++(13).JPG)

पटनाक मे
भंगिमा संग संग चेतना समीति आ आरो एक दू टा संगठन काज क’
रहल अछि । पटना रंगमंच स’ जूड़ल अभिनेत्रीक संख्या मे प्रमुख
छथि: प्रेमलता मिश्र ‘प्रेम’, प्रिती झा,
स्वाति सिंह, रितु कर्ण, कुमकुम जी, प्रियंका, बंदना, अपराजिता, शारदा,
वैदेही आदि आदि । एहि ठाम वयस्क स’
बेसी बाल महिला कलाकार उपस्थित छथि ।

| नेहा वर्मा |
| स्व. रंजी झा आ सुश्री प्रियंका |
मैथिली
रंगमंचक वर्तमान आ आधुनिक स्थितिक पड़ताल तथाकथित मैथिलीक बहुविधा समालोचक लोकनि
द्वारा प्राय: कयल जा रहल अछि । एहि ठाम ‘वर्तमान’
आ ‘आधुनिक’
शब्द पर सेहो विचारक आवश्यकता छैक । कारण, जे लोकनि आई स’
बीस साल पहिने वर्तमान वा आधुनिक स्थितिक पड़ताल केने छलाह आइयो हुनक आलेख अपन नव
रूपमे मात्र किछु पाँतिक वृद्धिक संग छपैत अछि । तेँ हमरा जनति अपन वर्तमान वा
आधुनिकमे समय लिखब आवश्यक ।
मैथिली
रंगमंचक चर्चा होइते पत्रिका / पुस्तकमे लिखल आलेख मैथिली रंगमंचक समस्या मात्रसँ
भरल रहैत अछि । बहुविधा समालोचक लोकनिक दृष्टिमे कतेको समस्यामे वाकि मनलग्गू
विषयमे प्रिय छनि “मैथिली रंगमंच पर महिलाक स्थिति /
अनुपस्थिति”
। आजुक संदर्भमे चिंतित आ एकरा विकराल रूप कहनिहार सज्जनके किछु वर्तमान डाटा
उपलब्ध करबाक प्रयास करैत छी । कारण, बहुविधा समालोचक लोकनिके कतेको पत्रिका /
पुस्तक / वार्ता / संगोष्ठी आदिमे मैथिली रंगमंचक पड़ताल करक रहैत छनि । सूचना
संग्रहित केनाई कनी कठिनाह होइत अछि । हमर बहुविधा समालोचक लोकनि एहन कठिनाह काज
किएक करताह ? हुनका लोकनि के कोनो प्रकारक कष्ठ हेतनि से हमरा लोकनि के कोना नीक
लागत । तेँ हम स्वयं ई सूचना हुनका लोकनि के प्रेषित क’
दैत छियनि ।
एहि बीच
मैथिली रंगमंचपर महिलाक स्थिति पर कतेको आलेख पढ़लहुँ अछि । अधिकांश आलेख लिखनिहार
लोकनिक अपन शहर वाकि इर्द – गिर्द सिमटि क’
रहि जाइत छनि । एहने समयमे श्रीमती शैल झाक लिखल सांध्य गोष्ठी, दिसम्बर –
2012 के अंकमे आधुनिक मैथिली रंगमंचमे
नारी अभिनेत्री आलेख सेहो पढ़बाक मौका लागल अछि । नीक आलेख छनि एहिमे कोनो शंका
नहि । आलेख समाप्तिक बाद लागल जे एहि आलेखक शीर्षकमे आधुनिक शब्दक स्थान पर
कोलकाता लिखब उचित छल । आलेखक शीर्षक होयबाक चाही कोलकाताक मैथिली
रंगमंचमे नारी अभिनेत्री । आलेखमे आधुनिक शब्द जोड़ि आलेखक विस्तारक
सीमाक अंदाजा लेखिका आ सम्पादक दुनू गोटे के होयबाक चाहियनि छल । ओना आलेखमे कोलकाताक महिला रंगकर्मीक सूचना नीक
जेना समाहित भेल अछि ताहि लेल श्रीमती शैल झा के हम सब आभारी छियनि ।
मैथिली रंगमंच पर महिला अभिनेत्रीक अभावक समस्या हिनको आलेखक मुख्य केन्द्र अछि ।
किछु गोटेके
कहब छनि जे - “मैथिली
रंगमंचमे महिला कलाकारक अभावक हेतु आयोजक दोषी छथि । कारण, आयोजक जखन अपन परिवारक
महिलाकेँ रंगमंचपर नै अनथिन त’ शून्यता भेनाइ स्वभाविक ।” एहन एहन आरोप – प्रत्यारोप
आ प्रश्न –
उत्तर निराधार अछि । हमर अनुभव अछि जे आई तक आयोजके लोकनि अपन व्यक्तिगत प्रयास स’
परिवार वा कि अपन मित्र / सम्बन्धित के मंचपर अनैत रहलाह अछि । जकर परिणाम अछि जे
मिथिलाक प्रस्तुतिपरक कला विधामे शक्ति संचय प्रवाहित नै भ’
सकल जकर अपेक्षा छलैक । एहन प्रश्न उठयबा स’ पहिने ई ज्ञान त’
होयबाके चाही जे कलामे रूचि व्यक्तिगत होइत अछि आ ओहि रुचिके मात्र कोनो संस्था वा
कि संस्थान आरो नीक जेना निखारि मात्र सकैत अछि । कोनो पेंटिंग करनिहार के
जबरदस्ती अभिनेता नै बनाओल जा सकैत अछि । कोनो अभिनेता के जबरदस्ती क्रिकेटर नै
बनाओल जा सकैत अछि, कोनो अभियंता के जबरदस्ती डॉक्टर नै बनाओल जा सकैत अछि । हाँ,
एहि लेल बस कियो ककरो प्रेरित मात्र क’ सकैत अछि । विभिन्न विश्वविद्यालयमे मैथिली साहित्य स’
एम. ए. क’
रहल कुल विद्यार्थीक संख्या स’ बेसी छथि मैथिली रंगमंच पर महिला ।
चिंतनीय स्थित कोन ??? मैथिली साहित्यमे
विद्यार्थीक संख्या कम भ’ रहल अछि । एहि लेल विश्वविद्यालयमे
मैथिली भाषा पढौनिहार व्याख्याता लोकनि के अपना घर स’
धिया –
पुता के मैथिली पढ़बाक लेल प्रेरित करक चाहियनि, मुदा होइत अछि एकर ठीक उल्टा ।
हिनका लोकनि पर कियो कोनो तरहक आरोप – प्रत्यारोप किएक नै
लगौलाह अछि ? मैथिली रंगमंच पर चट्ट स’ आरोप लगा दैत छथिन –निराधार
आ अनर्गल गप्प । हिनका लोकनिक आग्रह ई, जे जहिना राजनीतिमे परिवारवाद चलि रहल छैक
ओहिना रंगमंचमे सेहो चलबाक चाही । की ई उचित छै ?

