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| डी. पी. एस. बुलन्द शहर प्रवेश द्वार |
निर्धारित
तिथि 30 अप्रैल, 2013 क’ भोरक छ: बजे हम अपना घर स’
प्रस्थान कयल । ई संयोग अछि जे हमर ड्राइवर ग्रेटर नोएडाक परी चौकक भूल भुलैयामे
रस्ता भुतला गेलाह आ गाड़ी उत्तर प्रदेशक ग्रामांचल होइत सिन्दराबादक रस्ते
बुलन्दशहर पहुँचल । किछुए काल पहिने दिल्ली स’ नोएडा होइत ग्रेटर
नोएडामे बनल आ बनि रहल गगनचुम्बी घर देख मोन कोनो अदृश्य डर स’
घेरायल छल । गाड़ी समतल सड़कपर सपाट दौड़ रहल छलैक । शरीर आराममे छल मुदा मोन उचाट । एकटा
रस्ता भुतलेने किछुए मिनटक बाद गाड़ी सड़कक हुच्चीमे हिचकोला ल’
रहल छल । मुदा, अगल – बगल पसरल खेतमे लागल आ कटल गहूँमक बोझ
देखक’
मोन प्रफ्फुल्लित भ’ रहल छल । एखन मोन स्थिर छल शरीर उचाट
।
नियत समय दस
बजे गणतव्य पर पहुँचलहुँ । स्वागतमे उत्सव समंवयक किरन पंत, प्रधानाचार्य डॉ.
जगदीश चन्द्र पंत अपन अध्यापकगण संग ठाढ़ छलाह । कनिएकालमे डॉ. जगदीश चन्द्र पंत
अपन सदाशयता आ खुशमिजाजी स’ आकर्षित क’
लेलन्हि । हुनक कार्यालयमे पहिने स’ उपस्थित गणमान्य
एवं विभिन्न प्रतियोगिताक निर्णायक लोकनि स’ परिचयपात भेला
उत्तर सब लोकनि अपन अपन प्रतियोगिताक स्थलपर गेलहुँ ।
गीत
–
अभिनीत प्रतियोगिता विद्यालय द्वारा नव
निर्मित कामायिनी प्रेक्षागृहमे राखल गेल छल । कामायिनी मे ई पहिल
आयोजन छल तेँ प्रेक्षागृह खूब नीक जेना सजाओल गेल छलैक । कामायिनी के
प्रमुख प्रवेश द्वार पर बनाओल चित्रक सुन्दरता आ भव्यता प्रेक्षागृहक उत्कृष्ठताक
स्वयं वर्णन क’
रहल छल । आसमानी रंगक पिछला स्तर पर बनाओल
गेल विभिन्न नृत्य मुद्रा सहजहि सुन्दर अनुभूति दैत छलैक । खूब पैघ प्रेक्षागृह,
सुन्दर मंच, नीक प्रकाशयंत्र, उत्तम ध्वनि व्यवस्था आदि आदि । विभिन्न डी. पी. एस.
स’
आयल छात्र, हुनक संग आयल शिक्षक, अभिभावक आ स्थानीय सुधिजन स’
भरल छल प्रेक्षागृह ।
गीत –
अभिनीत प्रतियोगिता मे कक्षा VI – VIII तक
के विद्यार्थी भाग ल’ सकैत छलाह । एहिमे कविताक सामूहिक
काव्य प्रस्तुति करबाक छल । जाहिमे तीन छात्रक समूह भाग ल’
सकैत छलाह । कविताक नाट्य प्रस्तुतिक लेल छ: मिनटक समय निर्धारित कयल गेल रहैक ।
समूहक एक प्रतिभागी द्वारा गीत वाकि कविताक प्रस्तुति तथा दू प्रतिभागी द्वारा
ओहिपर अभिनय करबाक छल । एतेक नियमावलीक संग तीसटा विद्यालय भाग लेलक ।
अपन निर्धारित समय स’
शुरू भेल प्रतियोगिता । एकक बाद दोसर स्कूलक विद्यार्थी लोकनि बेरा –
बेरी मंच पर अबैत गेलाह । अद्भुत प्रतिभा । किछु विद्यार्थीक प्रतिभा देख क’
त’
मुग्ध रही । छात्र लोकनि के मंचक एतेक संज्ञान – हम लाइटमे
छी कि नै, हमर आवाज प्रेक्षागृहमे नीक जेना पहुँचैत अछि कि नै, गायन संग अभिनय
करनिहार मित्रक बीच तालमेल बैसि रहल अछि कि नै, संगीत अभिनय संग चलि रहल अछि कि
नै, मेक-अप, वस्त्र विन्यास, मंच पर आनल गेल सब समानक अभिनेता द्वारा उपयोग भ’
रहल अछि कि नै –
ई कहि सकैत छी जे मात्र छ: मिनट आ तीन व्यक्ति मे सम्पूर्ण रंगस्वाद । किछु स्कूलक
बच्चा ततेक मेहनत स’ मंचपर उपस्थित भेल छलाह जे देखि दंग
भेल रही ।
एहि प्रतियोगिता के नारी पात्रपर
केन्द्रित कयल गेल छल । रानी लक्ष्मी बाई, पन्ना धाई, यशोधरा, उर्मिला, मदर
टेरेसा, इन्दिरा गांधी, कल्पना चावला, किरण वेदी सन नारी पात्र केन्द्रित
प्रस्तुति प्रतियोगितामे आयल छल । मुदा बेसी स्कूल रानी लक्ष्मी बाई पर अपन
प्रस्तुति तैयार केने छल । आईस’ लगभग अस्सी साल पहिने सुभद्रा
कुमारी चौहान द्वारा लिखल गेल कविता झाँसी की रानी आम जनमे प्रचलित आ
प्रसंसित अछि । एहि कवितामे जे ऊर्जा आ लयात्मकता छैक से रंगमंचक लेल अनुकूल अछि ।
जखन विद्यार्थी लोकनिक मुँह स’ निकलैत छल :
सिंहासन हिल
उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी,
गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,
दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।
चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।
जहिना कवितामे ओज अछि तहिना विद्यार्थीक
ओज स’
पूरित वातावरण अदृश्य ऊर्जा प्रवाहित क’ रहल छल । आ जखने
निम्न पाँति आबैत छल :
जाओ रानी याद रखेंगे ये कृतज्ञ भारतवासी,यह तेरा बलिदान जगावेगा स्वतंत्रता अविनासी,
होवे चुप इतिहास, लगे सच्चाई को चाहे फाँसी,
हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी।
तेरा स्मारक तू ही होगी, तू खुद अमिट निशानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी ।।
कि देह सिहरि उठैत छल । यैह अछि रंगमंचक
शक्ति । कोनो वातावरण उपस्थित करबाक शक्ति जेना रंगकर्म मे अछि दोसर कोनो आन
विधामे नै छैक ।
अहिना नाटकक मूल तत्व द्वन्द आ
दृश्यात्मकताक समावेश सेहो प्रचूर मात्रामे अछि । मात्र तीन गोटॆ मिलि क’
एहि कविताक ततेक रूप आ बिम्ब प्रस्तुति केलन्हि जे देखि सुभद्रा जीक लेखनी क्षमता
आ एहि कविताक रंगोपयोगी सृजनताक भान सहजहि भ’ जाइत छैक । जँ
लेखनी आ कथ्यमे दम छैक त’ आमजन ओकरा अपनेबे करत ई एहि बात स’
जाहिर होइत अछि ।
ई आयोजन एकटा दोसर अर्थमे सेहो हमरा लेल
महत्वपूर्ण छल । अपन वाल्याकाल मे गोपाल दास ‘नीरज’
जीक कविता पढैत रही । आई एहि आयोजनक समापन समारोहक मुख्य अतिथि नीरज जी
छलाह । लगभग नब्बे वर्षक नीरज साहब अपन उम्रक एहि पड़ाव मे सेहो अपन रचना आ समाजक
प्रति सचेत भ’
आयोजनमे उपस्थित भेलाह । जखन माइक पर ओ अपन रचना :
स्वप्न झरे फूल से,
मीत चुभे शूल से,
लुट गये सिंगार सभी बाग़ के बबूल से,
और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे
कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे!
मीत चुभे शूल से,
लुट गये सिंगार सभी बाग़ के बबूल से,
और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे
कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे!
सुनौलन्हि
त’
प्रेक्षागृह मे उपस्थित सब दर्शक रोमांचित छलाह । अपन संभाषण के समापन नीरज साहब
अपन्हि रचना स’
केलन्हि :
आदमी को आदमी बनाने के लिए , ज़िन्दगी में प्यार की कहानी चाहिए
और कहने के लिए कहानी प्यार की, स्याही नहीं, आँखों वाला पानी चाहिए ।
देश प्रेम स’
लवरेज़ दिल्ली पब्लिक स्कूल, बुन्दशहरक
छात्र लोकनि द्वारा प्रस्तुति मिले सुर मेरा तुम्हारा, तो सुर बने हमारा स’
समापन भेल ई आयोजन । डी.पी.एस. सोसाइटी के चेयरमैन श्री अशोक चन्द्र जी,
प्रधानाचार्य श्री जगदीश चन्द्र पंत आदि स’ विदा लैत एकटा
सुखद अनुभूतिक दिन मोनमे ल’ श्री ब्रजेन्द्र त्रिपाठी, श्री
प्रयाग शुक्ल, श्री अमिताभ श्रीवास्तव संग हम दिल्लीक लेल प्रस्थान केलहुँ...
·
कुल शब्द : 1,020.


BAHUT NIK VRTANT BHAI....
जवाब देंहटाएंKISLAY KRISHNA
धन्यवाद किशलय भाई. अपन विचार स' एहिना अहाँ प्रेरित करैत रहू...
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