सोमवार, 21 मार्च 2022

भाई श्रीधरम जी केँ अग्रिम शुभकामना संग बधाई

 

बधाई... बधाई... बधाई...

भाई श्रीधरम जी केँ अग्रिम शुभकामना संग बधाई

जहिना हम कहने रही तहिना श्री रमण कुमार सिंह जीक होलीक मालपूआ खेलाक बाद श्रीधरम भाई भंगियाल मोने हनि कलिखलाह आ अगिला तीन-चारि साल लेल दिल्लीक प्राय: सभ आगामी आयोजनक मुख्य अतिथि / मुख्य वक्ता / मुख्य विमर्शकर्ताक कुर्सी हथिया लेलनि अछि । तेँ भाई केँ हार्दिक शुभकामना संग बधाई ।  

पिछला कतेको साल सअंतिका सन श्रेष्ठ पत्रिकाक सैकड़ो पेज के अपन ब्राह्मण विरोधी रचना सभरनिहार मित्रवर श्रीधरम जीकेँ एखन तक श्री ललितेशजी के छोड़ि कियो संज्ञानमे नहि लैत छलनि । कतेको बेर मैथिलीमे महंथबादके आरोप लगबति लगबति थाकि गेल छलाह । कतेको गोटे हिनका लेल तरह तरह सपीच आ गेंद बदलि बदलि कबैटिंगो केलाह मुदा कोनो असरि नहि भेल छल ।

मुदा, आब एकहि झटहा के तेना ने समधानिकमारलाह अछि जे आगामी तीन – चारि साल तक राजधानीक सभ कुर्सी के श्रीधरम जी शोभायमान करताह से सुनिश्चित अछि ।  तेँ भाई के बहुत बहुत शुभकामना ।

भाई ! अपनेक एहि आलेख सँ बहुत ज्ञान हमरा सन असाहित्यिक लोक के सेहो भेटलैक अछि । आभारी छी । अपनेक कहब अछि जे –  “असल मे मैथिलीक समकालीन स्त्री-लेखनक लेल जाहि स्त्री-संवेदना सं युक्त आँखि के जरूरत छै से समकालीन मैथिलीक बौद्धिकी लग नहि छै । जाहि मे ललितेश मिश्र आ रमण कुमार सिंह सेहो शामिल छथि” ।

हमरा विश्वास अछि जे अपनेक ग्रामर केँ आब सब समीक्षक गीड़ह बान्हि लेताह जेना ‌ -

स्त्री लेखन के समीक्षा लेल स्त्रीयैन आँखिक जरूरत छैक । जेना श्रीधरम भाई लग छनि, तहिना दलित लेखन के समीक्षा लेल दलितैन’, पुरुषक लेखन के समीक्षा लेल पुरुषैन’, बाल लेखन के समीक्षा लेल बलकैन’, महानगरक लेखन के समीक्षा लेल महानरियैन’, गामक रचनाकारक लेखन के समीक्षा लेल गमैन आँखि होबाक चाही । श्रीधरम भाईक एहि फर्मूलाक अनुसार तआरो आगू बढ़ल जा सकैत अछि, जेना मधुबनीक रचनाकारक रचना मधुबनियैन आँखिए देखल जाय तदरभंगाक रचनाकारक लेल दरभंगियैन’, सहरसाक लेल सहरसियैन’, नेपालक रचनाकार लेल नेपलियैन आँखिए देखल जेबाक चाही । अहिना जातिगत रचनाके सेहो ब्राह्मनियैन’, ‘कायस्तियैन’, ‘यादबियैन’, ‘राजपुतियैन आँखिए देखबाक चाही । भाई यौ ! हमरा कनी ओझरौठी बुझा रहल अछि । अहाँक एहि फार्मूला के हिसाबे सुपौलक कोनो दलित स्त्रीक रचनाकारक रचनाके कोन हिसाबे समीक्षा करक चाही ? अहाँक फार्मूला के हिसाबे तएहन रचनाके एक संग सुपौलियैन + दलितियैन संग स्त्रीयैन नजरिक जरूरत हेतैक ने ?

धत्त... अहाँ सन एतेक नजरिक चश्मा कअनताह  ई ललितेशजी, रमणजी, रमेशजी, रमानंदजी, कमलानंद विभूतिजी आदि लोकनि । अपनेक सुझाव हिनका सब लेल बुझू जे रामवाण छनि । आब लिखैत रहथु अपन चश्मा बदलि बदलि क

भाई श्रीधरमजी, अहाँक तामश उचिते अछि । पिछला किछु साल सप्राय: सब कविता पाठमे अहाँक परम मित्र रमण कुमार सिंहजी अपन चारि पाँतिक कविता लपहुँच जाइत छलाह । अपनेक एतेक पैघ पैघ लिखल कथाक वाचन लेल कोनो आमंत्रण नहि । कारण कविताक आयोजन तसप्ताहमे तीनटा भजाइत छैक, आ कथाक तकोनो अकादेमी कसकैत अछि । नीक केलहु... हनि कलिखलहुँ... आब करैत रहथु रमणजी रचना... स्त्री विरोधी रचनाकार ससंग्यापित कनीक जेना अपने हिनक रचनाक हत्या केलहु अछि भाई... बधाई... ।

रहलाह श्री ललितेश जी तहुनको पर अहाँ बहुत दिन सकनखरल रही, जहिया ओ अपन तीन तीनटा किताबक लोकार्पण लेल प्रेस क्लबमे अहाँके कतेको दिन सबजबाक लेल आमंत्रित कयने रहथि आ आयोजनमे बजबाक मौका नहि देलनि । चोट तहुनको देब जरूरी छल । भाई, अहाँक आँखि धोखा कोना खा गेल हमरा बेरमे ? भाई, हम पुरुख छी ने यौ .., हमरा तकम सकम अपन फॉर्मूला के हिसाबे पुरुखाह आँखिए देखतहुँ । रंगकर्मी लिख देलियै... भाई हमर नाम मे रंग नायकलिखल करू । रहल स्त्री विमर्शक बात तअपने कहियो हमर यूट्यूब चैनल पर जा कस्त्रीयैन आँखिए किछु नाटक देखल करू, प्रेक्षागृहमे आयब तअहाँ सन व्यस्त लोकनि के दिक्कत होइत अछि । किछु नाम अछि – आब मानि जाउ, धूर्त्तसमागम, विलाप, सुंदर संयोग, मैथिल नारी : चारि रंग, घाट पर जाति आदि आदि । खैर... भाई गछने छी अहाँ जे सपरिवार आयब माँछ खयबाक लेल... तहिये सहम मछैन दृष्टिए रस्ता हेर रहल छी भाई । अहाँक मर्जी... । आगामी आयोजन सबहक मुख्य अतिथि / मुख्य वक्ता / मुख्य विमर्शकर्ताक कुर्सीपर विराजमान होयबाक लेल एक बेर पुन: शुभकामना भाई ।

 

 

 

 

 

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