रविवार, 13 मार्च 2022

पंगु दृष्टिए ‘पंगु’ के निहारैत पंगु साहित्य समाज

किछुए साल पहिने हमर सबहक किछु ओजस्वी मित्र लोकनि भारत सरकारक संस्था साहित्य अकादेमी के पंगु संस्था घोषित करैत एकटा तथाकथित सशक्त संस्था ‘समानांतर साहित्य अकादेमीक’ निर्माण केलनि । अफरातफरी मे पंगु भेल साहित्य अकादेमीक ‘पंगु सम्मान’ के निम्न स्तरीय कहि नकारैत, एकटा सबल सम्मान ‘समानांतर साहित्य अकादेमी सम्मान’ के घोषणा कयल गेल । एहन सबल आ निश्पक्ष प्रथम ‘समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान’ स’ सम्मानित भेल रहथि आदरणीय श्री जगदीश प्रसाद मण्डल । हमरा जनैत एहि समानान्तर अकादेमीके शायद दोसर मैथिली साहित्यकार फेर नहि भेटलनि, जिनका एतेक पैघ सम्मान स’ सम्मानित कयल जानि । श्री जगदीश बाबू पहिल आ अंतिमे बुझू ।

 

जहिया भारत सरकारक पंगु घोषित साहित्य अकादेमीक अकादेमी सम्मान लेल श्रीमान जगदीश प्रसाद मण्डल जीक नामक घोषाणा भेलनि तअनयासे मोन पड़ि गेल समानांतर साहित्य अकादेमी संस्था द्वारा प्रदत्त हिनक सम्मान । विचार अभरल जे जाहि साहित्यकार केँ एतेक पैघ सम्मान प्राप्त भैये गेल छलनि से आब तथाकथित पंगु साहित्य अकादेमीक ई तुच्छ  सन सम्मान किएक आ कोना लेताह ? अही पंगु सम्मानक एवज मे तहिनका मैथिली साहित्यक सबसपैघ सम्मान सस्म्मानित कयल गेल छलनि । ई तओहिना भेल जेना शहनाई वादक पं. बिस्मिल्ला खान के जखन सैंसे विश्व ससम्मान भेट गेलनि, देशक सर्वोच्च सम्मान भारत रत्नतक भेट गेलनि तखन हुनका बिहार सम्मानदेलकनि । तेहने दोसर उदाहरण ई सम्मान लागल ।

 

मुदा हौ बाबू ! हद्द ततखन समाचार पढि कलागल जे पूर्वमे घोषित पंगु साहित्य अकादेमी श्रीमान जगदीश प्रसाद मण्डल जी केँ हुनकर लिखल पंगुउपन्यासे के सम्मान देलकनि अछि । मतलब दूटा पंगु एक संग सोझा आयल ।

 

पूर्वमे साहित्य अकादेमी सम्मान के घोषणा सदू – तीन मास पहिने आ घोषणाक दू – तीन मास बाद धरि साहित्य समाजमे एहि सम्मानक धम्मक रहैत छल । पुरजोर गहमा गहमी । कियो रुष्ठ तकियो प्रसन्नचित्त । कियो ताल ठोकथि तकियो अप्पन सशक्त रचना केँ आद्र दृष्टिए तकैत । अलगम – अलग साहित्य खेमा मे अलग अलग समीकरण पर चर्च वर्च । अनकर सोंगर पर नाम कमेनिहार साहित्यकार लोकनि सेहो अपन कांख तर बैसाखी फँसा, तनि कठाढ़ भनिर्णायक लोकनि के होलियाबैत रहैत छलाह । कतेक गोटे तहुनकर होलियेनाइक भाषा के कारण मैथिली साहित्यकार द्वारा चानन लगा साहित्यिक खेमा के उच्च पद पर आसीन तक भजाइत छलाह । मुदा, एहि बेर सब चुप्प... नि:शब्द । पूर्व जेना – तेना किछुओ नहि भान लागल । फेसबुक सन साहित्यिक अखाड़ा रणभूमि पर सेहो पंगु बनल पहलवान सब पंगुलेल बधाई शब्द सकनी आगू अशेष बधाई मात्र तक पहुँच सकलाह ।  एहन चुप्पी किएक ?  यदि आइ सम्मानक आगा कथाकार अशोक, सुभाष चंद्र यादव, श्रीनिवास, तारानंद वियोगी, प्रो. देवशंकर नवीन’, वीभा रानी, महेंद्र मलंगिया, महेंद्र नारायण राम, वीरेंद्र मल्लिक आदि मे सकिनको नाम रहितनि तखन की साहित्यक मार्केट गरमायल नहि रहितै ? कियो ब्राह्मणवाद कहितथि, कियो पचपनियाँ, कियो चमचयि, कियो झाँपन आदि आदि संज्ञा संग सोझाँ अबितथि । सेहो सब चुप्प... ।

