शुक्रवार, 26 अप्रैल 2013

जाहि बाट पर काँट गरल अछि, ताहि बाट पर चल’ दिअ’... [ मैथिली गायनमे पवन नारायण ]

गायक पवन नारायण







 
























आदि काल स मिथिलामे कतेको परम्परा चलैत आबि रहल अछि । एहि परम्परामे एकटा समृद्ध परम्परा थिक पाण्डित्य परम्परा । मिथिलावासी कोनो ने कोनो विधामे ज्ञानक सिद्धहस्ता प्राप्त करैत छलाह आ ओही स धनोपार्जन क अपन आ अपना परिवारक भरन पोषण करैत छलाह । चाहे वेद होइ वा कि कोनो शास्त्र । सबमे अपन सिद्धांत स्थापित करैत छलाह । पाण्डित्य परम्परा समयक संग अपन रूप बदलैत रहल अछि । आधुनिक समयमे सेहो एहि मे परिवर्तन आयल । किछु साल पहिने मैथिल युवाक पसन्द छल इंजिनियरिंग आ मेडिकल । एहि दुनू मे मैथिल युवा लोकनि नीक जेना स्थापित भेलाह । तकरा बादक दौर आयल सिविल सेवाक। अहू मे मैथिल युवा एक स'  एक कीर्तिमान स्थापित केलाह । एकरा बाद समय आयल जर्नलीज्मक त' अहू मे मिथिलाक युवा स सौंसे देशक युवा पाछू पाछू रहलाह । किछु साल पहिने मैथिल युवाक झुकाव कम्प्यूटर दिस भेलन्हि त' अहू मे हम सब आगुए रहलहुँ । आजुक दौर आबि गेल अछि प्रजेंटेशनल विधाक । चाहे सिनेमा होई, वाकि रंगमंच, अभिनय होइ वाकि गायन, निर्देशन होइ वाकि आन कोनो टेकनिकल काज मैथिल युवा अहू विधामे आगू बढ़ि रहलाह अछि ।

गायक पवन नारायण संग अभिनेता दीपक ठाकुर
मिथिलाक एकटा एहने समृद्ध परम्परा अछि गायन । जकर की आस्वादन प्राय: सब मैथिलजन लैत आबि रहलाह अछि मुदा एखन तक एहि विधामे काज करनिहार लोकनि के साहित्यिक वा कि सांस्कृतिक धरोहरक रूपमे स्थापित नै कल जा सकल अछि । मिथिलाक कोनो समीक्षक वा कि समालोचक महोदय एहि विधाक आँकलन नै केलाह अछि । हिनका लोकनि के तहिया आँखि खुजैत छनि जहिया एहि युवा लोकनिक पहचान दोसर ठाम बेसी नीक जेना हुअ लगैत अछि । मुदा जखन कोनो स्थापित विधा वा कि व्यक्तिक सोहरत सौंसे दुनियामे पसरि जाइत अछि तखन हम सब हल्ला करैत छी जे ई त हम्मर विधा वा कि व्यक्ति छथि । आदि आदि... ।

मिथिलाक सैकड़ो युवामे गायन के क्षेत्रमे एक छथि पवन नारायण । कतेको साल स हम मिथिलावासी हिनक गायल गीत सुनैत आबि रहल छी । आजुक समयमे प्राय: सब सांस्कृतिक मंचक शोभा रहैत छथि पवन नारायणजी । मुदा हिनका बारेमे जानकारी प्राप्त क चाहलहुँ त मात्र एक्के आदमी द सकैत छलाह ओ ई स्वयं । कारण हमर समाज हिनका लोकनिक ध्वनि जतेक काल सुनैत छथि बस ओतबे काल ई लोकनि मोन रहैत छथिन । किछु दिन पहिने हम पवन जीक संग दू दिन बितेलहुँ । व्यक्तिगत रूपे सेहो हम प्रभावित भेलहुँ ।

मैथिल युवा गायक आ गीतकार पवन नारायण पिछला 19 साल [1993 ई.] स मैथिली गीत गायन क्षेत्रमे छथि । अपन बाल्याकाले स संगीत गायन स जूड़ल छथि पवन नारायण । मधुबनी जिलाक बच्छी गामक ई युवा वाद्य यंत्र तबला गिटारक नीक जानकार छथि । अपन बच्चा बाबा स जे किछु ज्ञान भेटलन्हि सैह हिनक संगीत प्रशिक्षणक मूल अछि । पवनजी गीतक सब विधामे हस्तक्षेप रखैत छथि मुदा, मिथिलाक पारम्परिक गीतमे खूब मोन लगैत छनि । ओना आम जनमे हिनक गाओल रोमांटिक गीत बेसी चर्चित अछि । जे कियो एहि विधा के रसिक छथि ओ लोकनि पवन जी के मिथिलाक उदित नारायण कहि क संबोधित करैत छथि । एकर कारण ई जे एहि दुनू गायक के आवाज मे बहुत अधिक मेल छनि । दुनू गोटे प्राय: रोमांटिक गीत गाबमे माहिर छथि । जहिना उदित नारायण जी हिन्दीमे चर्चित छथि त पवन नारायण मैथिली मे । उदित जी सेहो नारायण त पवन जी सेहो नारायण । पवन जी व्यक्तिक रूपमे सेहो सदाशयताक प्रतीक छथि । आजुक समयमे मैथिली गायिकीमे सुश्री रंजना झाक आवाज हिनका बड्ड पसिन छनि त हिन्दी गायिकी मे उदित जीक आवाज ।

