गुरुवार, 19 सितंबर 2013

कुमुद रूपी मैथिली स्वर मे ठुमरी

 
असावरी रेपर्ट्ररीक कथक नृत्य प्रस्तुति
यैह थिक दिल्लीक हृदयस्थली इन्डिया हेबिटेट सेंटर । जँ दिल्ली अयलहुँ आ एहि परिसर मे नै घुमलौं त’ बुझि लिय’ जे पूरा दिल्ली नै घुमलहुँ । अत्याधुनिक वास्तुशास्त्र आ वास्तुशिल्प स’ सुसज्जित एहि भवन के मुख्य प्रेक्षागृह स्टेन ऑडिटोरियम मे [ 18 सितम्बर, 13 ] चलि रहल अछि ललित – अर्पण उत्सव – 13. आयोजक अछि असावरी रेपर्टरी । असावरी एकटा रागक नाम अछि जे भोर मे गावल जाइत अछि । एही रागक नाम पर एहि रेपर्टरीक नाम असावरी राखल गेल अछि । असावरी नामक कथक नृत्य रेपर्टरीक कथक सुप्रसिद्ध नृत्यांगना शोभना नारायण जी छथि । मूल रूप स’ बिहारक निवासी शोभना जी पद्म सम्मान स’ सम्मानित नृत्यांगना छथि । नृत्यक शिक्षा गुरु पं. बिरजू महाराज जी स’ ग्रहण केलथि ।
हँ ! त’ आब हम सब प्रवेश क’ गेलहुँ एहि मुख्य प्रेक्षागृह मे । आजुका दिन हम सब मैथिल लेल खास अछि । आई एहि भवनक सुव्यवस्थित प्रेक्षागृहक मंच पर विराजमान हेतीह मैथिली भाषी श्रीमती कुमुद झा दीवान । हम सब मैथिली भाषी सौकड़ो के संख्या मे हिनका सुनबा लेल उत्कण्ठित छी । दिल्लीक विभिन्न भाग स’ गणमान्य सुसंस्कृत मैथिलजन प्रेक्षागृह मे उपस्थित छथि ।
सुश्री कुमुद झा दीवान मैथिलजन के सम्मान करैत
लिअ’ शुरू भ’ गेल स्वागत, सम्मान अर्पणक बाद असावरी रेपर्टरीक कथक नृत्य स’ अनुगुंजित हुअ’ लागल प्रेक्षागृह । एकटक सब प्रेक्षक मंचपर नृत्य तालके संयोग स’ बनैत – बिगड़ैत नृत्य संरचना देखवा मे लीन भ’ गेलाह । अद्भुत पद चाल आ शारीरिक भंगिमाक संयोग ।
आब हमर सबहक आसा-आसी समाप्त भेल । मंच पर अपन साजो सामान ल’ उपस्थित भेलीह मैथिल ललना डॉ. कुमुद झा दीवान मूल रूप स’ मिथिलाक मधुबनीक निवासी सुश्री कुमुद झा अपन शास्त्रीय गायन प्रतिभा स’ देशे नहि विदेशो मे अपन एकल प्रस्तुति मे नाम स्थापित केने छथि ।  शास्त्रीय गायन मे सेहो हिनक मजबूत पकड़ ठुमरी एहन क्लिष्ट गायन मे छन्हि । कुमुद जी गायनक संग संग एहि विधाक शोधकार्य मे सेहो लागल छथि । हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत लेल  प्रतिष्ठित सम्मान इन्दिरा गाँधी प्रियदर्शनी एवार्ड-10 स’ सम्मानित सुश्री कुमुद झा अपन गायनक शिक्षा पद्मभूषण छन्नूलालजी मिश्रा, श्रीमती अनिमा दास गुप्ताश्रीमती शांति हीरानन्द जी स’ ग्रहण केने छथि । संगीतक महत्वपूर्ण तानसेन आयोजन, ग्वालियर स’ ल’ क’ नेहरू सेंटर, लंदन तक प्राय: सब महत्वपूर्ण संगीत आयोजन मे अपन उपस्थिति द’ चुकल छथि ।
 
 
ठुमरी । ठुमरीक दू प्रकार; पहिल बोलबाँटक ठुमरी आ दोसर बोल बनावक ठुमरी । बोल बनावक ठुमरीके सेहो दू प्रकार; पहिल पूरब अंग आ दोसर पंजाब अंग । पूरब अंग ठुमरीक सेहो दू भाग; पहिल लखनऊ शैली त’ दोसर बनारसी शैली ।  बनारस शैली मे सेहो एकटा आर अंग जकरा कहल जाइत अछि गया शैली । त’ आजुक श्रोता सुश्री कुमुद झा दीवान स’ पूरब अंगक बनारस शैली आ गया शैलीक ठुमरीक आनंद लेताह ।  
 
अपन सब साजिंदा संग बैसलीह कुमुद जी । अपन उद्गार मे अहू मंच पर सब स’ पहिने अपन मिथिला के मोन पाड़ब हिनक सदाशयता लागल । मंच स’ बेर बेर मैथिल समाज के धन्यवाद देब हिनक महानता अछि । शुरु भेल गायन । पहिल गान  “हमसे जिनु बोलो बलमा...” अपन शुरुआतहि स’ प्रेक्षक के मोहित क’ लेलक । गायन मे उतार चढ़ाव, लय मे माधुर्य आ मुखमंडल पर गीतक भावक प्रेषण अति रमणीय छल । दोसर मध्य लय मे “ न छेड़ो सैंया बाली उमर लड़कैयाँ..”  
 
सब गीत मे शब्द बहुत कम छल मुदा शब्द अपन अभिव्यक्ति मे अलग अलग रूप मे प्रेषित भ’ रहल छल । गायन विलम्बित लय स’ शुरु भ’ आगू बढ़ैत गेल । गीतक प्रत्येक स्वरक पसार अनेको तरह स’ बेर बेर आबि रहल छल । गयन क्रम मे छोट छोट मुरकी, खटका आदिक सुन्दर प्रयोग स’ गायनक गुणवत्ता परिलक्षित भ’ रहल छल ।  एकटा परिपक्व प्रस्तोता जेना कुमुद जी अपन गायनक प्राय: सब शब्द मे नीक आँगिक भंगिमाक पुट स’ आकर्षक छटा प्रसारित क’ रहल छलीह । जखन गायन अपन अंतिम रूप धारण क’र’ लगैत छल तखन संगत करनिहार तबला पर कहरबाक थाप बुझु भाव विभोर क’ दैत छल ।    
एहि स’ पहिने कतेको ठुमरी आयोजन मे गेल छी । मुदा एहि आयोजन मे अपनापन छल । मंचक स्वर अप्पन छल । देसी छल । खाँटी मैथिली स्वर छल । मिथिला नारीक सशक्तिकरणक द्योतक छल । मिथिलाक विदुषीक सम्मानक छल । आदरणिया श्रीमती डॉ. कुमुद झा दीवान जी केँ हार्दिक बधाई ।
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