 

मुदा, ‘पंगुक रचनाकारक सोझाँ सभ गोटे पंगुए बुझि पड़लाह । समानांतर साहित्य अकादेमी के सृजक लोकनि सेहो पंगु बनि पंगु साहित्य अकादेमीक सम्मान लतृप्त भगेलाह । समांनांतर सम्मानक गाँझ आब कोठी कान्ह पर... । ई पंगु शब्द अपन व्यापकता मे कतेको गोटेक पंगुपन के देखार कदेल ।

  

अही बेर हिंदी भाषा लेल साहित्य अकादेमी सम्मान हथियेनिहार श्री दया प्रकाश सिंहा जी राजा अशोक लेल अपन टिप्पणी सबेस चर्चा अर्जित कयलनि । अतनुसार साहित्य अकादेमीक मैथिली भाषारूपी रथ के समंवक श्री अशोक सर एवं हुनकर सारथी लोकनि तेहन ने समधानि कअविचल झटहा फेकलाह से सम्पूर्ण मैथिली साहित्य समाज नीक जेना पंगु बनि अपन पुआरक गद्दा सउठि नहि सकलाह । गजब शॉट लागल... ।

 

एहि पंगु सपंगुआयल फगुआक माहौल मे एकटा विंदु आरो स्थापित भेल अछि । वर्तमान मे मैथिली साहित्यक स्थापित साहित्यकार, जिनका हाथमे मैथिलीक सबसपैघ झंडा छनि यानि साहित्य अकादेमीक मैथिली परिषदक कंवेनर प्रो. अशोक अविचल जी सत्यापित कदेलनि अछि जे ई पंगु उपन्यास बाबा यात्री जीक बलचनमा सदू धाप आगूक रचना थिक । एहि तथ्य के गीरह बान्हि, अपना बाँहि पर जंतर बना लटकालौथ पहलवान साहित्यकार लोकनि आब । हिनका सबहक सबटा रचना पंगु बनि गेलनि अछि आब । आजुक तारिख सहिनक रचना श्री जगदीश प्रसाद मंडल जीक रचना पंगुतौलल जेतनि । जेना प्रो. अशोक अविचल जीक रचना पंगुपाछू छ्नि आ कि पंगुआगू । तहिना आनो साहित्यकार लोकनिक रचना सेहो ।

 

एखन तक पंगु... पंगु... पंगु पढैत पढैत अहूँ लोकनि पंगुआ लेल होयब । तेँ सबसएक बेर आग्रह जे तथाकथित पंगु साहित्य अकादेमी ससम्मानित एहि पंगु उपन्यास के अवश्य पढी । हँ ! हिनकर पोथी बाजारमे नहि भेटत, विशेष आग्रह कयला बादे एकर प्रिंट निकालल जायत आ तखने अपनेक हाथ आओत ई पंगुउपन्यास ।

 

पंगु उपन्यास के सम्मान देला बाद साहित्य अकादेमी आ पंगु लेल सम्मान ग्रहण कश्री मंडल जी समामांतर साहित्य अकादेमी के अवश्य पंगु घोषित कदेलाह अछि ।

 

जय हो पंगु उपन्यासक, जय तो पंगुक रचनाकारक, जय हो पंगुके चयनकर्ताक, जय हो पंगुरूपे पूर्व मे घोषित साहित्य अकादेमीक, जय हो आब पंगु बनल समानांतर साहित्य अकादेमीक आ अंतमे जय हो पंगु बनल मैथिली साहित्यकारक ।

 

अस्तु; हमरा व्यक्तिगत रूपे ने आदरणीय श्री जगदीश प्रसाद मण्डल जीक विद्वता पर कोनो शंखा अछि, ने आदरणीय श्री अशोक अविचल जी आ सम्मान चयन कर्ता पर कोनो शंखा अछि आ ने पंगुउपन्यासक पात्रता पर संदेश अछि । हँ ! समानांतर साहित्य अकादेमी आ ओहि सउपजल स्थिति – परिस्थिति पर अवश्य दृष्टि अछि ।

 

आब हम अपना पर पंगु वाण प्रहार सबचबाक लेल सेहो पंगु कवच धारण कलैत छी । उम्मीद अछि ओ लोकनि जे एखनो तक अपना के एहि पंगुपन ससुरक्षित रखने छथि से अवश्य वक्र दृष्टिए कोनो ने कोनो ईमोज़ी रखताह ।

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