विद्यापति गीतक प्रेमी पवन नारायण जी आजुक समयमे विद्यापति गीत के नव नव अंदाज होयबाक बेगरता बुझि रहलाह छथि । विद्यापति गीत जे कि स्थापित गिति लय अछि एहि मे प्रयोगक त खगता अछिए । बेसी स बेसी प्रयोग होयत तखने एहि गीतक आरो माँग होयत आ नव नव युवा सृजन लेल अग्रसर होयताह । मुदा, आजुक समयमे भ रहल अछि एकर ठीक उल्टा । जखने कोनो युवा विद्यापति गीतक स्थापित लय मे बदलाब केलन्हि कि आम जन तेना ने होहकारि क छूटल कि बेचारे विद्यापति गीत स अपना के लग्गी भरि दूर क लैत छथि ।  एहन स्थिति हमरा जनैत मैथिली संगीत परम्पराक सबस पैघ खामी अछि । गायक लोकनि सेहो एखन तक ई निश्चित नै क सकलाह अछि जे मैथिली श्रोता लोकनि की चाहि रहल छथि ? एहना स्थिति मे एकटा नीक मार्गदर्शनक खगता बेसी बुझना जा रहल अछि । एहि गप्प स पवन नारायण जी सेहो सहमत छथि । आयोजनक श्रोता लोकनि मैथिली पेरोडीमे बेसी रुचि लैत छथि । कोनो हिन्दी फिल्मक प्रचलित गीतक शब्दानुवाद मैथिलीमे सुनब बेसी गोटे के पसिन छनि । ई शब्दानुवाद जँ दूइ अर्थी हुए त आरो नीक । परिपक्व गायक लोकनि एहन गायन स अपना के दूर राख चाहैत छथि मुदा नवका गायक लोकनि जिनकर मात्र आवाज नीक छनि एहि विधाक ज्ञान कम छनि एहन गीत गाबि क परिपक्व गायकक कठिनाई आरो बढ़ा रहल छथि । 

 पवन नारायण आजुक समयमे कतेको मैथिली फिल्ममे गीत गयलाह अछि । जाहि मे प्रमुख अछि अहाँ छी हमरा लेल, चट मँगनी पट भेल विआह, खुर्लुची, एक चुटकी सिंदूर, धांधली, दबंग विधायक, सेनुरक मोल बड्ड अनमोल, रमौल बाली आदि आदि । एकरा अलाबे आरो बहुत रास फिल्म मे हिनकर आवाज आबि रहल अछि । मैथिली गीतक कतेको कैसेट बाजार मे उपलब्ध अछि । अपन आगामी कार्य योजनामे पवन नारायण जी विद्यापतिक किछु गीत पर गंभीर काज क रहलाह अछि ।

जँ अहाँक भेंट पवन नारायण जी' भेल आ अहाँ एकटा अपन पसन्दीदा गीत गाबक आग्रह हिनका स केलियन्हि त हुनका मुँह सँ सहजहि निकलि जाइत छनि -

जाहि बाट पर काँट गरल अछि, ताहि बाट पर चल दिअ
दुर्गति देख हमर जीवन के, टोकू नहि कियो, बढ़ दिअ

 एक्साइज सब इंस्पेक्टरक पुत्र गायक होयताह ओहो मिथिला मे ई गप्प सेहो अजगुत बुझना जाइत अछि । ई बात प्रामाणित क रहल अछि जे आब मैथिल युवा अपन व्यवसायिक क्षेत्र अपना रुचिक अनुसार चयन क रहलाह अछि । पवन नारायण जी आजुक समयमे रिषी बशिष्ठ, सियाराम झा सरस, बैजू चौधरी, महेन्द्र मलंगिया आदिक प्रसंसक छथि । अपना पर्वर्ती पीढ़ीमे आनन्द, सागर, कुमार सोनू आदि हिनक प्रिय शिष्य छनि, जिनका स आगू मैथिली गायन अपेक्षा कयल जा सकैत अछि ।
 
 
जहिना आन आन विधाक आब माहौल बनि गेल अछि तहिना मैथिली गायन लेल सेहो नीक माहौल बनेबाक खगता छैक । ओना फिल्म बेसी बनला स ई माहौल आब बहुत जल्दी बनबाक संभावना देखा रहल अछि ।  मैथिली गायन परम्परामे कतेको लोकनि लागल रहलाह अछि। आजुक समयमे सेहो पचास स बेसी युवा लोकनि लगातार एहि विधामे नीक स नीक काज क रहलाह अछि, मुदा एखन तक हिनका लोकनिक मिथिला साहित्य समाज वाकि बुद्धिजीवी समाज कोनो तरहक लिखित साक्ष्य बनेबाक बेगरताक अनुभव नै केलक अछि । समाजशास्त्री लोकनि चुप छथि । एहि विधामे अपन योगदान देनिहार लोकनिक प्रलेखन अति आवश्यक अछि । एहि लेल गायक लोकनि के सेहो स्वंम ध्यान देबाक जरूरी अछि । 
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2 टिप्‍पणियां:

  1. अहांक बात पढी मुन प्रसन्न भेल ओना पवन नरायण जी स हमर पारिवारिक संम्बध अछि.......हम हुनक उज्ज्वल भविष्य के कामना करैछी. और आशा करै छी की ओ मैथिल गीत परंम्परा के आगे बढेता।

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद उज्ज्वल जी । पवन नारायण जी खूब नीक गबैत छथि संगहि सदाशय इंसान सेहो छथि ।

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