जे मंचनमे ई बहुत विस्तारित होयत । लेखक अपन एहि छोट सन नाट्यकृतिमे बहुत बेसी पात्रकेँ समावेसित कयने छथि, तेँ प्रथम दृष्टया लगैत अछि’ जे एहि नाटकक मंचन लेल पैघ समूहक आवश्यकता होयत, मुदा गंभीरतास अध्ययनक बाद, से निराधार लगैत अछि । हँ ! लेखक चुँकी स्वयं वरिष्ठ रंगकर्मी छथि, तेँ हिनक रचना सहो निर्देशक लेल एक प्रकारक चैलेंज उपस्थित करैत अछि ।


मैथिली रंगमंच लेल ‘सिया के सकल देखि’ नाटक बहुत पैघ आमद अछि । आब निर्देशक लोकनि बेसी स’ बेसी एकर मंच तैयार क’ समाजक सोझाँ अनताह से विश्वास अछि । नाट्यालेखक भाई ऋषि बशिष्ठ केँ बहुत बहुत बधाई ।

 

डॉ. प्रकाश झा

निदेशक; मैलोरंग रेपर्टरी, दिल्ली.  

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पुस्तक : सिया के सकल देखि (नाटक लेल भूमिका)  

लेखक : ऋषि बशिष्ठ

कुल पृष्ठ : 54; मूल्य : 108 टाका

प्रकाशक : अनुप्रास प्रकाशन, मधुबनी, बिहार ।

 


 

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