बोल
कि लव आज़ाद हैं तेरे ...
मैं
भी मुँह में जुवान रखता हूँ ...
कोई
पूछा कि मुद्दा क्या है ...
अमृत
मंथन स्वर्ग का पहला नाटक ...
जो
दुनिया में नहीं होता वह दीखाई दे नाटक में ...

नाटक
में अच्छा लगना जरूरी है...
आज
के रंगमंच में इंस्टॉलेशन का दौड़ ...
जीवंतता,
जीवंत उपस्थिति...
अभिनेता
की कला को आगे बढ़ाना ही अन्य कलाओं का कार्य है ...
राजनैतिक
नाटक या नाटक में राजनीति ...

हमारी
दुनिया बेहतर नहीं है अभी ...
नाटक
सच को पहचानता है ...
नाटक
वाले ही राजनीति नहीं कर रहे ...
रणनीति
अपनाने की जरूरत है ...
बिना
राजनीति के सहारे कोई नाटक नहीं टिक सका ...
प्रकट
करने का माध्यम है रंगमंच ...
सच
के सहारे डट कर खड़ा होना रंगमंच है ...
किंचित
स्वाद के लिए बैठै दर्शक रंगमंच देखने आते हैं ...
संकुचित
हो गई हैं कलाएँ ...




कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें