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| फूटपाथक एकटा दृश्य |
काल्हि दिनांक 06 सितम्बर, 2013 क’ दिल्लीक स्थापित संस्था मिथिलांगनक
आयोजनमे जयबाक अवसर भेटल । आयोजन मुक्तधारा प्रेक्षागृह, भाई वीरसिंह मार्ग
पर छल । मिथिलांगन संस्थाक वार्षिक आयोजन अछि स्व. व्रजकिशोर वर्मा
‘मणिपद्म’ जीक जयंती समारोह । विगत छ: - सात साल स’ ई आयोजन नियमित रूपे
देखबाक अवसर भेटल अछि । संस्था शनै: शनै: एहि आयोजनक गरिमा कम केलक अछि से कहबामे
कोनो अशोकर्ज नहि होयबाक चाही । शुरु शुरुमे ई आयोजन खूब धूम धाम स’ दिल्लीक
मंडीहाउस स्थित प्रेक्षागृह एल. टी. जी. / राजेन्द्र भवन वाकि श्रीराम सेंटर सन
महत्वपूर्ण स्थान पर होइत छल । आयोजनमे उपस्थिति ततेक ने रहैत छल जे बैसबाक स्थान
भेटब मुश्किल होइत छल । हलाँकि आइयो हॉलमे सैह हाल रहैत अछि मुदा पहिने हॉलमे पाँच
सय आदमी बसैत छल आब त’ हॉले एहन रहैत अछि जे एक सय आदमी आबि जेताह त’ बुझू उग डूब
क’र’ लागत । आयोजनमे नृत्य, संगीत आ नाटक तीनू रहैत छल संगहि मणिपद्म जी
केन्द्रित छोट छीन संगोष्ठी सेहो होइत छल । हाँ ! ओहि समय संस्था अपन आयोजन सदस्यता
शुल्क आ विज्ञापन स’ निकालि लैत छल । मुदा, जहिया स’ ई संस्था मैथिली – भोजपुरी
अकादेमीक गोलैसीमे फँसल शनै: शनै: अपन मूल आयोजनक चमक धूमिल क’ लेलक अछि । हम मिथिलांगन
के मंच पर एक स’ एक विद्वान के देखने छियन्हि । पद्मसम्मान स’ सम्मानित
व्यक्ति सेहो एहि मंच पर उपस्थिति द’ अपना के गौरवांवित अनुभव केलाह अछि । मुदा, आब
हिनकर मंचपर अकादेमीक भूतपूर्व सचिव रवीन्द्र कुमार दास सन व्यक्ति के देखि घोर आश्चर्य
होइत अछि । मिथिलांगन दिल्ली मे एक स’ एक नीक काज केलक अछि । एक स’ एक उपलब्धि
प्राप्त केलक अछि मुदा एखनो अपन आयोजन के निर्धारित समय तक पहुँचब मे साठि मिनट स’
बेसीये पाछू अछि । मिथिलांगक युवा सोच श्री अभय जी, श्री सुन्दरम
जी, श्री संजय चौधरी जीक अनुसार चलक
चाहियन्हि । किछु वरीष्ठक सदस्यक लेल निर्णय स’ संस्थाक आयोजन प्रभावित होइत बुझना
जाइत अछि । अस्तु ।
हाँ ! अपन अग्रजक कार्य प्रणाली पर
विचार राखब हम अपन अधिकार बुझैत छी । तेँ भाई संजय जी जे कि एहि नाट्य प्रस्तुतिक
निर्देशन केलाह अछि हुनका सँ आग्रह जे युवा रंगकर्मीक शक्ति जे हुनका मिथिलांगन
के माध्यमे प्राप्त छन्हि तकर आर बेसी सदुपयोग करथि । हमर विचार अछि जे नाटक मे जँ
कास्टिंग नीक स’ कयल जाय त’ आधा नाटक सफल भ’ जाइत छैक । फूटपाथक कास्टिंग
मे सुधारक आवश्यकता लागल । नाट्य प्रस्तुति के आरो कसबाक जरूरत छलन्हि । बहुत बेसी
बिखराव भ’ गेल अछि । एक दृश्य स’ दोसर दृश्यमे प्रवेश करबाक बीचक समय पर निर्देशक
केँ बहुत गम्भीरता स’ सोचक चाहियन्हि । लुल्हाक अभिनय करनिहार अभिनेता अपन पात्र
खूब नीक जेना जीब रहल छल ओहि पात्रके पहिल दृश्य मे मुँह खसबाक’ ओकर मुखाभिनय स’
प्रेक्षक के बंचित नहि करक चाही । आन्हर के अभिनय करनिहार अभिनेता भाई संजय जीक
संग विगत कतेको साल स’ काज क’ रहलाह अछि । एहन वरीष्ठ अभिनेता पर निर्देशक के
विश्वास राखक चाही । हमरा जनैत ई अभिनेता बिना चश्मा के अपन पात्र बेसी नीक जेना
प्रभावी बना सकैत छलाह । बिना चश्माक अभिनय एहि स’ बेसी कठिनाह आ अभिनेताक लेल
बेसी चुनौतीपूर्ण रहितन्हि । युवा अभिनेता रोहित जे नेताक भूमिका मे छलाह, हिनक
अभिनय पक्ष बहुत मजबूत छन्हि, सम्भावनाशील छथि । रोहित नेता स’ बेसी फिट युवा
क्रांतिकारी लड़काक भूमिकामे होयतथि । वरीष्ठ अभिनेता भाई केशव जीक संवाद अदायगी
खूब नीक छनि जँ हिनक संवाद अदायगी मे नाटकीय तत्व आ शारीरिक संचालन के मिश्रित कयल
जाय त’ मैथिली रंगमंच पर एकटा सशक्त चरित्र अभिनेताक उपस्थितिक संभावना अछि । राजेश
कर्ण, मुकेश दत्त आदि त’ सशक्त अभिनेता छथिए । सुश्री कल्पना मिश्रा सन सशक्त
अभिनेत्रीक उपयोग ओहिना कयल गेल जेना आजुक हिन्दी फिल्म मे कोनो आइटम डॉंस राखल
जाइत अछि । जखन कि नाटक एकर माँग नहि करैत अछि । अपन बढ़ैत उम्रक कारणे सुश्री
कल्पना जी अपन नृत्य संचालन आ संरचना मे नीक जेना ओझराय गेलीह आ नृत्यक बादक संवाद
प्रेषित करबा काल बहुत बेसी हाँफ’ लगलीह जाहि स’ हुनक संवाद आ अभिनय दुनू मर्माहित
भ’ गेल । एहि सशक्त अभिनेत्रीक उपयोग अभिनय मे करब बेसी उचित रहिते । हाँ ! साक्षी
मिश्रा सेहो प्रभावित केलीह । हिनका स’ सेहो आर मेहनत कराओल जा सकैत छल ।
मिथिलांगनक ई टीम त’ मजबूत अछि ताहि मे कोनो संदेह नहि ।

एकटा निर्देशक रूपमे संजय भाई फूटपाथमे बहुत विन्दु पर अपन रंगकर्मी स’
चर्चा नहि केने छलाह शायद समय के अभाव भेल हेतन्हि । जेना कि नाटक शुरु होइ स’
पहिने उद्घोषणा कोना हेबाक चाही / दृश्य समाप्त भेलाक बाद कोन अभिनेता किम्हर
निकलताह / नाटक समाप्त भेलाक बाद कोना पात्र परिचय होयत आदि आदि । एक - एकटा विंदु
पर चर्चा आ विमर्श आवश्यक होइत अछि । खैर... नाटक कोन प्रेक्षागृहमे यानि कतेक पैघ
मंच पर भ’ रहल अछि तकरे अनुरूप मंच विन्यास आ दृश्यमे पात्रक उपस्थित होयब सेहो
निर्देशन लेल आवश्यक होइत अछि । मुक्तधारा बहुत छोट मंच अछि जाहि पर पात्रक
संख्या बहुत बेसी भेने पात्र अपन अभिनयक बारीकी देखेबा मे असमर्थ भ’ जाइत छथि ।
भाई संजय जी केँ अपन प्रकाश योजना पर सेहो ध्यान देब आवश्यक छन्हि । प्रकाश
परिकल्पना आ एकर संचालन बहुत तकनीकी पूर्ण विधा अछि । एहि काजमे भाई अपना के नीक
जेना सहज नहि क’ पबैत छथि । भाई सुन्दरम जीक हम प्रसंसक छी । खूब नीक स्वर छन्हि,
मुदा हिनक उपयोग सेहो संजय भाई बैलेन्स रूपे नहि क’ सकलाह अछि ।
भाई संजय जी लग बहुत मजबूत आ कर्मठ टीम छन्हि । एहि टीम संग एक स’ एक सुगठित
प्रस्तुति कयल जा सकैत अछि । एहि स’ पहिने संजय जी एक स’ एक नाटक निर्देशित केलाह
अछि जाहिमे हिनक सबस’ नीक प्रस्तुति छल छुतहा घैल । भाई स’ ओहने नाट्य
प्रस्तुतिक अपेक्षा अछि हमरा सबकेँ ।






भाई संजय जीक ई टिप्पणी छन्हि ::: प्रकाश जी धन्यवाद । मिथिलांगन कहियो कोनो अकादमी अथवा संस्था के मोहताज नहि रहल अछि । आई तक मणिपद्म जयंती मिथिलांगन अपने बल बूते मनबैत रहल अछि । रवीन्द्र दास अकादमी के सचिव कहियो नहि रहलाह । हुनका सब दिन ( अकादमी बन' सं पहिने सं ) एकटा कलाकारक रूप मे आमंत्रण जाइत रहल अछि । अपन ब्लॉग मे सुधार करू । नाटक पर कैल टिप्पणी पर हम अवश्य ध्यान देब । हमर कलाकार सब प्रोफेशनल नहि छथि, एक दू टा के छोड़ि, कियो नौकरी करैत अछि अथवा पढ़ाई । तकरा बावजूद वो सब एहन प्रस्तुति द' रहल छथि । हमरा सब के अपन कलाकार पर गर्व अछि । नाटक मे जे किछु त्रुटी होयत वो सबटा एकटा निर्देशक के नाते हमर त्रुटी होयत । अहांक समीक्षा नीक लागल । अकर दोसर प्रस्तुति और भव्य सफल होयत ई भरोसा हम अहांके द' सकैत छी । धन्यवाद ।
जवाब देंहटाएंआदरणीय भाई संजय जी, हम अहाँक गप्प स' पहिने स' सहमत छी । मिथिलांगन स्वंम मजबूत संस्था अछि । से मिथिलांगन के बूझक चाही । भाई उत्तेजित नै हौउ... हमर आलेख मे मे रवीन्द्र जी स' तात्पर्य "परिचय दास " स' अछि । अहाँ जाहि रवीन्द्र जीक चर्च केलहु अछि ओ हमरा लेल बहुत आदरणीय छथि । जँ सचिव लिखलहुँ त' अहाम्के सचिव बूझक चाही जे एहि स' पिछला आयोजन मे मिथिलांगनक मुख्य अतिथि रहथि । सुधारक आवश्यकता अहाँक अछि । अहाँक प्रस्तुति नीक लागल भाई तेँ किछु लिखबाक प्रयास केलहुँ । एकटा बात आर । प्रोफेसनल ककरा कही ताहि पर सेहो विचार होबाक चाही । प्रोफेसनलीज्म अपन काज स' होइत छैक । हम पहिनहि कहलहु अछि जे मिथिलांगन बहुत मजबूत रंगकर्मीक टीम अछि । एहि शक्तिक नीक उपयोग हेबाक चाही । अहाक कलाकार पर अहींटा के नहि हमरो सब के गर्व अछि । अहाक़्क स्वीकृति नीक लागल । टीमक कोनो प्रकारक त्रुटि टीमक कर्ता धर्ता के लेबाके चाहियन्हि । समीक्षा नीक लागल ताहि लेल आभारी छी । अहाँक भरोस हमरा आह्लादित करैत अछि । अहाँ सन निस्सन निर्देशक स' एहने भरोसक कामना अछि भाई । धन्यवाद ....
जवाब देंहटाएंमिथिलांगक चुप्पी.... मैथिली - भोजपुरी अकादेमी एहि नाटकक मंचन करबाक व्यवस्था केने छल । मुदा अंतिम समय मे आबि क' नाटक नहि करबौलक । ताहि लेल समुच्चा मैथिली समाज, पत्रकार लोकनि अकादेमीक एहि डेग पर सबाल उटहुलक । पत्रकार मनीष झा 'बौआजी' गम्भीर आलेख लिखलाह मुदा मिथिलांगन दिस स' कोनो तरहक टिप्पणी नहि आयल । एहना स्थिति के की कहल जाय ? जखन की एहि लेल मिथिलांगन के आगू होयबाक चाही छल । अस्तु...
जवाब देंहटाएंmanish Jha 'Bauabhai' jik tippani :
जवाब देंहटाएंsundar sameeksha aa yathochit margdarshan
Rohit Jha k tippani :
जवाब देंहटाएंThank You Prakash Sir...Thanks a ton!!!
काल्हि दिनांक 6 सितम्बर मिथिलाँगन द्वारा मणिपद्म स्मृति पर्व समारोह मनाओल गेल, जाहि मे हुनक लिखित उपन्यास पर आधारित नाटक फूट-पाथ प्रदर्शित कयल गेल । नाटक के चारू स्तंम्भ लेखन, निर्देशन, अभिनय(प्रदर्शन) आ संगीत(गायन) अद्वितिय छल । समाजक त नहि कहि सकैत मानवताक जाहि तिरस्कृत वर्गक व्यथाक जीवांत चित्रन जाहि तरहे लेखक द्वारा कयल गेल अछि से सराहनीय अछि । आ एखनहु समकालीन बनल अछि । आब दोसर दिश आबि.. लेखक द्वारा त मात्र एकटा स्वप्न देखल जाईत अछि जे निर्देशक द्वारा साकार कयल जाईछ। श्री मान् संजय चौधरीक निर्देशन त कय बेर अप्पन छाप छोरल अछि राजधानी मे, मुदा काल्हुक मंचन त अभुतपुर्व छल। कलाकार सँ ओकर पूर्ण क्षमता प्रदर्शित करबाबय में सफल भेलाह । मिथिलांगन संगीत हँ याह संज्ञा देल जा सकैत अछि जकर केन्द्र मे सुन्दरम छथि । ओना त सभ नाटक म संगीत आ गायन मुख्य आकर्षण रहैत अछि मुदा एहि नाटक मे श्री सुन्दरम आ सुश्री रूपम मिश्र क गायन लोक के मंत्र मुग्ध कय देलक । कखन हरब दुख मोर आ कतेको नचारी एवम शूफी गीतक गायनक विलगअंदाज दर्शक लोकनि के नीक लगलनि। तकर प्रमाण जे नाटकक समाप्ति बाद कखन हरब दुख मोर गबैत लोक प्रस्थान केलनि। सभ कलाकार लोकनि अपन पूर्ण प्रतिभा प्रदर्शित केलाह परन्च गोरकी आ आँन्हर के अभिनय अभुतपुर्व छल । सम्पूर्णता मे कहल जाय त कहि सकैत छी जे मिथिलांगन द्वारा सफलताक आरो एक डेग बढाओल गेल। जय मथिला जय मैथिली।
जवाब देंहटाएंहम हालाँकि टीका टिप्पणी करबा योग्य नहि छि, मुदा उम्र, समय, आ विभिन्न सामाजिक कार्य में सहयोगी आ संलग्न, दुर्गा नाट्य कला परिषद् नागदह मधुबनी के माध्यम स कखनो मुख्य त कखनो सहयोगी पात्र (१९९० स १९९८ तक ) होबय के कारने - नहि किछु त थोरबो थोड़ रंग मंचक अनुभव होबाक चाही कारन पांच - सात गोट वाल्य कलाकार स युवा कलाकार तक अभिनय केने छि, तैं हमर टिप्पणी अगर किनको कोनो तरहें अनुचित बुझना जाईन त कृपा क हमरा निर्बुद्धि बुझि माफ़ करथि ।
जवाब देंहटाएंनिश्चित रूपे आदरनिये श्री प्रकाश जी अपन अनुभवानुकुल पुर्णतः सत्य कहलाह जेना कि एक दृश्य सँ दोसर दृश्य के प्रवेश में हड़बड़ी आ गड़बड़ी बुझना जाईत छल । लुल्हाक अभिनय में कनिको संदेह नै ओ हर तरहें कला के तराजू पर बिना पासंग के रहथि । बाँकी सब विचारायुक्त कहलाह, रोहित जी, भाई केशव जी, राजेश कर्ण जी आ मुकेश दत्त जी हिनका लोकनिक सन्दर्भ में जे किछु कहलाह ओ स्वीकार करवा योग्य अछि। सुश्री कल्पना मिश्रा जी कें सम्बन्ध में जे किछु कहलाह ओहो विचाराधिन आ अनुचित नहि, हालांकि हम अपन फेसबुक टाइम लाइन पर ओहि नृत्य के चल -चित्र अपलोड केने छलहूँ, आ लिखने छलहूँ जे फूटपाथ नाटक के प्रायः बारहम दृश्यक – नृत्य । ई दृश्य निश्चित रूपे श्री प्रकाश जी के वाक्यनुसार छल, तथापि ई प्रयास संजय चौधरी द्वारा कोनो अनुचित आ बेढंगी नहि बुझना गेल, दर्शक के लेल पूर्ण आनंद - दायी रहल, भले ही सुश्री कल्पना मिश्र वा कियो आर होऎतथि, अनुचित समावेश नहि कहक चाही, आजुक समयक मांग कहक चाही। आब बचली साक्षी मिश्र जी त फूटपाथ कें केंद्र विन्दु त गोरकिये छल एहन असहज समादक प्रस्तुति जे शव्द मिथिलाक जनानी त कात, पुरुषो के लेल कठिन होईत अछि, ओहन -ओहन समाद बाजि अपन अदाकारी सँ दर्शक कें सोचबा पर मजबूर क देलन्हि। हमरा तरफ सँ बहुत नीक अभिनय आ पुरस्कृत सेहो बुझु, तखन जे किछु त्रुटी छल ओ मात्र ई बुझि, जे अभिनय के जोखबा काल बुझु हवा कखनो लत क दैत छल, त कखनो हल्लुक, ई शायद पहिल रंग - मंच छलनि साक्षी मिश्र जीक ।
बाँकी सबतरहे श्री प्रकाश जी यथोचित कहलाह, परन्तु श्री मान संजय चौधरी जी जे एही विपरीत परिस्थिति में एकर मंचन कयलाह, ओ कतेक तारीफ करबा योग्य अछि तकरा जोखवा वास्ते तराजू ताकय में लागल छि, परन्तु भेटबाक आशा कम बुझना जाईत अछि यदा - कदा त्रुटि विपरित पारिस्थितिक कारण कहि सकैत छि - मुदा सराहनीय ।
धन्यबाद !!!
संजय कुमार झा - नागदह