एखने 25 –
30 दिसम्बर, 2012 तक दिल्लीमे मलंगिया नाट्य महोत्सव के आयोजन भेल छल
जाहिमे कुल पाँचटा संस्था अपन नाट्य प्रस्तुत केलन्हि । ई जानि खुशी होयत जे एहि
पाँचो संस्थामे कुल 27 टा महिला रंगकर्मी छलीह । यानि प्रति टीम 5 –
6 महिला रंगकर्मी । एहन उपस्थिति के की चिंतनीय मानल जाय ?
वर्तमान समय
मे (2005 –
2012) मैथिली रंगमंच पर महिलाक स्थिति समृद्ध अछि । एहि लेल कोनो चिंता करबाक
प्रयोजन नै छैक । चलू आई एहि स्मृद्ध स्थितिक समीक्षा करी । सहरसामे भ’
रहल रंगमंचमे लगातार रूपम श्री, खुशबू श्री, खुशबू कुमारी, शिवानी, स्वेता
कुमारी, प्रिया, पूजा कुमारी, दीपा, ज्योति, बन्दना डे, मधु, काजल, नंदनी, नेहा
कुमारी आदि सक्रिय छथि ।
कोलकाता
रंगमंचक त’
ई हाल अछि जे एक संग तीन पीढ़ीक महिला अपन सक्रिय उपस्थिति द’
रहल छथि जाहिमे प्रमुख छथि – बंदना झा, किरण झा, बेला झा, कुमारी
अंजना इस्सर, अपराजिता, शैल झा, कुमारी सपना, कुमारी साधना आदि यानी लगभग बीस
महिला रंककर्मी सक्रिय छथि ।
दिल्ली
मैथिली रंगमंच स’ जूड़ल महिला रंगकर्मीक संख्या एखुनका समयमे बाकी
सब जगह स’
बेसी अछि । ई संख्या लगभग 25 – 30 अछि । जाहि मे किछु नाम निम्न : पूजा
श्री, कल्पना मिश्रा, कल्पना झा, सुधा झा, ज्योति झा, सायरा अली, ज्योति झा, अंजलि
झा, नेहा वर्मा, नीरा झा, रूपम मिश्र, प्रियंका दास, रूपा साहा, सोनिया झा, स्वपना
मिश्रा, पलक कुमारी, बबीता प्रतिहस्त, पुष्पा झा, ममता झा, अपर्णा झा, रश्मि रानी,
प्रेमलता, खुशबू आदि ।
मानलहुँ जे
दरभंगा मे सक्रिय रंगमंच नै भ’ रहल अछि मुदा मैथिली महिला कलाकारक
उपस्थिति एहू ठाम कम नै अछि कतेको नाम एहन अछि जिनका रंकर्म लेल संगठन नै भेट रहल
छनि : स्वर्णिम किरण झा, बंदना मिश्रा, पूनम झा आदि आदि ।
उपर्युक्त
स्थितिक संदर्भमे आजुक समयमे लगभग बारह – पन्द्रह
रंगसंस्थामे लगभग सय (100) महिला रंगकर्मी मैथिली रंगमंचपर उपस्थित छथि । एहन
मजबूत उपस्थितिक बादो जँ कियो चिंतित छथि त’ हुनका लोकनि स’
आग्रह जे अपन लग पासमे भ’ रहल रंगमंच स’
जूड़ि विशेष जानकारी एकत्रित करथु ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें