रविवार, 12 मई 2013

युवा प्रतिबध्यताक सुखद परिणति : छुटत नहि प्रेमक रंग


काल्हि दिनांक 12 मई, 2013 क किछु मित्रक संग देखलहुँ नव निर्मित मैथिली फिल्म छूटत नहि प्रेमक रंग. पिछला लगभग छ: महीना स एहि फिल्मक सब प्रक्रियाक जानकारी कोनो ने कोनो माध्यम स भेट रहल छल । ई संयोग जे फिल्मक निर्माता ग्रुप हमरा स नीक जेना जूड़ल युवा लोकनि छथि मुदा एहि पूरा प्रक्रियामे एहि सब युवाक निर्णय अप्पन छलनि । हुनक निर्णयक जानाकारी मात्र हमरा प्राप्त होइत रहल । ई जानि अत्यंत आश्चर्यचकित होइत रही - कि फिल्म निर्माण प्रक्रिया एत्तेक सहज आ सरल अछि ? आरो कतेको प्रश्न मोन मे हिलकोर मारैत छल । फिल्म अपन प्रथम प्रक्रिया स अंतिम प्रक्रिया धरि पूर्ण केलक । एकर प्रतिफलक रूप देखबालेल नीलम सिनेमा, फरीदाबाद, हरियाणा गेलहुँ ।
 
फिल्म पर बादमे पहिने त एहि युवा टीम केँ हार्दिक बधाई जे एत्तेक युवावस्थामे एत्तेक पैघ डेग उठौलाह आ फिल्म के सफलता पूर्वक हॉल तक बिना कोनो हो-हल्ला के पहुँचेलाह । सत्ते एहि युवा टीम के निर्देशक श्री संतोष कुमार, मुख्य निर्माता श्री एस. के. झा, सह निर्माता श्री राजीव कुमार मिश्रा आ मुख्य अभिनेता श्री राधाकांत जी बधाई के पात्र छथि । एही चारू युवाक प्रयास स बाँकी संगी साथीक संगोर होइत गेल आ फिल्म एहन विशाल काज अपन निर्धारित समय मे सम्पन्न भेल । एहि चारू युवा मे स जँ कियो पहिल नं. पर छथि तश्री राजीव कुमार मिश्रा छथि । कारण फिल्मक पहिल दिन स प्रेक्षागृह तक पहुँचेबामे हिनकर अथक परिश्रम आ हिनक सदाशयताक भूमिका अविस्मर्णीय अछि । एक बेर फेर राजीव बाबू अहाँके बधाई ।



फिल्मक तकनीकीक बेसी ज्ञान हमरा नै अछि मुदा जे किछु ज्ञान प्रदर्शन कलाक अछि ओहि हिसाबे फिल्म छूटत नहि प्रेमक रंग सिर्फ मैथिली प्रेमक कारण देखल जा सकैत अछि । फिल्ममे किछु आर काज करबाक आवश्यकता छल । कोनो फिल्मक लेल ओकर कथानक सबस महत्वपूर्ण होइत छैक । जँ कथानक मे दम्म होइत छैअक त ओ जनमानस के आकर्षित करैत अछि । एहि फिल्म के बनाओल त गेल अछि व्यावसायिक सोच स मुदा कथानक अछि कोनो कलात्मक फिल्मक । एक्के संग कतेको मुद्दा के उठाओल गेल अछि । परिणाम भेल जे अंतमे बहुतो मुद्दा जे कि शुरु मे महत्वपूर्ण लगैत छल हेरा जेना गेल । कथा लिखब, कविता लिखब आ ओही कथा वा कविताके फिल्मक वा रंगमंचक रूप देब बहुत फराक अछि । एहि बात स एखनो हमरा आश्चर्य लगैत अछि जे सब काज स्वयं करबाक मोह के हमर रचनाकार लोकनि किएक नै छोड़ि पबैत छथि ?

किछु महीना पहिने फेसबुक पर हम लिखने रही जे हमर फिल्म निर्देशक लोकनि अपन अभिनेताक अभिनय क्षमताक नीक उपयोग नै क पबैत छथि से अहू फिल्ममे देखाइत अछि । एक स एक अभिनेता फिल्ममे उपस्थित छथि । यथा अनिल मिश्रा, नीलेश दीपक, परमेश झा, गोविन्द पाठक, रामनारायण ठाकुर, रवीन्द्र झा, मदन ठाकुर, सोनिया झा आदि । मुदा हिनका सबहक असीम अभिनयक प्रतिभाक सदुपयोग होयबाक चाही ।
 
एकटा आर बात लीखब । हमर प्रिय अभिनेता छथि राधाकांत   छूटत नै प्रेमक रंग मे मुख्य भूमिका राधाकांत केलाह अछि । मुदा, फिल्ममे हिनक उपस्थिति पर कनी आर सम्पादनक आवश्यकता छल । फिल्ममे लगभग अस्सी प्रतिशत उपस्थिति राधाकांत जीक छनि जे अनर्गल बुझना जाइछ । फिल्म सम्पादन करबाक काल वा कि कोनो प्रस्तुतिपरक विधामे अपन हृदय के बहुत कठोर करबाक आवश्यकता होइत छैक । सृजनक कोनो विधामे व्यक्तिगत संबंधक कोनो मायने नै होइत छैक से हमरा सबके बूझक चाही । फल्लां हमर मित्र छथि / फल्लां हमर भतीजा छथि / फल्लां हमर चमचागिरी कैरत छथि / फल्लां हमर गुरुदेवक संबंधित छथि / फल्लां हमर गप्प नै मानैत छथि / फल्लां दोसर ग्रुपक छथि / फल्लां दोसरक समर्थक छथि आदि आदि मानसिक सोच स ऊपर उठक आवश्यकता छैक ।  फिल्मक भाषा, संवाद, डबिंग स्टाइल, प्रकाश योजना, ध्वनि संयोजन आदि आदि आरो बहुत रास गप्प अछि से बादमे  । फिल्मक संगीत पक्ष बहुत नीक अछि । ई दोसर गप्प जे गीत फिल्मक कथानकमे फिट नै बैसैत छैक मुदा बहुत कर्णप्रिय अछि ।
 
एहि युवा टीमके उत्साह आ एहि विधामे पदार्पण प्रशंसनीय अछि । आजुक युवा स ई अपेक्षा बहुत कम भ भेल जा रहल छनि जे एहन सुसभ्य आ मैथिली संस्कृति के मोनमे ल फिल्म एहन विधामे उतरहाह । दिल्ली एहन शहरमे जत वैश्वीकरणक समागम अछि, एतुक्का मॉल संस्कृति स रूबरू भेलाक बादो ई युवा लोकनि अपन मैथिली संस्कृति स ओत प्रोत फिल्म निर्माण केलन्हि अछि से रेखांकित करब आवश्यक छैक । अहाँ सब लोकनि अपन सम्पूर्ण परिवारक संग एहि फिल्मक आनन्द ल सकैत छी । अहाँ अपन नव पीढ़ी आ अपन अग्रज पीढ़ीक संग बैसि कोनो मैथिली फिल्म देखी एहन बहुत कम्मे फिल्म अछि । ओहि श्रेणी मे  छूटत नहि प्रेमक रंग के सबस पहिने राखल जा सकैत अछि । 

  

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें